Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीVerse
न्यायियों 6:1 न्यायियों 6:2 न्यायियों 6:3 न्यायियों 6:4 न्यायियों 6:5 न्यायियों 6:6 न्यायियों 6:7 न्यायियों 6:8 न्यायियों 6:9 न्यायियों 6:10 न्यायियों 6:11 न्यायियों 6:12 न्यायियों 6:13 न्यायियों 6:14 न्यायियों 6:15 न्यायियों 6:16 न्यायियों 6:17 न्यायियों 6:18 न्यायियों 6:19 न्यायियों 6:20 न्यायियों 6:21 न्यायियों 6:22 न्यायियों 6:23 न्यायियों 6:24 न्यायियों 6:25 न्यायियों 6:26 न्यायियों 6:27 न्यायियों 6:28 न्यायियों 6:29 न्यायियों 6:30 न्यायियों 6:31 न्यायियों 6:32 न्यायियों 6:33 न्यायियों 6:34 न्यायियों 6:35 न्यायियों 6:36 न्यायियों 6:37 न्यायियों 6:38 न्यायियों 6:39 न्यायियों 6:40



Reader-friendly overview
न्यायियों 6:36 में गिदोन परमेश्वर के साथ अपनी भरोसे की जाँच कर रहे हैं। यह अध्याय गिदोन के चयन और उनके भीतर की शंका-विश्वास की द्वंद्व पर केंद्रित है। verse 36 सीधे तात्कालिक स्थिति में गिदोन की प्रार्थना और परमेश्वर की अनुमति माँगने की आवश्यकता को दर्शाता है, ताकि वह यह सुनिश्चित कर सके कि उनकी कठिनाई के समय ईश्वर उसी मार्ग से आगे बढ़ रहे हैं जो उसकी योजना का भाग है।
Verse in its chapter: संदर्भित पंक्तियाँ
ल्युओं के साथ चलती कहानी में गायों के बंधनों और मिडियनियों के उत्पीड़न से उभरी आशंका के बीच गिदोन एक स्पष्ट चिह्न चाहता है कि परमेश्वर ही सच्चे उद्धारकर्ता हैं। 36 वें पद में वह परमेश्वर से एक निशानी माँगते हैं—“यदि तू अपने वचन के अनुसार इस्राएल को मेरे द्वारा छुड़ाएगा”—यह आस्था और प्रमाण का मेल है।
Main spiritual lesson (मुख्य आध्यात्मिक पाठ)
विश्वास की ठोस कसौटी: परमेश्वर के वचन पर सामान्य नहीं, ठोस परीक्षण चाहिए। गिदोन यह देखने की कोशिश करते हैं कि क्या परमेश्वर सचमुच उनकी परीक्षा में साथ है। आत्म-विश्वास और परमेश्वर के वचन के अनुरूप कार्य करने की इच्छा एक समान धागे में बंधी है। जब हमारा कदम परमेश्वर के वचन के अनुसार उठता है, तब ही उद्धार संभव बनता है।
Cross-references (संयुक्त रूप से संदर्भित) और उनके अर्थ
संयुक्त समझ: यह संदेश कहते हैं कि परमेश्वर के वचन के अनुरूप निर्णय लेने से ही हमारे भीतर के भय और असमंजस को पार किया जा सकता है, और वह हमें उद्धार तक ले जाता है।
Application (व्यावहारिक प्रयोग)
Unified summary (एकीकृत सार)
न्यायियों 6:36 यह संकेत देता है कि परमेश्वर के वचन के अनुरूप मर्यादा और परीक्षण से गुजरना पड़ सकता है। गिदोन एक साधारण प्रश्न के साथ नहीं दिखते, बल्कि अपने उद्धार के लिए परमेश्वर की पुष्टि चाहते हैं। इससे स्पष्ट होता है कि आस्था में सतह पर भावनाएँ नहीं, बल्कि परमेश्वर की पुष्टि और निर्देशों का पूर्ण पालन चाहिए। विभिन्न पुरातन टिप्पणीकारों के विचार मिलकर यह बताते हैं कि विश्वास सिर्फ धारणा नहीं, बल्कि कदमों में प्रकट होने वाला विश्वास है—जो ईश्वर के वचन के साथ चलने के लिए प्रेरित करता है। (नोट: नीचे दिया गया कोई भी उद्धरण केवल संदर्भ हेतु है और पूर्ण पाठ नहीं है।)
कुल मिलाकर, इस verse में एक जागरूक आस्था का चित्र उभरता है—परमेश्वर के वचन पर ध्यान दें, और उसी के अनुसार आगे बढ़ें।
Pastors’ note: टिप्पणीकारों के संकेत
मैथ्यू हेनरी, अॅल्बर्ट बार्न्स और अडम क्लार्क के सार्वजनिक-डोमेन विचारों से प्रेरित, इस पाठ में यह समझना संभव है कि परमेश्वर के वचन के साथ न्याय करने वाले कदम ही उद्धार का मार्ग बनते हैं।