Old Testament
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हबक्कूक 1:9 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका
वे सब के सब उपद्रव करने के लिये आते हैं; सामने की ओर मुख किए हुए वे सीधे बढ़े चले जाते हैं, और बंधुओं को रेत के किनकों के समान बटोरते हैं।
हबक्कूक 1:9 पद-दर-पद बाइबल टीका
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हबक्कूक 1:9 समानांतर पद और संबंधित वचन
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उत्पत्ति 41:49 (HINIRV) »
इस प्रकार यूसुफ ने अन्न को समुद्र की रेत के समान अत्यन्त बहुतायत से राशि-राशि गिनके रखा, यहाँ तक कि उसने उनका गिनना छोड़ दिया; क्योंकि वे असंख्य हो गईं।

व्यवस्थाविवरण 28:51 (HINIRV) »
और वे तेरे पशुओं के बच्चे और भूमि की उपज यहाँ तक खा जाएँगे कि तू नष्ट हो जाएगा; और वे तेरे लिये न अन्न, और न नया दाखमधु, और न टटका तेल, और न बछड़े, न मेम्ने छोड़ेंगे, यहाँ तक कि तू नाश हो जाएगा।

न्यायियों 7:12 (HINIRV) »
मिद्यानी और अमालेकी और सब पूर्वी लोग तो टिड्डियों के समान बहुत से तराई में फैले पड़े थे; और उनके ऊँट समुद्र तट के रेतकणों के समान गिनती से बाहर थे।
हबक्कूक 1:9 पर टिप्पणी (HINIRV)
पाठ का संदर्भ: हबक्कूक नबी ने बाबिल के अत्याचार और अस्थिर राजनीतिक हालात के बीच ईश्वर की उपस्थिति और उत्तर की आशा पर विचार किया है। इस पद में प्रभु ईश्वर द्वारा आने वाले दुष्ट आक्रमणकारियों की एक भयावह तस्वीर प्रस्तुत है, जो सत्ता के लिए उपद्रव करते हैं और अपने लक्ष्यों की पूर्ति हेतु सभी को दबाने को प्रस्तुत होते हैं।
मुख्य अर्थ
पंक्ति दिखाती है कि वे दुष्ट आक्रमणकारी इतने आक्रामक और एकसूत्री हैं कि उनके विचरण का तरीका संपूर्ण भय पैदा करता है। उनके कृत्यों में एक निरंतर, स्पष्ट ऐंठन है—आगे बढ़ना, मुख सीधे आकाश को नहीं बल्कि लक्ष्य पर टिका हुआ—और वे लोगों को ध्वस्त करने के लिए एकत्र होते हैं, जैसे रेत के किनारे से बटोरना। यह चित्र उपद्रव और शक्तिशाली दबंगई का प्रतीक है, जो समाज के स्थिर ढांचे और पवित्रताओं को तहस-नहस कर डालती है।
दो-तीन प्रमुख थीम
अन्य प्रासंगिक अंश (Cross references)
1) यशायाह 59:15-17 में न्यायाधीश की कमी और अन्याय पर ईश्वर की दृष्टि; यह बताता है कि दुष्टता सामाजिक ढांचे को कैसे तहस-नहस कर देती है, और ईश्वर न्याय की रीति से प्रतिक्रिया करते हैं।
2) पतरस 4:12-13 में वेदना और प्रतिउत्तर—खुद को कठिन परिस्थितियों में भी परमेश्वर की महिमा के साथ जुड़ने का आह्वान; यह बताता है कि दुष्टियों के समय में विश्वास कैसे टिक सकता है।
3) प्रकाशितवाक्य 6:2-4 में सत्ता की चमक और पतन की प्रवृत्ति; यह भविष्यवाणी के दृष्टिकोण से दिखाता है कि अत्याचारी नियंत्रित शक्ति के साथ कैसे प्रस्तुत होते हैं, फिर अंत में परमेश्वर के राज से उनका स्थान तय होता है।
व्यावहारिक चिंतन
हम देखें कि इस पाठ में भय, दबाव और दमन की वास्तविकता सामने आती है; परन्तु नबी की दृष्टि अक्सर ईश्वर के विरुद्ध धैर्य और विश्वास बनाए रखने की कहती है। यह प्रेरणा देता है कि हम अपने सामाजिक परिवेश में असहाय लोगों की रक्षा करें, अत्याचार के विरुद्ध सत्य और न्याय के लिए खड़े हों, और ईश्वर की पराकाष्ठा की प्रतीक्षा करें जो अंततः सत्य को स्थापित करेगा।
संक्षिप्त सार
हबक्कूक 1:9 यह दिखाता है कि दुष्ट शक्तियाँ कैसे एकत्र होकर समाज को उथल-पुथल में डाल देती हैं—सामने की ओर मुख किए हुए, लक्ष्यों के पीछे सीधे चलना, और लोगों पर दबाव डालना। पर कहानी विश्वासी को यह स्मरण कराती है कि अत्याचार के बीच भी ईश्वर न्याय करेगा, और विश्वास उसी में टिकेगा जो दमन के समय भी परमेश्वर की सहायता पर निर्भर रहे।
सूक्ष्म उद्धरण (जहाँ लागू)
अग्रणी टिप्पणीकारों के अनुसार, हार्नेस और आक्रमण की चित्रणात्मक भाषा दमन की गहराई को स्पष्ट करती है; हल्की-फुल्की व्याख्या नहीं, बल्कि एक क्रियात्मक चेतावनी है कि अत्याचार से निपटना किस प्रकार संभव हो सकता है।
नोट: यह टिप्पणी Matthew Henry, Albert Barnes और Adam Clarke के सार्वजनिक-डोमेन विश्लेषण से प्रेरित समेकित व्याख्या का सम्मिलित सार है।