Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीVerse
न्यायियों 8:1 न्यायियों 8:2 न्यायियों 8:3 न्यायियों 8:4 न्यायियों 8:5 न्यायियों 8:6 न्यायियों 8:7 न्यायियों 8:8 न्यायियों 8:9 न्यायियों 8:10 न्यायियों 8:11 न्यायियों 8:12 न्यायियों 8:13 न्यायियों 8:14 न्यायियों 8:15 न्यायियों 8:16 न्यायियों 8:17 न्यायियों 8:18 न्यायियों 8:19 न्यायियों 8:20 न्यायियों 8:21 न्यायियों 8:22 न्यायियों 8:23 न्यायियों 8:24 न्यायियों 8:25 न्यायियों 8:26 न्यायियों 8:27 न्यायियों 8:28 न्यायियों 8:29 न्यायियों 8:30 न्यायियों 8:31 न्यायियों 8:32 न्यायियों 8:33 न्यायियों 8:34 न्यायियों 8:35
न्यायियों 8:25 का प्रमुख बिंदु
इस पद में साहसी योद्धाओं की उन्नति और उनकी छोटी-सी जीत के बाद जो निजी लाभ उठाने की प्रवृत्ति उभरती है, वह इस कहानी की नैतिक चेतावनी बन जाती है। जब लोग विजय का सम्मान स्वयं के लिए चाहते हैं, तब यह उन पर भ्रष्टाचार की प्रवृत्ति के पंख खोल देता है। यह वाक्य उसी समय के ठोस व्यवहारिक परिणाम को दर्शाता है: लूट के रूप में पड़ी बस्तुओं को स्वीकार करके मनुष्यों ने अपनी शक्ति और अधिकार को अपने घमण्ड में बदल लिया।
साहित्यिक संदर्भ (लिटरेरी_CONTEXT)
यह अध्याय स्पष्टतः जस्तो के युद्ध-यात्रा के समापन के साथ जुड़ा है, जहां Gideon के छोटे समूह के हाथों बड़ी विजय मिलती है, परंतु उसके बाद के दृश्य में खूद-स्वार्थ और प्रतिष्ठा का सत्यानाशी प्रभाव दिखता है। कहानी के संरचना में यह कदम यह संकेत करता है कि जीत के साथ न्याय और नीति के कसौट भी लेना पड़ता है।
धर्मार्थ महत्व (थियोलॉजिकल significance)
यह वाक्य मानवीय स्वार्थ और विश्वास के बीच की रेखा को उजागर करता है। एक ओर परमेश्वर ने सुरक्षा दी है, दूसरी ओर लोगों की फिज़ूल-ख़र्ची और सम्मान-प्राप्ति की इच्छा उसे मोड़ देती है। न्यायियों के कथा में यह चेतावनी है कि सफलता कभी-कभी आत्म-गौरव को पोषित कर देती है, जो अंततः परमेश्वर के कार्य में अवरोध बन सकता है।
अन्यचरित्र-आत्म-संवाद (Cross-references)
आत्म-चिंतन के लिए प्रश्न (Reflection)
संक्षेप निष्कर्ष
न्यायियों 8:25 बताता है कि विजय चाहे कितनी भी बड़ी क्यों न हो, उसे शुद्धता, नम्रता और परमेश्वर के उद्देश्य के अनुरूप प्रयोग करना आवश्यक है। यह पाठ हमारे लिए सचेत करता है कि सफलता का सही उपयोग ही चरित्र की सच्ची परख है।
पवित्र-ग्रंथ के सन्निकटन संदर्भ (Quotes from classic commentators)
यहाँ तीन प्रमुख विचार रखे जाते हैं:
इन कतिपय विचारों से यह निष्कर्ष निकलता है कि सही उपयोग और आत्म-नियंत्रण परमेश्वर के साथ जीवन की स्थिरता बनाते हैं।