भजन संहिता 34:15 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका

यहोवा की आँखें धर्मियों पर लगी रहती हैं, और उसके कान भी उनकी दुहाई की ओर लगे रहते हैं। (यूह. 9:31)

भजन संहिता 34:15 पद-दर-पद बाइबल टीका

सीधे अर्थ का सार

भजन संहिता 34:15 का मतलब है कि ईश्वर की दृष्टि धर्मी लोगों पर स्थिर रहती है; वह उनके दुष्टों के कर्मों की नहीं, बल्कि उनके निवेदन और आशीर्वाद के लिए उनकी प्रार्थनाओं को सुनते हैं। यह उद्घोष इस बात का आश्वासन देता है कि परमेश्वर नैतिकता और प्रार्थना के प्रति सक्रिय रूप से जागरूक रहते हैं, और यदि वे धरा पर सत्य और विनय से रहते हैं, तो प्रभु उनकी रक्षा एवं सहायता करते हैं।

संदर्भ विविधता और पृष्ठभूमि

यह पद यहूदा-युग की मानसिकता और भक्ति के परिचित गीतों का हिस्सा है, जिसमें दुष्टों के विरुद्ध ईश्वरीय न्याय और भक्तों के लिए दयालु उद्धार का संदेश है। यह शास्त्रार्थ दर्शाता है कि ईश्वर की आँखें सीधे न्याय पर हैं—धर्मियों पर उनकी निगाह लगी रहती है और उनके संकटों में उनकी सहायता का अनुभव संभव होता है। यह संदर्भ यूह. 9:31 के साथ जोड़ा गया है ताकि यह स्पष्ट हो कि ईश्वर के लिए धार्मिक रीति-नीति और सच्चे प्रतिदिन के विश्वास का मूल्य है।

व्याख्यात्मक संकेत

  • धर्मियों पर दृष्टि: परमेश्वर उनका आचरण, विश्वास और प्रार्थना-पथ पर नजर रखते हैं; उनका सत्य और निवेदन सुनना उनके प्रेम का प्रमाण है।
  • कान की लगन: प्रभु उन praying आवाजों को सुनते हैं जो दिल से आते हैं, और उनके दीन-बल को ध्यान में रखते हैं।
  • यथार्थ सुरक्षा: अगर भक्त सत्य और विनम्रता से रहते हैं, तो वे प्रभु की सुरक्षा और मार्गदर्शन के योग्य होते हैं।

संदर्भित पासेज़ से छोटी—संरचित जोड़ी

1) योहान 9:31 – यह दिखाता है कि परमेश्वर केवल धार्मिक कर्मों की नहीं, बल्कि विश्वास-आधारित अनुग्रह को भी महत्व देते हैं; जो सच्चे दिल से कदम उठाते हैं, वे परमेश्वर के कड़े और दयालु कान सुनते हैं।

2) भजन 34:17 – द्रोपद एवं विपत्ति में धर्मियों की पुकार पर उद्धार का दृढ़ संकेत देता है कि प्रभु近 रहते हैं और सहायता करते हैं।

3) भजन 34:19 – सत्य है कि धर्मी अनेक दुःखों में भी परमेश्वर के उद्धार का अनुभव करता है, क्योंकि उसी के पास सहायता की धारा रहती है।

मध्यस्थ टिप्पणी—प्रमुख विचार

यह पंक्ति एक तथ्यात्मक प्रेरणा है: ईश्वर की निगाहे और कान सक्रिय हैं—धर्मियों के लिए न तो दूरी है न निष्क्रियता। यह हमें विश्वास देता है कि प्रतिरोधों के समय भी प्रार्थना का मूल्य और ईश्वर की नज़र ऊपर है। Matthew Henry के शब्दों में, धर्मी का संकट ईश्वर के प्रति निष्ठा की पुष्टि है; Albert Barnes का विचार है कि यह उद्धार के समय की अनुभूति है जब प्रभु धर्मियों की पुकार सुनते हैं; Adam Clarke इसे ईश्वरीय संवेदना और जागरूकता से जोड़ते हैं—जो कि आंतरिक धर्म और बाहरी आचरण दोनों पर लागू होता है।

संक्षिप्त अद्यतन निष्कर्ष

धर्मियों पर ईश्वर की दृष्टि और कान की सक्रियता उन्हें कठिनाइयों के बीच सुरक्षा-आश्वासन देती है। यह कहना उचित है कि जब हम सत्य में रहते हैं और प्रभु से विनय से निवेदन करते हैं, वे हमारे साथ रहते हैं और हमारी दुआएं सुनते हैं।

टेकअवे

  • धर्म की आस्था और विनय से प्रतिदिन के आशीर्वादों को प्राप्त किया जा सकता है।
  • कठिन समय में भी परमेश्वर के नज़दीक आने के लिए प्रार्थना और सत्य आवश्यक हैं।

*** इस टीका में सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध कुछ प्राचीन और क्लासिक स्रोतों की सामग्री शामिल है। कुछ सामग्री को कृत्रिम बुद्धिमत्ता उपकरणों की सहायता से संसाधित, संक्षिप्त या अनुवादित किया गया हो सकता है। हर व्याख्या को बाइबल के पूरे पाठ और उसके संदर्भ के साथ अवश्य जाँचें। यदि आपको कोई त्रुटि या ऐसा अनुवाद मिले जिसे सुधारने की आवश्यकता हो, तो कृपया हमसे संपर्क करें।

भजन संहिता 34:15 समानांतर पद और संबंधित वचन

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1 पतरस 3:12 (HINIRV) »
क्योंकि प्रभु की आँखें धर्मियों पर लगी रहती हैं, और उसके कान उसकी विनती की ओर लगे रहते हैं*, परन्तु प्रभु बुराई करनेवालों के विमुख रहता है।” (भज. 34:15-16, यूह. 9:31, नीति. 15:29)

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भजन संहिता 34:17 (HINIRV) »
धर्मी दुहाई देते हैं और यहोवा सुनता है, और उनको सब विपत्तियों से छुड़ाता है।

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अय्यूब 36:7 (HINIRV) »
वह धर्मियों से अपनी आँखें नहीं फेरता*, वरन् उनको राजाओं के संग सदा के लिये सिंहासन पर बैठाता है, और वे ऊँचे पद को प्राप्त करते हैं।

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