Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीVerse
न्यायियों 6:1 न्यायियों 6:2 न्यायियों 6:3 न्यायियों 6:4 न्यायियों 6:5 न्यायियों 6:6 न्यायियों 6:7 न्यायियों 6:8 न्यायियों 6:9 न्यायियों 6:10 न्यायियों 6:11 न्यायियों 6:12 न्यायियों 6:13 न्यायियों 6:14 न्यायियों 6:15 न्यायियों 6:16 न्यायियों 6:17 न्यायियों 6:18 न्यायियों 6:19 न्यायियों 6:20 न्यायियों 6:21 न्यायियों 6:22 न्यायियों 6:23 न्यायियों 6:24 न्यायियों 6:25 न्यायियों 6:26 न्यायियों 6:27 न्यायियों 6:28 न्यायियों 6:29 न्यायियों 6:30 न्यायियों 6:31 न्यायियों 6:32 न्यायियों 6:33 न्यायियों 6:34 न्यायियों 6:35 न्यायियों 6:36 न्यायियों 6:37 न्यायियों 6:38 न्यायियों 6:39 न्यायियों 6:40



न्यायियों 6:23 पर टिप्पणी — शांति और परम भरोसा
यह दृश्य साक्षात् उस समय का है जब गिदोन स्वयं भयावह संघर्षों के बीच ईश्वर की उपस्थिति और कृपा को अनुभव करता है। यह वचन कहता है: “यहोवा ने उससे कहा, ‘तुझे शान्ति मिले; मत डर, तू न मरेगा।’” यहाँ परमेश्वर की दयालुता, भय पर विजय तथा भूमिका-निर्णय में एक विश्वसनीय आश्वासन स्पष्ट होता है।
यह अध्याय और इस verse का स्थान
न्यायियों की किताब की कथा में मध्य युग के गिरते-उठते राज्यों में इजरायल के लोग विपत्तियों के बीच ईश्वर की सहायता माँगते हैं। गिदोन पहले भयभीत है, अपने आप को कमज़ोर समझता है; परन्तु ईश्वर उसकी कायरता के बावजूद उसे बुलाते हैं। इस वचन में ईश्वर की शांति और सुरक्षा का स्वाद मिलता है, जो भय के समय में आत्म-विश्वास का स्रोत बनती है।
मुख्य आध्यात्मिक पाठ
1) परमेश्वर भय के समय में भी निकट रहता है और विश्वासी सेवक को ढाल देता है।
2) शांति होने से मरे हुए मन की धारणाएं टूटती हैं और नया साहस आता है।
3) भय के बावजूद, ईश्वर के वचन से आश्वासन लेकर व्यक्ति अपने दायित्वों को पूरा कर सकता है।
अन्य बाइबल पाठों से तुलनात्मक विचार
• एकाधिक अवसरों पर परमेश्वर सीधे संकटकर्ता को शांति और सुरक्षा का आश्वासन देते हैं (यशायाह 41:10; यम 27:3-4). इन स्लागों में भी भय के बीच शांति का संदेश एक ही आधार पर टिकता है: मैं तुम्हारे साथ हूँ, तुम डरते नहीं।
• स्तोत्र 23 में चरवाहे की सुरक्षा का चित्रण भी उसी सिद्धांत को स्पष्ट करता है—भय के समय भी परमेश्वर की समृद्ध चाकचौबन्द कृपा आपके साथ है।
व्यावहारिक अनुपालक विचार
संघर्ष से शांति का निष्कर्ष
यह verse यह संकेत देता है कि भय के समय भी ईश्वर की आवाज़ सबसे बड़ी सुरक्षा है। “मत डर, तू न मरेगा” एक खुला आह्वान है—तुम्हारे सामने जितनी भी चुनौतियाँ हों, परमेश्वर की कृपा उनसे अधिक है। यह जीवन के हर मोड़ पर विश्वास के लिए प्रेरणा है।
संक्षेप
न्यायियों 6:23 में ईश्वर की शांति और सुरक्षा का संदेश सरल, पर गहरा है: भय के बावजूद तुम सुरक्षित हो क्योंकि मैं तुम्हारे साथ हूँ। यह वचन गिदोन के लिए नया प्रणाल स्थापित करता है और पाठकों को भी विश्वास की राह में ढाल प्रदान करता है।
प्रीति-रूपरेखा उद्धरण (कथन-संदर्भ)
यदि आप चाहें तो Matthew Henry, Albert Barnes या Adam Clarke के लक्ष्यों से मिलने वाले संकेतों को संक्षेप में उद्धृत किया जा सकता है; नीचे दिए गए मूल पाठ-उद्धरण आवश्यक जगहों पर ही शामिल हैं:
यहाँ उपलब्ध सार्वजनिक-डोमेन टिप्पणीकारों के विचारों के समेकन से हीरो का भाग ऊँचा उठता है—परन्तु मैं यहाँ स्पष्ट उद्धरणों को सीधे उद्धृत नहीं कर रहा हूँ ताकि पाठ संकरी और सुसंगत रहे। जिन ठोस विचारों का उल्लेख ऊपर किया गया है, वे इस प्रकार से अभिव्यक्त होते हैं: परमेश्वर भय के समय में भी अपने सेवक के साथ है; शांति और साहस एक साथ जन्म लेते हैं; और निष्कर्षतः, दैवीय आदेशों का पालन भय को परास्त करने की कुंजी है।