Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीVerse
यहोशू 22:1 यहोशू 22:2 यहोशू 22:3 यहोशू 22:4 यहोशू 22:5 यहोशू 22:6 यहोशू 22:7 यहोशू 22:8 यहोशू 22:9 यहोशू 22:10 यहोशू 22:11 यहोशू 22:12 यहोशू 22:13 यहोशू 22:14 यहोशू 22:15 यहोशू 22:16 यहोशू 22:17 यहोशू 22:18 यहोशू 22:19 यहोशू 22:20 यहोशू 22:21 यहोशू 22:22 यहोशू 22:23 यहोशू 22:24 यहोशू 22:25 यहोशू 22:26 यहोशू 22:27 यहोशू 22:28 यहोशू 22:29 यहोशू 22:30 यहोशू 22:31 यहोशू 22:32 यहोशू 22:33 यहोशू 22:34



यहोशू 22:23 का अर्थ और संदर्भ
इस आयत का केंद्रीय संदेश है: यदि हमने वेदी ऐसी बनाई है ताकि यहोवा के पीछे चलना रोका जाए या उस पर होमबलि, अन्नबलि, या मेलबलि चढ़ाई जाए, तो यहोवा इसकी जिम्मेदारी लेगा। सरल शब्दों में, यहूदा के दो-दानवीय शब्द-रूपों के विरुद्ध चेतावनी है—कर्ता-भाव और प्रेरणा की शुद्धता की ज़रूरत।
पृष्ठभूमि और संदर्भ
यहोशू के अंत के पास यह घटना तब घटती है जब दो बड़े समूह, गिलाद और पूर्वी तट पर बसे लोग, उत्तर और दक्षिण के समूहों से अलग हो जाते हैं। वे अपनी-अपनीर्तन संरचना बनाते हैं ताकि यहोवा की एकता का प्रश्न उठे, और उन्होंने एक-दूसरे के साथ वेदी बनाकर यह आरोप लगाया कि वे यहोवा के साथ नहीं जा रहे हैं। यह शंका बहस पैदा करती है: क्या वे सुरक्षा या धार्मिकता के लिए एक समान बोध चाहते थे या यह एक छलावा था जो समान रूप से बहस-चिह्न बन गया?
interpretative observations
थीमात्मक बिंदु
Related passages (संकेत-अपेक्षा)
1) रोम 14:19 जैसे—हम एक-दूसरे के लाभ के लिए प्रयास करें ताकि प्रेम में बनें और論.Decimal प्रवेश न हो;
2) यूहन् 4:1—आत्म-परख करें कि क्या आत्म-धारणा ईश्वर की पुष्टि है, न कि केवल जनता की स्वीकृति;
3) 1 कुरिन्थियों 10:31—क्योंकि चाहे खाते हों या क्या करते हों, सब कुछ परमेश्वर की महिमा के लिए करें;
प्रायोगिक अनुप्रयोग
आज के शास्त्री इस वाक्य से सिखते हैं कि धार्मिक गतिविधियाँ तब सही मानी जाएँगी जब वे परमेश्वर की महिमा के लक्ष्य से प्रेरित हों और समुदाय की एकता को बढ़ावा दें। सामाजिक दबाव या वैचारिक दबाव के कारण गलत पूजा-क्रिया करना—या फिर पंथीय प्रतीकों को गलत संदर्भ में उपयोग करना—हमें टालना चाहिए।
एक संक्षिप्त निष्कर्ष
यहोशू 22:23 हमें याद दिलाता है कि सही धार्मिकता वेदी के स्रोत से पता चलती है—यदि हमने वेदी यहोवा के पीछे चलना छोड़ने या उसे गलत तरीके से पूजा के लिए हथियार बनाने के लिए बनायी हो, तो यहोवा इसका हिसाब लेगा। यह चेतावनी हमारे लिए है कि हम अपने उपासना के तरीकों को स्पष्ट रूप से परमेश्वर की इच्छा के अनुरूप बनाए रखें, ताकि एकता और सत्य दोनों सुरक्षित रहें।
नोट्स: आधिकारिक उद्धरण स्रोत
यदि आप चाहें, तो मध्य-भाग के अनुसार Matthew Henry, Albert Barnes या Adam Clarke के संक्षिप्त उद्धरण देखे जा सकते हैं; नीचे नैतिक संकेत-वार्ताओं के भीतर उनके विचार संक्षेप में समाहित हैं।