न्यायियों 6:6 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका

और मिद्यानियों के कारण इस्राएली बड़ी दुर्दशा में पड़ गए; तब इस्राएलियों ने यहोवा की दुहाई दी।

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न्यायियों 6:6 पद-दर-पद बाइबल टीका

न्यायियों 6:6 का संदर्भ और धारणा

पद इस्राएलियों की दयनीय दशा का चित्र प्रस्तुत करता है जब मिद्यानियाँ उनके देश में भारी उत्पीड़न कर रहे थे। कृषिऋतु में फसलें लूट ली जातीं, भूखे रहने की आशंका रहती और सुरक्षा का कोई आधार नहीं बचता था। इस कठिन समय में इस्रायली लोग घुटनों के बल आकर या तो ग़ायब रहने की चेष्टा करते थे या भगवान से सहायता मांगने के लिए दुहाई देते थे। यह बहुपरिचालित विषय है कि किस प्रकार पाप और अविश्वास के कारण परमेश्वर की सेवकाई में दुविधा और निराशा का वातावरण बनता है, और कैसे दया-भरी पुकार उसे फिर से सक्रिय करती है।

मुख्य अर्थ

यह पद स्पष्ट करता है कि संकट के समय इस्राएली ने परमेश्वर पर ध्यान लौटाया और उसकी सहायता की मांग की। दुर्दशा के फलस्वरूप उनकी धार्मिक-आत्मीय स्थिरता ढीली हो जाती है, पर विपदा ही उन्हें वास्तविक दुआ के मार्ग में ला देती है। यह पाठ प्रारब्ध की बजाय करवट लेने वाले आचरण का स्मारक है: जब मानव परिस्थितियाँ अत्यंत कठोर होती हैं, तब ईश्वर की करुणा अधिक प्रकट होती है।

मुख्य विषय

  • निर्भरता बनाम स्व-निर्भरता: विपत्ति के समय लोग अक्सर अपने बल पर समाधान ढूंढ़ते हैं, परन्तु वास्तविक सहायता परमेश्वर से आती है।

संबद्ध अंश और गाढ़े विचार

इस अध्याय में मिद्यानियों के अत्याचार से इस्राएल की स्थिति अत्यंत शोचनीय हो जाती है, और तब यह एक तरह की आत्म-चेतना का उद्धारक बनती है—दोहरे मार्ग की ओर नहीं, बल्कि ईश्वर की सहायता की ओर लौटना। मॉडर्न व्याख्याओं में भी यह बात बार-बार उभरती है कि संकट के समय ही धर्मसूत्रों को सजीवता मिलती है, और तपस्या के बाद ही आशीष मिलती है।

कई उल्लेख्य विचारों के स्रोत

हेनरी, बार्न्स और क्लार्क के पुराने पीर-ग्रंथों में यह धारणात्मक धागा मिलता है कि संकट में पुकार भगवान के साथ पुनः संबंध स्थापित करने का साधन बनता है। उनके विचारों से यह स्पष्ट होता है कि: - कठिन समय में परमेश्वर की कृपा अधिक स्पष्ट होती है। - दया के अनुरोध से muž्यों के मन में आस्था जाग्रत होती है। - दुष्ट परिस्थितियाँ-उद्धार के लिए एक अवसर बना देती हैं।

व्यावहारिक विचार

हम भी अपनी ज़िन्दगियों में जब असफलताओं या कठिनाइयों का सामना करते हैं, तो मिद्यानियों के अंधेरे से सीख लें: गहराई से पुकारना, आत्म-परख और परमेश्वर के वादों पर भरोसा रखना। संकट की घड़ी में भी ईश्वर के नाम की महिमा को सर्वोपरि रखना चाहिए, ताकि राहत सुरक्षात्मक कदमों के साथ आए।

क्रॉस-रेफरेंसेस और उनका संक्षिप्त संबंध

1) ज्यूह 4:7-8 — नम्रता से ईश्वर की ओर लौटना और उससे कारण प्राप्त करना सिद्धांत रूप में समान है; यह पाठ भी दया के लिए पुकार को प्राथमिकी देता है।

2) राजा-व्यवस्था 8:57-58 — यहूदियों की पुकार के समय परमेश्वर के भरोसे और संकल्प की पुनः स्थापना दिखाता है।

3) रोम 8:28 — कठिन परिस्थितियाँ भी परमेश्वर की योजना में अवसर बन कर आते हैं; परमेश्वर के उद्देश्यों के साथ हमारी स्थिति जुड़ती है।

संक्षिप्त निष्कर्ष

न्यायियों 6:6 हमें सिखाता है कि विपत्ति के समय भी ईश्वर के प्रति सच्ची पुकार और आत्म-चिन्तन से उद्धार संभव है। धार्मिक अविश्वास के बाद भी करुणामय परमेश्वर पुनः आशीर्वाद और प्रेरणा का स्रोत बनते हैं। यह पाठ हमारे लिए एक स्मरण-धन है कि अगर हम भलाई की तरफ पलटें और प्रभु से सहायता माँगें, तो वह जल्द ही अपनी करुणा से हमारे बीच आएंगे।

*** इस टीका में सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध कुछ प्राचीन और क्लासिक स्रोतों की सामग्री शामिल है। कुछ सामग्री को कृत्रिम बुद्धिमत्ता उपकरणों की सहायता से संसाधित, संक्षिप्त या अनुवादित किया गया हो सकता है। हर व्याख्या को बाइबल के पूरे पाठ और उसके संदर्भ के साथ अवश्य जाँचें। यदि आपको कोई त्रुटि या ऐसा अनुवाद मिले जिसे सुधारने की आवश्यकता हो, तो कृपया हमसे संपर्क करें।

न्यायियों 6:6 समानांतर पद और संबंधित वचन

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न्यायियों 3:9 HINIRV संबंधित बाइबल पद का चित्र
न्यायियों 3:9 (HINIRV) »
तब इस्राएलियों ने यहोवा की दुहाई दी, और उसने इस्राएलियों के छुटकारे के लिये कालेब के छोटे भाई ओत्नीएल नामक कनजी के पुत्र को ठहराया, और उसने उनको छुड़ाया।

न्यायियों 3:15 HINIRV संबंधित बाइबल पद का चित्र
न्यायियों 3:15 (HINIRV) »
फिर इस्राएलियों ने यहोवा की दुहाई दी, और उसने गेरा के पुत्र एहूद नामक एक बिन्यामीनी को उनका छुड़ानेवाला ठहराया; वह बयंहत्था था। इस्राएलियों ने उसी के हाथ से मोआब के राजा एग्लोन के पास कुछ भेंट भेजी। (भज. 78:34)

भजन संहिता 50:15 HINIRV संबंधित बाइबल पद का चित्र
भजन संहिता 50:15 (HINIRV) »
और संकट के दिन मुझे पुकार; मैं तुझे छुड़ाऊँगा, और तू मेरी महिमा करने पाएगा।”

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