उत्पत्ति 41:35 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका

और वे इन अच्छे वर्षों में सब प्रकार की भोजनवस्तु इकट्ठा करें, और नगर-नगर में भण्डार घर भोजन के लिये, फ़िरौन के वश में करके उसकी रक्षा करें।

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उत्पत्ति 41:35 पद-दर-पद बाइबल टीका

वाक्य की पृष्ठभूमि और तत्काल हालात

उत्पत्ति 41 में जो संकेत मिलता है, वह जोड़ता है कि मिस्र के दाऊद-सरकार के समय, फ़रौन ने जो सपनों की घटना देखी, उसकी व्याख्या से वह वही मार्ग चुने जो आगे की स्वर्ण-युग के लिए आवश्यक था। यूसुफ की सत्ता और उनके योजना-कार्य के मध्य, 41:35 में वह निर्देश आता है कि अच्छे वर्षों में सभी प्रकार की भोजन-वस्तु जमा करें और नगर-नगर में भण्डार-घर बनाकर उन्हें फ़रौन के नियंत्रण में रख कर उनकी रक्षा करें। यह संदेश दिखाता है कि ईश्वर की पुरुषार्थपूर्ण योजना के द्वारा अकाल से पहले की तैयारी संभव होती है, ताकि भविष्य में देह-भरण के साथ-साथ विश्वास भी सुरक्षित रहे।

पद का ध्येय और विश्वास का प्रकाश

यह वचन बताता है कि निर्बाध बुद्धिमत्ता और नियोजन से प्रभु के प्रिय कार्य आगे बढ़ते हैं। यूसुफ अपने अनुभव और परिश्रम से, ईश्वर के साहचर्य में, अकाल से पहले के दिनों के लिए एक संरचना बनाते हैं। विश्वास की दृष्टि से यह दिखाता है कि कठिन समय से पहले की तैयारी ईश्वर की देखरेख में होती है; भंडारों का संचय न सिर्फ भौतिक संरक्षण है, बल्कि समुदाय के लिए अमन और स्थिरता का स्रोत है।

शब्द-छवि की स्पष्टता

• भोजन-वस्तु: आहार-संपदा की व्यापकता, जो केवल भूख शांत करने तक सीमित नहीं रहती, बल्कि सामाजिक-आर्थिक स्थिरता को भी दर्शाती है।
• भण्डारघर: योजनाबद्ध संरचना, जो अभी और बाद में उपयोग के लिए सुरक्षित है; सुरक्षा और दूरदर्शिता का प्रतीक है।
• फ़रौन के वश में करके: सत्ता-व्यवस्था और संरचना के साथ दृढ़ नियंत्रण की ओर संकेत, ताकि संकट के समय भी शासन-व्यवस्था बनी रहे।

अन्य समान पांडुलिपियाँ तथा संदर्भ

• प्रेरित नेतृत्व के बारे में अधिष्ठान: जैसे कि यूसुफ के पूर्व संदेशों में बताई गई सावधानी और योजना का मूल्य।
• विश्वास-आस्था के संचालन: परमेश्वर के मार्गदर्शन के साथ मानवीय विवेक का संयोजन।
• अनुदेशक दृष्टि: कठिन समय के लिए पूर्व-तैयारी को परमेश्वर के रूप में स्वीकारना।

अन्य पवित्रग्रंथीय संकेत—सूक्ष्म संदर्भ

• उत्पत्ति 41:36 — भण्डार-घर से प्राप्त संसाधनों की पुनः वितरण की दिशा में आगे का क्रम।
• उत्पत्ति 41:57 — सभी भूमि वाले लोग अकाल के समय मिस्र के देश में सहायता पाते हैं।
• भजन 33:18-19 — जो लोग धैर्य और सावधानी से भाग्य बनाते हैं, वे उद्धार के समय सुरक्षित रहते हैं।

आज के लिए अनुप्रयोग

1) योजना-निर्माण में ईश्वर की मानवीय भागीदारी: आज भी सामुदायिक स्थिरता के लिए वित्तीय और भौतिक योजनाओं को व्यवस्थित करना एक उपाय है—पर परमेश्वर पर निर्भर रहने का दिल बनाएं।
2) संकट-स prep के मूल्यों: पूर्व-तैयारी से अवश्य लाभ होता है, पर उसे चिंतन-हृदय और दयालुता के साथ निभाएं।
3) नेतृत्व में नैतिकता: व्यावहारिक निर्णयों के साथ दया और न्याय की दृष्टि बनाए रखें।

संक्षिप्त समेकन

उत्पत्ति 41:35 में स्पष्ट निर्देश है कि कठिन वर्षों के लिए बोझ उठाने की तैयारी में न केवल भौतिक संचय, बल्कि शासन-व्यवस्था की रक्षा-योजना भी आवश्यक है। यह पाठ हमें ईश्वर की योजनाओं के अंतर्निहित विवेक, और मानवीय पलों में विश्वास-कार्य के संयोजन की याद दिलाता है।

पूनः उद्धरण (यदि उद्धृत किया गया हो):Matthew Henry, Albert Barnes, Adam Clarke के मौलिक व्याख्यों से सीधी उद्धरण के छोटे अंश केवल उपलब्ध हों, पर मौलिक विचार समाहित किये गये हैं; पूर्ण उद्धरण यहां नहीं दिया गया है।

Cross-references (संक्षेप)

• उत्पत्ति 41:36 — भण्डार-घर का संचालन और पुनः वितरण का क्रम। इसका संबंध बताता है कि कैसे संग्रह को संतुलित और न्यायपूर्ण बनाना चाहिए।
• उत्पत्ति 45:7 — ईश्वर के उद्धार के लिए विख्यात योजना के साथ, भूतपूर्व विपदाओं का उद्देश्य भविष्य को बचाना।
• भजन 127:5 — परिवार और समुदाय की सुरक्षा के लिए योजनाबद्ध, दृढ़ विश्वास से भरे हाथ चाहिए।

*** इस टीका में सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध कुछ प्राचीन और क्लासिक स्रोतों की सामग्री शामिल है। कुछ सामग्री को कृत्रिम बुद्धिमत्ता उपकरणों की सहायता से संसाधित, संक्षिप्त या अनुवादित किया गया हो सकता है। हर व्याख्या को बाइबल के पूरे पाठ और उसके संदर्भ के साथ अवश्य जाँचें। यदि आपको कोई त्रुटि या ऐसा अनुवाद मिले जिसे सुधारने की आवश्यकता हो, तो कृपया हमसे संपर्क करें।

उत्पत्ति 41:35 समानांतर पद और संबंधित वचन

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इसलिए जब अकाल सारी पृथ्वी पर फैल गया, और मिस्र देश में अकाल का भयंकर रूप हो गया, तब यूसुफ सब भण्डारों को खोल-खोलकर मिस्रियों के हाथ अन्न बेचने लगा।

उत्पत्ति 41:48 HINIRV संबंधित बाइबल पद का चित्र
उत्पत्ति 41:48 (HINIRV) »
और यूसुफ उन सातों वर्षों में सब प्रकार की भोजन वस्तुएँ, जो मिस्र देश में होती थीं, जमा करके नगरों में रखता गया, और हर एक नगर के चारों ओर के खेतों की भोजन वस्तुओं को वह उसी नगर में इकट्ठा करता गया।

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उत्पत्ति 45:6 (HINIRV) »
क्योंकि अब दो वर्ष से इस देश में अकाल है; और अब पाँच वर्ष और ऐसे ही होंगे कि उनमें न तो हल चलेगा और न अन्न काटा जाएगा। (प्रेरि. 7:15)

उत्पत्ति 41 (HINIRV) Verse Selection

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