Old Testament
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हबक्कूक 1:12 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका
हे मेरे प्रभु यहोवा, हे मेरे पवित्र परमेश्वर, क्या तू अनादि काल से नहीं है? इस कारण हम लोग नहीं मरने के। हे यहोवा, तूने उनको न्याय करने के लिये ठहराया है; हे चट्टान, तूने उलाहना देने के लिये उनको बैठाया है।
हबक्कूक 1:12 पद-दर-पद बाइबल टीका
*** इस टीका में सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध कुछ प्राचीन और क्लासिक स्रोतों की सामग्री शामिल है। कुछ सामग्री को कृत्रिम बुद्धिमत्ता उपकरणों की सहायता से संसाधित, संक्षिप्त या अनुवादित किया गया हो सकता है। हर व्याख्या को बाइबल के पूरे पाठ और उसके संदर्भ के साथ अवश्य जाँचें। यदि आपको कोई त्रुटि या ऐसा अनुवाद मिले जिसे सुधारने की आवश्यकता हो, तो कृपया हमसे संपर्क करें।
हबक्कूक 1:12 समानांतर पद और संबंधित वचन
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व्यवस्थाविवरण 32:4 (HINIRV) »
“वह चट्टान है, उसका काम खरा है*; और उसकी सारी गति न्याय की है। वह सच्चा परमेश्वर है, उसमें कुटिलता नहीं, वह धर्मी और सीधा है। (रोमी. 9:14)

व्यवस्थाविवरण 33:27 (HINIRV) »
अनादि परमेश्वर तेरा गृहधाम है, और नीचे सनातन भुजाएँ हैं। वह शत्रुओं को तेरे सामने से निकाल देता, और कहता है, उनको सत्यानाश कर दे।

भजन संहिता 90:2 (HINIRV) »
इससे पहले कि पहाड़ उत्पन्न हुए, या तूने पृथ्वी और जगत की रचना की, वरन् अनादिकाल से अनन्तकाल तक तू ही परमेश्वर है।
हे मेरे प्रभु यहोवा—हबक्कूक 1:12 का भीतर का अर्थ
यह छोटा Verse यह दिखाता है कि विश्वासियों को कठिन परिस्थितियों के बीच भी परमेश्वर की अद्वितीय सत्ता और न्याय पर भरोसा कैसे बनाए रखना चाहिए। शोर-शराबे के बीच हबक्कूक एक गहरी प्रश्नावली उठाते हैं: क्या परमेश्वर अनादि काल से नहीं है? यदि वह सब कुछ Creator है, तो अन्याय, प्रतीक्षा, और हिंसा क्यों चलित हैं? इस पाठ를 में बुर्ज गिराने के बजाय, भक्त अपने प्रभु की अवस्थिति और न्याय पर स्थिर रहते हैं।
पारिवारिक संदर्भ और मूल संदर्भ
हबक्कूक लगभग समय-सीमा में बाइबल के छोटे-छोटे पुस्तकों में से है जो भरोसे और न्याय के प्रश्नों को भगवान के दायरे में रखता है। इस वाक्य में हबक्कूक पूछते हैं: क्या यहोवा अनादि काल से नहीं है? यह न केवल अस्तित्व का प्रश्न है, बल्कि यह विश्वास की धुरी है कि परमेश्वर ने उद्धार-योजना में बार-बार अन्याय और सत्ता-के दमन के विरुद्ध न्याय निर्धारित किया है। वे यह भी स्वीकारते हैं कि यहोवा ने राष्ट्रों के लिए एक कारण और समय निर्धारित किया है—पर्यवेक्षी न्याय के लिए।
मुख्य संदेश
1) परमेश्वर का अस्तित्व अजय है और उसका पदचिह्न अतीत से वर्तमान को जोड़ता है। 2) वह न्याय करनe के लिए सत्ता/ताकत देता है—यहाँ प्रश्न उभरता है कि कैसे दुःख और अत्याचार के बीच भी उसका निर्णय ठीक समय पर पूरा होगा। 3) विश्वासियों को इस तथ्य से आश्वस्त होना चाहिए कि चट्टान—यानी परमेश्वर—पर टिके रहने से डर नहीं। यह भरोसा भी है कि प्रभु उलाहना/उचित सजाये के लिए व्यवस्था स्थापित करते हैं, तब भी उनका प्रेम और मोअफकत बना रहता है।
थीम और बाइबल के समान विचार
- परमेश्वर की सार्वभौमिक सत्ता: ब्रह्मांड की हर गतिविधि उसके आदेश के अंतर्गत है।
- न्यायिक उद्देश्य: वह उलाहना और दंड के माध्यम से सत्य और मर्यादा का पुनर्निर्माण करते हैं।
- विश्वास की स्थिरता: कठिन समय में भी प्रार्थना और इमान से टिके रहना चाहिए।
क्रॉस-रेफरेंसेस (सीधे शेल्फ पर दिये नहीं, लेकिन अर्थ-संगत संदर्भ)
1) दानिय्येल 4:35—सत्य कि परमेश्वर का निर्णय परिपूर्ण है और सब कुछ उसी के अनुसार चलता है; यहूदा के इतिहास में भी उसका सत्ता-आदेश स्पष्ट है।
2) रोम 11:33—अद्भुत ज्ञान और योजना की गहराई, जो मोहित कर दे।
3) राजवंश 8:23—यहोवा की प्रतिज्ञा और उसकी इच्छा के अनुसार राष्ट्र-न्याय का समय।
इन संदर्भों में यह दर्शाया गया है कि परमेश्वर न्याय करने के लिए ठहराते हैं, और यह ठहराव एक उद्देश्यपूर्ण क्रम में है।
पवित्र लेखन से जुड़े छोटे उद्धरण (पूर्व-प्रयोजन) — उच्चारण
यह भनक कि परमेश्वर अनादि काल से है और न्याय के लिए ठहराते हैं—यह विचारक पाठक को गहराई से प्रभु की सत्ता के प्रति विश्वास दिलाते हैं। (यह अनुभाग विशिष्ट पुराने commentators के संकल्पनात्मक नुक्ते को summarize करता है; पूर्ण उद्धरण केवल परिशिष्ट स्रोतों के अनुसार इस्तेमाल करें।)
टिप्पणी-योग्य विचार
- जब जीवन में अत्याचार दिखे, तब भी परमेश्वर के असंदेह नहीं होते; वे समय पर न्याय करते हैं।
- चट्टान के रूप में परमेश्वर पर विश्वास रखना, कठिन समय में सुरक्षा देता है और भय को कम करता है।
संक्षिप्त देवotional Reflection
हम सामना करते हैं—कभी-कभी जटिल परिस्थितियाँ जो न्याय की प्रकृति के बारे में सवाल उठाती हैं। लेकिन इस Verse में यह प्रेरणा है कि परमेश्वर अनादि है, वह प्रतिशोध नहीं करता बिना प्रेम के; बल्कि वह सत्य और व्यवस्था के अनुसार कदम उठाता है। जब Zweifel उठे, तब यह सोचना चाहिए कि प्रभु की सत्ता और पवित्रता सामने है। अपनी आशाओं को जवाब देने दें कि क्या वह आज भी न्याय करेंगा—हाँ, और वह हमारी रक्षा भी करेगा।
अनुदेशात्मक क्रॉस-रेफ़रेन्स के साथ, यह पाठ हमें यह याद दिलाता है कि विश्वास के पथ पर स्थिर रहने के लिए प्रभु के उद्देश्य को समझना आवश्यक है: वह समय पर न्याय करेगा, और उसकी चट्टान पर टिके रहना ही हमारा सुरक्षा-स्त्रोत है।