Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीChapter
उत्पत्ति 1 उत्पत्ति 2 उत्पत्ति 3 उत्पत्ति 4 उत्पत्ति 5 उत्पत्ति 6 उत्पत्ति 7 उत्पत्ति 8 उत्पत्ति 9 उत्पत्ति 10 उत्पत्ति 11 उत्पत्ति 12 उत्पत्ति 13 उत्पत्ति 14 उत्पत्ति 15 उत्पत्ति 16 उत्पत्ति 17 उत्पत्ति 18 उत्पत्ति 19 उत्पत्ति 20 उत्पत्ति 21 उत्पत्ति 22 उत्पत्ति 23 उत्पत्ति 24 उत्पत्ति 25 उत्पत्ति 26 उत्पत्ति 27 उत्पत्ति 28 उत्पत्ति 29 उत्पत्ति 30 उत्पत्ति 31 उत्पत्ति 32 उत्पत्ति 33 उत्पत्ति 34 उत्पत्ति 35 उत्पत्ति 36 उत्पत्ति 37 उत्पत्ति 38 उत्पत्ति 39 उत्पत्ति 40 उत्पत्ति 41 उत्पत्ति 42 उत्पत्ति 43 उत्पत्ति 44 उत्पत्ति 45 उत्पत्ति 46 उत्पत्ति 47 उत्पत्ति 48 उत्पत्ति 49 उत्पत्ति 50Verse
उत्पत्ति 41:1 उत्पत्ति 41:2 उत्पत्ति 41:3 उत्पत्ति 41:4 उत्पत्ति 41:5 उत्पत्ति 41:6 उत्पत्ति 41:7 उत्पत्ति 41:8 उत्पत्ति 41:9 उत्पत्ति 41:10 उत्पत्ति 41:11 उत्पत्ति 41:12 उत्पत्ति 41:13 उत्पत्ति 41:14 उत्पत्ति 41:15 उत्पत्ति 41:16 उत्पत्ति 41:17 उत्पत्ति 41:18 उत्पत्ति 41:19 उत्पत्ति 41:20 उत्पत्ति 41:21 उत्पत्ति 41:22 उत्पत्ति 41:23 उत्पत्ति 41:24 उत्पत्ति 41:25 उत्पत्ति 41:26 उत्पत्ति 41:27 उत्पत्ति 41:28 उत्पत्ति 41:29 उत्पत्ति 41:30 उत्पत्ति 41:31 उत्पत्ति 41:32 उत्पत्ति 41:33 उत्पत्ति 41:34 उत्पत्ति 41:35 उत्पत्ति 41:36 उत्पत्ति 41:37 उत्पत्ति 41:38 उत्पत्ति 41:39 उत्पत्ति 41:40 उत्पत्ति 41:41 उत्पत्ति 41:42 उत्पत्ति 41:43 उत्पत्ति 41:44 उत्पत्ति 41:45 उत्पत्ति 41:46 उत्पत्ति 41:47 उत्पत्ति 41:48 उत्पत्ति 41:49 उत्पत्ति 41:50 उत्पत्ति 41:51 उत्पत्ति 41:52 उत्पत्ति 41:53 उत्पत्ति 41:54 उत्पत्ति 41:55 उत्पत्ति 41:56 उत्पत्ति 41:57



उत्पत्ति 41:49 — अनंत आशीष की थाती
यूसुफ ने मिस्र के कारण वर्षों तक समृद्धि के लिए योजना बनाते हुए अन्न को समुद्र की रेत के समान अत्यंत बहुतायत से राशि-राशि गिनके रखा, यहाँ तक कि वे असंख्य हो गईं। यह पाठ कथा-स्थितियों के बीच सीधे निष्कर्ष देता है कि पराक्राम और बुद्धिमत्ता ईश्वर की दी हुई कृपा से जुड़ी है।
परिवेश और पाठ का तात्पर्य
यूसुफ को फरोह के सपनों की व्याख्या और फिर सत्ता-संघटन के माध्यम से आपातकालीन समय के लिए योजना बनाते देखना मिलता है। वर्षगणना और अन्न-संग्रह का यह उल्लेख उनको एक दीर्घकालिक, सामुदायिक सुरक्षा-योजना के प्रतीक के रूप में प्रस्तुत करता है। प्रयोगशाला-सीधा निष्कर्ष है कि कठिन समय में भी भगवान की योजना और अव्यक्त कृपा से जीवन-रेखा बनती है।
ईश्वर, विश्वास और शब्द-चित्र
यह पाठ बताता है कि परमेश्वर की कृपा और निर्देशन मानव के विवेकपूर्ण, परिश्रमी और दूरदर्शी क्रिया-कलापों के साथ कैसे जुड़ती है। यूसुफ की स्वामित्व-घटना एक तरह से भरोसे का प्रदर्शन है—भले ही परिस्थिति विपरीत हो, दयालु ईश्वरYानी की योजना निर्णायक मोड़ लेती है। अध्ययनात् बताता है कि धैर्य, योजना और निर्मल निष्ठा अंततः सुरक्षा और सहायता के स्रोत बनते हैं।
की-वचन-शब्द और भावार्थ
- “अत्यन्त बहुतायत से”: एक संदर्भ है कि समय पर ईश्वर की कृपा से मात्रा सीमा के पार पहुँच जाती है, ताकि आवश्यकता के समय भी पर्याप्त बना रहे।
संबद्ध अंश
cross-reference 1: सेनेह 41:37–40 — ईश्वर के लिए यूसुफ की बुद्धिमत्ता और फरोह की भागीदारी का मेल। यह दर्शाता है कि अधिकार और प्रेरणा एक साथ कैसे चलते हैं।
cross-reference 2: उत्पत्ति 45:5–8 — दया और संरक्षण की योजना में भूमिका, जब यूसुफ अपने भाइयों के प्रति माफी और उद्धार का उद्देश्य स्पष्ट करते हैं।
cross-reference 3: उत्पत्ति 39:21–23 — परीक्षणों के बीच ईश्वर का साथ और उनकी न्यायपूर्ण व्यवस्था की पुष्टि।
आज के लिए अनुप्रयोग
- कठिन समय में भी योजना बनाते रहें; उच्च उद्देश्य के लिए वित्तीय और भौतिक संसाधनों को न बढ़ा-चढ़ाकर, न घबराकर, परिश्रम और विवेक से संचालित करें।
- भरोसा रखें कि ईश्वर की दृष्टि में समय-समय पर आवश्यकताओं की पूर्ति होती है; एक दीर्घकालिक दृष्टि से जीवन-योजना बनाएं और परिवार-समुदाय की सुरक्षा के लिए कदम उठाएं।
हिंदी टिप्पणियों के संदर्भ
यह टिप्पणी Matthew Henry, Albert Barnes और Adam Clarke के सार्वजनिक-डोमेन कथनों से प्रेरित समन्वित दृष्टिकोण का एक अद्यतन, मौलिक संस्करण है।
Note: उद्धृत सटीक पंक्तियाँ केवल संकेत-रूप में उद्धृत हैं; पूर्ण वचन नहीं।