उत्पत्ति 32:31 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका

पनूएल के पास से चलते-चलते सूर्य उदय हो गया, और वह जाँघ से लँगड़ाता था।

पिछला पद
« उत्पत्ति 32:30

उत्पत्ति 32:31 पद-दर-पद बाइबल टीका

यogeneous पनूएल के साथ संज्ञा: उत्पत्ति 32:31 का अर्थ

इस पद का सीधा अर्थ है कि याकूब के संघर्ष के बाद उसकी चाल में परिवर्तन आ गया। सूर्य उग आया और वह जाँघ से लँगड़ाता रहा—यह शारीरिक चोट और शरणागत सङ्कट का संकेत है, जो उसे परमेश्वर के सम्मुख सौंपे गए संघर्ष के परिणामस्वरूप मिला।

पृष्ठभूमि और संदर्भ

उत्पत्ति 32 में याकूब अपने भाइयों और परिवार के लिए भय और भाग-दौड़ के बीच आगे बढ़ता है। वह इस समय खुद को परमेश्वर की योजना के अनुसार ढालने के लिए संघर्ष कर रहा है। रात भर की भेंट के आयोजन, उसकी जोड़ी-जोड़ियाँ और विगत घटनाओं के कारण वह आंतरिक द्वंद्व से गुजर रहा है। सूर्योदय के साथ वह अपनी चोट-प्रकृति को लेकर आगे बढ़ता है, जो कि उसके आध्यात्मिक यात्रा के एक प्रतीक बन जाता है।

interpretive observations

  • शारीरिक चोट के साथ परमेश्वर के साथ मिलने की प्रतीक्षा: लँगड़ाने के बावजूद याकूब आगे बढ़ता है, जो उसकी दृढ़ता और आस्था का प्रतीक है।
  • रात्रि-घेरे का संघर्ष और नाम परिवर्तन की प्रेरणा: उत्पत्ति 32 में अगले अध्यायों में वह अपने नाम को इस्राएल में बदलवाने के लिए तैयार होता है—यह एक नई पहचान की शुरूआत है।
  • परमेश्वर के साथ असमान-सम्वाद: याकूब का दृढ़ निर्णय कि वह परमेश्वर के समीप आना चाहता है, उसकी कमजोरियों के बावजूद उस रिश्ते की गहराई को दर्शाता है।

संक्षिप्त विषय-सूची

  • कठोर परिश्रम और आस्था के साथ आगे बढ़ना
  • पहचान में परिवर्तन की दिशा
  • परमेश्वर के पवित्रन्तित के सामने स्वीकारोक्ति

अन्य तुलनात्मक उद्धरण (cross-references)

याकूब की संघर्षपूर्ण रात और परमेश्वर से मिलने के संदर्भ के साथ—

  • रोमखण्ड 8:28-30 से प्रेरित विश्वास-जीवन: ईश्वर के उद्देश्य में हर पीड़ा भी भागीदारी बन जाती है, यह परिवर्तन की दिशा देता है।
  • यशायाह 40:31 के प्रतीक: आत्मिक गति और नवीकरण के लिए नयी ऊर्जा प्राप्त होती है जब हम ईश्वर पर भरोसा रखें।

सूक्ष्म टिप्पणी—मैथ्यू हेनरी, ऐलबर्ट बार्न्स, एडम क्लार्क के शब्दों से संकेत

इन प्राचीन पवित्र-टिप्पणियों के सार से एक संगत विचार उभरता है: याकूब की लंगड़ाहट उसे न केवल शारीरिकChile दिखाती है बल्कि आंतरिक परिवर्तन के लिए एक साधन बन जाती है, ताकि वह परमेश्वर के साथ पूर्णता के लिए तैयार हो सके।

कहावतों में एक छोटा उद्धरण (संकेत): “वह जाँघ से लँगड़ाता था”—यह स्थिति बताती है कि आकाशीय आशीष कभी-कभी हमारी कमजोरियों के साथ मिलकर आता है।

संरचित निष्कर्ष और व्यावहारिक कदम

1) संघर्ष के अन्दर भी जो आशीष जुड़ा हो, उसे स्वीकार करें; 2) कमजोरियों को ईश्वर के करीब आने के अवसर मानें; 3) एक नई पहचान की ओर कदम उठाते समय, परमेश्वर के उद्देश्य के अनुरूप जीवन की संरचना करें।

*** इस टीका में सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध कुछ प्राचीन और क्लासिक स्रोतों की सामग्री शामिल है। कुछ सामग्री को कृत्रिम बुद्धिमत्ता उपकरणों की सहायता से संसाधित, संक्षिप्त या अनुवादित किया गया हो सकता है। हर व्याख्या को बाइबल के पूरे पाठ और उसके संदर्भ के साथ अवश्य जाँचें। यदि आपको कोई त्रुटि या ऐसा अनुवाद मिले जिसे सुधारने की आवश्यकता हो, तो कृपया हमसे संपर्क करें।

उत्पत्ति 32:31 समानांतर पद और संबंधित वचन

उन बाइबल पदों को देखें जो विषय, शिक्षा या संदर्भ के आधार पर इस अंश से जुड़े हैं। समानांतर पदों की तुलना करने से इस वचन के संदर्भ और संदेश को अधिक गहराई से समझने में सहायता मिलती है। किसी चित्र को चुनें और संबंधित पद, उसकी व्याख्या तथा पद-दर-पद बाइबल टीका देखें।

2 कुरिन्थियों 12:7 HINIRV संबंधित बाइबल पद का चित्र
2 कुरिन्थियों 12:7 (HINIRV) »
और इसलिए कि मैं प्रकशनों की बहुतायत से फूल न जाऊँ, मेरे शरीर में एक काँटा चुभाया गया अर्थात् शैतान का एक दूत कि मुझे घूँसे मारे ताकि मैं फूल न जाऊँ। (गला. 4:13, अय्यू. 2:6)

उत्पत्ति 19:15 HINIRV संबंधित बाइबल पद का चित्र
उत्पत्ति 19:15 (HINIRV) »
जब पौ फटने लगी, तब दूतों ने लूत से जल्दी करने को कहा और बोले, “उठ, अपनी पत्‍नी और दोनों बेटियों को जो यहाँ हैं ले जा: नहीं तो तू भी इस नगर के अधर्म में भस्म हो जाएगा।”

उत्पत्ति 32:25 HINIRV संबंधित बाइबल पद का चित्र
उत्पत्ति 32:25 (HINIRV) »
जब उसने देखा कि मैं याकूब पर प्रबल नहीं होता, तब उसकी जाँघ की नस को छुआ; और याकूब की जाँघ की नस उससे मल्लयुद्ध करते ही करते चढ़ गई।

HINIRV बाइबल की पुस्तक चुनें