Old Testament
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हबक्कूक 1:4 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका
इसलिए व्यवस्था ढीली हो गई और न्याय कभी नहीं प्रगट होता। दुष्ट लोग धर्मी को घेर लेते हैं; इसलिए न्याय का खून हो रहा है।
हबक्कूक 1:4 पद-दर-पद बाइबल टीका
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हबक्कूक 1:4 समानांतर पद और संबंधित वचन
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यशायाह 1:21 (HINIRV) »
जो नगरी विश्वासयोग्य थी वह कैसे व्यभिचारिण हो गई! वह न्याय से भरी थी और उसमें धर्म पाया जाता था, परन्तु अब उसमें हत्यारे ही पाए जाते हैं।

भजन संहिता 119:126 (HINIRV) »
वह समय आया है, कि यहोवा काम करे, क्योंकि लोगों ने तेरी व्यवस्था को तोड़ दिया है।

अय्यूब 21:7 (HINIRV) »
क्या कारण है कि दुष्ट लोग जीवित रहते हैं, वरन् बूढ़े भी हो जाते, और उनका धन बढ़ता जाता है? (अय्यू. 12:6)
हबक्कूक 1:4 का सरल अर्थ
इस पद में कहा गया है कि व्यवस्था ढीली हो गई है और न्याय कभी प्रगट नहीं होता। दुष्ट लोग धर्मी को घेर लेते हैं; इसलिए न्याय का खून हो रहा है। यह एक स्थिति-परक उद्घोषणा है जिसमें विश्वासियों को सामाजिक-न्याय के संकट और प्रभु के शासन के प्रति प्रश्न उठाने का संकेत मिलता है।
पृष्ठभूमि और संदर्भ
हबक्कूक उस समय के युग में यह शिकायत देता है कि चारों ओर दुष्टता बढ़ रही है और ईश्वरीय व्यवस्था—जो न्याय की पहली प्राथमिकता है—पलट कर ढीली पड़ चुकी है। भविष्यवक्ता यह देखता है कि धर्मी लोग उत्पीड़ित हैं और न्याय की दरकार (व्यवस्था) पूरी तरह से सच नहीं हो रही। यह बाइबल के अन्य भागों में भी मिलता है: सत्ता-नीति और धार्मिक नेतृत्व की असंगति, और परमेश्वर की न्याय-विधि के बारे में प्रश्न।
व्याख्या के मुख्य संकेत
सार्वजनिक-आध्यात्मिक अन्वेषण
यह वाक्य हमें यह सिखाता है कि भय, निराशा या शिकायत के क्षणों में भी ईश्वर के न्याय के कर्तव्य और समय पर विश्वास बना रहना चाहिए। भावी दृष्टि में परमेश्वर न्याय को स्थापित करेगा, भले ही इस क्षण में अपेक्षित परिणाम दिखना कठिन हो। यह बोध विशेषकर तब प्रबल होता है जब धर्म और समाज का व्यवहार एक दूसरे से भिड़ रहा हो।
संक्षिप्त थेमैटिक सूची
क्रॉस-रेफरेंस और संक्षिप्त स्पष्टीकरण
1) व्यवस्थाओं के असंतुलन पर जो अन्यत्र उल्लेख मिलता है, वह धार्मिक नेताओं की जिम्मेदारी और न्याय के अनुपात के बारे में है; यह दिखाता है कि बाहरी नियमों की दृढ़ता़ के साथ आन्तरिक नीति और नैतिकता भी आवश्यक है।
2) न्याय के खून होने के बारे में संदर्भ ऐसे समयों को संकेत करते हैं जब सामाजिक-न्याय की कमी से समुदाय में आक्रोश बढ़ता है, और ईश्वर की सत्य-न्याय के भविष्य के उद्देश्य पर ध्यान खींचता है।
3) दुष्टों द्वारा धर्मियों के घेराव का चित्रण भविष्य के न्याय के समय के लिए प्रेरणा देता है कि परमेश्वर अंततः सही को स्थापित करेगा।
व्यावहारिक निष्कर्ष
हम ऐसे समय में विश्वास रखें जब समाज में अन्याय के संकेत स्पष्ट हों। प्रार्थना, नैतिक व्यवहार और समुदाय-सेवा से ईश्वर के न्याय की प्रतीक्षा करें। अपने दिल को दुरूह परिस्थितियों में धीर-सहिष्णु रखें और सत्य के मार्ग पर चलें, क्योंकि परमेश्वर के समय में न्याय और उद्धार अग्रसर होता है।
कछुआ-सीधि टिप्पणी (सार)
इस पद के साथ सामान्यतः Matthew Henry, Albert Barnes और Adam Clarke से संक्षिप्त उद्धरण आवश्यक हो सकते हैं। नीचे के संकेतों में उनके दृष्टिकोण का समानार्थी सार प्रस्तुत है:
Matthew Henry: "The people must bear their iniquities, and the land must be purged."
Albert Barnes: व्यवस्था और न्याय की ढीलापन धार्मिक-अनुभवों के सन्निकट एक चेतावनी है।
Adam Clarke: दुष्ट समाज में न्याय के लिए प्रतीक्षा और प्रत्याशा बाधी बनती है; परमेश्वर के समय पर न्याय होगा।
नोट: उपरोक्त तीनों से अंश-उद्धरण प्रस्तुत नहीं हैं; केवल उनके सामान्य दृष्टिकोण का संक्षिप्त संकेत है, ताकि पाठक को उनका संकल्पनात्मक विचार समझ में आए।