Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीVerse
न्यायियों 15:1 न्यायियों 15:2 न्यायियों 15:3 न्यायियों 15:4 न्यायियों 15:5 न्यायियों 15:6 न्यायियों 15:7 न्यायियों 15:8 न्यायियों 15:9 न्यायियों 15:10 न्यायियों 15:11 न्यायियों 15:12 न्यायियों 15:13 न्यायियों 15:14 न्यायियों 15:15 न्यायियों 15:16 न्यायियों 15:17 न्यायियों 15:18 न्यायियों 15:19 न्यायियों 15:20



न्यायियों 15:18 — संदर्भ-सेटिंग और पवित्र संदेश
यह पद विभोरक स्थिति में दाऊद के एक अनुरागी भक्त के पास आता है—समय है जब सम्राट सम्हारे नहीं, और यहहू के विद्रोही प्रतीत होते हैं। खेत-खलिहानों और वन-झुकनों में घूमते हुए यहोवा के चुने हुए नेता सामरी नाई शहर से दूर, दंसन ने अपने बल से क़ायम रहने का प्रयास किया। इस अध्याय का यह अंश बताता है कि दंसन ने एक बड़ी विजय पाई, पर तुष्टि की प्यास उसे छोड़ देनी चाहती नहीं थी। तब वह यहोवा को पुकारता है और प्रकट करता है कि उसने अपनी दासता में एक बड़ा उद्धार पाया है, पर अब प्यास से घिरा मरना नहीं चाहता।
इस पाठ से परमेश्वर का संदेश और विश्वास की नज़र
कथन स्पष्ट करता है कि परमेश्वर की सहायता और उद्धार मानव के भीतर एक गहरी आत्म-विश्वास की उम्मीद जगाती है—प्यास और थकान के क्षणों में भी दासत्व से मुक्तिदाता का अनुभव संभव है। यह भी संकेत देता है कि स्पष्ट निर्भयता और प्रार्थना के समय परमेश्वर की कृपा उपलब्ध रहती है।
मुख्य शब्द और imagery
सम्बद्ध भाग और पाठ-सम्बंध
- न्यायियों 15:13-15 में दंसन का बलिदानकारी प्रतिरोध और 15:19 में यहोवा द्वारा जल की कुण्डी से उसकी प्यास बुझाने की कहानी एक ही घटना क्रम के दो आयाम हैं: संकट और परमेश्वर की सहायता।
- यूटा 1:19 में भी भक्ति के समय प्रार्थना से उद्धार की आशा दिखती है कि परमेश्वर अपने लोगों की पुकार सुनता है।
आज का जीवन-प्रयोग
हममें से प्रत्येक कठिन घड़ी में यह सीख सकता है कि—जब हम थक जाते हैं, निराश होते हैं या अपने आप को असहाय पाते हैं, तब प्रभु के साथ बोलना और उसकी कृपा के लिए पुकारना चाहिए। उद्धार कभी केवल बाहरी समाधि नहीं, बल्कि आंतरिक दृढ़ विश्वास और ईश्वर-भरोसे का अनुभव है।
संक्षिप्त समेकन
यह पाठ यह याद दिलाता है कि परीक्षा के समय भी परमेश्वर का नाम उच्च रहता है और वह हमारी पुकार सुनते हैं। भक्त के लिए प्यास और परास्ति से उबर कर नया जोश पाना संभव है, यदि वह परमेश्वर की सहायता के लिए सचेत रूप से निर्विवाद विश्वास बनाए रखे।
छोटी-सी cross-reference