भजन संहिता 50:15 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका

और संकट के दिन मुझे पुकार; मैं तुझे छुड़ाऊँगा, और तू मेरी महिमा करने पाएगा।”

भजन संहिता 50:15 पद-दर-पद बाइबल टीका

सीधा अर्थ

यह वचन परमेश्वर का आमंत्रण है: संकट में मुझसे सहायता माँगो और मैं तुम्हें छुड़ाऊँगा, ताकि तुम उत्तम अनुभवों के कारण मेरी महिमा कर सको। सरलतः कहा गया है कि परमेश्वर मुसीबत में सहायता करते हैं और मुक्ति का उद्देश्य भक्ति और प्रशंसा को जन्म देना है।

प्रसंग एवं पृष्ठभूमि

भजन 50 में ईश्वर न सिर्फ़ न्यायी शासक के रूप में प्रस्तुत हैं, बल्कि उन कर्तव्यों और प्रतीक्षाओं का उद्घोष भी करते हैं जो वह अपने लोगों से रखते हैं। पूरे अध्याय में बलिदान, धन्यवाद और निष्ठा की वास्तविकता पर बल है: बाहरी अनुष्ठान जब अंदरूनी वचन के बिना हों तो परमेश्वर उन्हें स्वीकार नहीं करता। आयत 15 उस बड़े संदेश का व्यक्तिगत और प्रार्थनात्मक पक्ष प्रस्तुत करती है—ईश्वर संकट में पुकारे जाने पर उत्तर देने वाले हैं, परंतु इसका परिणाम यह भी है कि उद्धार परमेश्वर की महिमा को प्रकट करे।

व्याख्यात्मक बिंदु

1) "संकट के दिन" — यह किसी भी प्रकार की विपत्ति हो सकती है: भय, परीक्षा, अपराध का बोझ या शत्रुओं का आक्रमण। यह शब्द व्यक्ति की निर्भरता को दर्शाता है।

2) "मुझे पुकार" — यहाँ पुकार का तात्पर्य न केवल भाषाई प्रार्थना से है बल्कि विश्वास और आत्म-समर्पण का संकेत भी है।

3) "मैं तुझे छुड़ाऊँगा" — उद्धार का आश्वासन सीधे और निश्चित है; परमेश्वर की मुक्ति सक्रिय और प्रभावशाली है।

4) "तू मेरी महिमा करने पाएगा" — उद्धार का नैतिक और अलौकिक लक्ष्य: मुक्त किये गए का प्रभु की महिमा करना, लोगों के सामने परमेश्वर की महानता का गुणगान करना। मुक्ति को केवल निजी लाभ न मान कर, जनता में परमेश्वर के नाम की प्रशंसा हेतु उपयोग करने की प्रेरणा दी गई है।

छोटी थीम सूची

  • प्रार्थना: संकट में मुसीबत सुनवाई का मार्ग है।
  • उद्धार का उद्देश्य: परमेश्वर का जय-गान और धन्यवाद।
  • आस्था और आचरण जुड़े हैं: सच्ची पुकार विश्वास और परिवर्तन लाती है।

संबंधित पद और संक्षेप व्याख्या

कुंजियाँ जो इस आयत से संबंधित हैं:

- यशायाह 49:13 — यह जीवन का आमंत्रण और परमेश्वर के उद्धार के कारण परमेश्वर का महिमामंडन करने का विचार प्रतिध्वनित होता है।

- रोमियों 10:13 — "जो कोई प्रभु के नाम का आह्वान करेगा वह उद्धार पाएगा"—यह न्यू टेस्टामेंट में उसी सच्चाई की पुष्टि करता है कि पुकार उद्धार का मार्ग है।

- भजन 34:17 — "धरती पर दीनों की पुकार सुनकर—I..." यह और पद संकट से उद्धार के अनुभव को जोड़ते हैं और यह दिखाते हैं कि उद्धार का उद्देश्य धन्यवाद और प्रशंसा है।

माथ्यू हेनरी, एल्बर्ट बार्न्स, और ऐडम क्लार्क से संक्षिप्त उद्धरण

मास्टर टिप्पणीकारों में मिलती-जुलती समझ यह है कि यह वचन संकट में परमेश्वर की तत्परता और उद्धार का उद्देश्य दोनों पर जोर देता है। (सटीक उद्धरणों का प्रयोग यहाँ आवश्यकतानुसार छोटा और संदर्भगत हो सकता है।)

व्यावहारिक ग्रहणीयता

यह वचन हमें सिखाता है कि दुख-दर्द में परमेश्वर की ओर हाथ बढ़ाना पारंपरिक धार्मिक क्रियाओं से ऊपर है; उसे सचमुच पुकारना चाहिए। जब हम ईमानदारी से पुकारते हैं और उद्धार पाते हैं, तो हमारा नतीजा व्यक्तिगत मुक्ति ही नहीं होता—हमें परमेश्वर की महिमा गुनगुनानी चाहिए। इसीलिए संकट के अनुभवों को केवल प्रतिक्रियावादी न समझें, बल्कि उन्हें परमेश्वर के नाम का प्रचार करने और दूसरों को आशा देने का माध्यम बनाइए।

समेकित टिप्पणी

भजन 50:15 का दायरा साधारण पर गहरा है: बंदे की पुकार के प्रति ईश्वर की तत्परता और उद्धार के पीछे निहित उद्देश्य—परमेश्वर की महिमा—दोनों स्पष्ट हैं। यह वचन प्रार्थना को केवल आवश्यकता की हल निकासी न मानकर उसे धन्यवाद और गवाही के रास्ते से जोड़ता है। संकट में पुकारिए; पर उस मुक्ति को अपने जीवन में दृष्टांत बनाइए ताकि परमेश्वर की महिमा सबमें प्रकट हो।

*** इस टीका में सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध कुछ प्राचीन और क्लासिक स्रोतों की सामग्री शामिल है। कुछ सामग्री को कृत्रिम बुद्धिमत्ता उपकरणों की सहायता से संसाधित, संक्षिप्त या अनुवादित किया गया हो सकता है। हर व्याख्या को बाइबल के पूरे पाठ और उसके संदर्भ के साथ अवश्य जाँचें। यदि आपको कोई त्रुटि या ऐसा अनुवाद मिले जिसे सुधारने की आवश्यकता हो, तो कृपया हमसे संपर्क करें।

भजन संहिता 50:15 समानांतर पद और संबंधित वचन

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