Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीChapter
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उत्पत्ति 41:45 — यूसुफ को फ़िरौन का नाम सापनत-पानेह और विवाह
क्या पाठ यह दिखाता है—ईश्वर और विश्वास के बारे में
यह पारलोकिक परिवर्तन ईश्वर की कृपा और योजना के संचालन की पुष्टि है। यूसुफ ने कठिन परीक्षणों, जबरदस्त धाराओं और धोखे को सहन किया, फिर भी ईश्वर उसकी वाचा के साथ बना रहा। यहाँ देखा जाता है कि परमेश्वर अपने दास के लिए उपयुक्त ओहदे, सुरक्षा और प्रतिष्ठा खोल देता है—यह बताता है कि ईश्वर धर्मी के लिए राह बनाते हैं, भले ही वह रास्ता सीमा-रेखा के विवादों से घिरा हो।
महत्वपूर्ण शब्दों और चित्रों की स्पष्टता
अन्य धर्मग्रंथों से जुड़ी बातें (Cross-references)
पढ़ने-समझने के लिए छोटी व्याख्या
कथा का यह हिस्सा बताता है कि सत्ता और सम्मान केवल बाहरीता नहीं होते; वे उस व्यक्ति के चरित्र और परमेश्वर के उद्देश्य के अनुरूप मिलते हैं। यूसुफ की आस्था और धैर्य ने उसे सुरक्षा और अवसर दिए, ताकि वह मिस्र के भीतर एक मार्गदर्शक बन सके—परमेश्वर की बड़ी योजना के अनुसार, जिससे ब्रह्मांड के उद्धार-कार्य में सहयोग मिल सके।
आज के लिए आवेदन
इस वर्णन पर आधारित एक संक्षिप्त सार: परमेश्वर अपने व्यक्तियों के साथ सदा साथ रहते हैं और उनके जीवन में सत्ता, सम्मान और स्थिरता के संकेत खोलते हैं, ताकि उनकी योजनाएं पूरे समूह के लिए उद्धार का मार्ग बन सकें।
नोट: यह टिप्पणी Matthew Henry, Albert Barnes और Adam Clarke के सार्वजनिक-डोमेन विचार-सम्पादन से प्रेरित सार के साथ एकीकृत है; यदि भी मूल उद्धरण उपलब्ध हों, तो आवश्यक जगहों पर संक्षेप में उद्धृत किया गया है।