Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीVerse
न्यायियों 15:1 न्यायियों 15:2 न्यायियों 15:3 न्यायियों 15:4 न्यायियों 15:5 न्यायियों 15:6 न्यायियों 15:7 न्यायियों 15:8 न्यायियों 15:9 न्यायियों 15:10 न्यायियों 15:11 न्यायियों 15:12 न्यायियों 15:13 न्यायियों 15:14 न्यायियों 15:15 न्यायियों 15:16 न्यायियों 15:17 न्यायियों 15:18 न्यायियों 15:19 न्यायियों 15:20



न्यायियों 15:6 का निष्कर्ष (HINIRV)
यह पद बताता है कि परमेश्वर के विरुद्ध नहीं, बल्कि मानवीय प्रतिक्रियाओं और बदले की आग से प्रकार-भर गया है। यहाँ समांतर कथा में दामाद शिमशोन ने अपने पिता के साथ जो किया, उसका परिणाम अत्यंत कठोर और कष्टदायक रहा। सतही दृष्टि से यह एक बदला-वाद का क्रिया-प्रतिकार है, पर गहराई से यह न्याय-सीखा देता है: असत्य और हिंसा से शांति नहीं मिलती; दुष्कर्म की प्रतिक्रिया भी दुष्कर्म ही बन जाती है।
पृष्ठभूमि और संदर्भ
कहानी न्यायियों के समय की है, जब इजराइल के भीतर कानून-व्यवस्था और नेतृत्व कमजोर पड़ रहा था, और हर जाति-समुदाय अपने हथियारों और चालों से अपना अस्तित्व बचाने में लगा था। शिमशोन का विवाह पलिश्तियों के क्षेत्र के भीतर हुआ था, और उनके ससुर ने उनकी पत्नी के साथ एक असंतोषजनक घटनाक्रम के कारण उसे दूसरे पुरुष से विवाह कर दिया। यह परिवारिक तनाव और सामाजिक तनाव, दोनों ने तीखे बदला-व्यवहार को जन्म दिया।
Interpretive observations
संकेत बातें (Themes)
अन्य प्रासंगिक बाइबिल वार्ता
उद्धरण-छोटे संदर्भ: जुदास-सम्बन्धित संघर्षों में प्रतिशोध के दुष्परिणाम देखे जाते हैं, जैसे कि न्याय के लिए भीतर से प्रेरित सामाजिक-आचरण की आवश्यकता।
संदर्भ-वाक्यों के छोटे सार— न्याय की स्थापना के लिए सत्य और संयम आवश्यक होते हैं; हिंसा से नहीं।
संकेतिक निष्कर्ष
यह घटना दिखाती है कि गलत दबाव और बदला-वाद व्यक्तिगत और सामुदायिक पीड़ा बढ़ाते हैं। परमेश्वर के अनुसार न्याय की दृष्टि प्रेम, संयम और सत्य पर आधारित होनी चाहिए, ताकि शांति कायम हो सके।
व्यावहारिक निष्कर्ष
महत्त्वपूर्ण उद्धरण-आधार
आदि-प्रसंग में Matthew Henry, Albert Barnes और Adam Clarke के प्राकृतिक तर्क-आधारित टिप्पणियाँ सार्वजनिक-डोमेन से उपलब्ध हैं; इनमें से कुछ सामान्य विचार यह संकेत देते हैं कि बदला-वाद से सत्य नहीं मिल सकता और न्याय को धैर्य और धर्मी मार्ग से आना चाहिए।