Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीVerse
न्यायियों 8:1 न्यायियों 8:2 न्यायियों 8:3 न्यायियों 8:4 न्यायियों 8:5 न्यायियों 8:6 न्यायियों 8:7 न्यायियों 8:8 न्यायियों 8:9 न्यायियों 8:10 न्यायियों 8:11 न्यायियों 8:12 न्यायियों 8:13 न्यायियों 8:14 न्यायियों 8:15 न्यायियों 8:16 न्यायियों 8:17 न्यायियों 8:18 न्यायियों 8:19 न्यायियों 8:20 न्यायियों 8:21 न्यायियों 8:22 न्यायियों 8:23 न्यायियों 8:24 न्यायियों 8:25 न्यायियों 8:26 न्यायियों 8:27 न्यायियों 8:28 न्यायियों 8:29 न्यायियों 8:30 न्यायियों 8:31 न्यायियों 8:32 न्यायियों 8:33 न्यायियों 8:34 न्यायियों 8:35



न्यायियों 8:6 का अर्थ संक्षेप में
यह पद कहता है कि वीरों की मांग के सामने सुक्कोत के हाकिमों ने जवाब दिया कि क्या जेबह और सल्मुन्ना हमारे हाथ में पड़ चुके हैं कि हम तेरी सेना को रोटी दें? सरल शब्दों में, विरोधी शक्तियों के सामने राजा-संन्यास के दायरे में रहने वाले लोगों की नाकामी और डर स्पष्ट होती है; वे अपनी शक्ति और संसाधनों के अभाव में आत्म-संयम खो रहे हैं और सहायता के बदले न्यायी वर्ष के लिए भीख मांगते हैं।
पृष्ठभूमि और संदर्भ
नीतियों के युग में गिदोन की लड़ाई के समय न्यायियों की किताब में यह घटना घटती है। यह अंश गिदोन की सेना के अग्रिम संघर्ष के बाद का है जब इजराइल के कुछ हिस्से मिस्र और अन्य शत्रुओं के दबाव में थे। सुक्कोत के हाकिम, जो सहायक योद्धा थे, अपने संकट का उल्लेख करते हैं—उनके शब्द संघर्ष और पराजय की स्थिति को दर्शाते हैं, जिसमें भोजन की अनुमति भी एक समस्या बन जाती है।
व्याख्यात्मक अवलोकन
संदर्भित विचार (कथा-व्याख्या से जुड़ी छोटी पंक्तियाँ)
Matthew Henry, Albert Barnes और Adam Clarke के पूर्व-प्रकाशनों से समेकित भावना यह है कि युद्ध के समय सहायता मांगना और शर्तों पर आना-जाना मानवीय वास्तविकताओं का हिस्सा है; परंतु परमेश्वर की रणनीति में कभी-कभी हमारे लिये अपेक्षित सहायता असुरक्षित सौदे बन जाती है।
2-3 पूरक क्रॉस-रेफरेंसी और उनके संक्षिप्त अर्थ
- संदर्भ: न्यायियों 7 के तीनों भागों में गिदोन की विजय से पहले कमजोरों की सहायता और ईश्वर की योजना पर ध्यान दिया गया है; यह स्पष्ट करता है कि कैसे कमी और भय पर विजय, परमेश्वर के कार्य को तेज करता है।
- संदर्भ: वहाबी उपदेशों में जैसे रोम 8:28 कहता है कि जो लोग परमेश्वर को प्रेम करते हैं, उनके लिए सभी घटनाएं मिलकर भलाई के लिए काम करती हैं; यहाँ भी अवसर पर निर्भरता और भरोसा आवश्यक है।
- संदर्भ: का-का, यहूदी संस्कृति में भोजन की भूमिका—रोटी और जल सहायता के रूप में एक प्रकार की पुनर्स्थापना का संकेत देती है; यह दिखाता है कि साझेदारी और देनी-लेनी किस प्रकार समाज को जोड़ती है।
व्यावहारिक निष्कर्ष
परमेश्वर के लोगों को कठिन समय में भी उम्मीद बनाए रखनी चाहिए। संकट के समय छोटे-छोटे सहयोग भी बड़ी रक्षा बन जाते हैं, परन्तु हमारी निर्भरता केवल मानव मदद पर न हो, बल्कि प्रभु की प्रेरणा और योजना पर हो। आवश्यकताओं के समय विवेक और सत्यनिष्ठा बनाए रखना चाहिए ताकि हम सही निर्णय ले सकें और परमेश्वर के मार्ग में आगे बढ़ सकें।
मुख्य उद्धरण-धारित विचार
“हम तेरी सेना को रोटी दें?”—यह प्रश्न वही है जो अपनी सीमा-जानकारी को स्पष्ट करता है: हाकिमों की प्रतिक्रिया से यह स्पष्ट होता है कि सामाजिक-राजनीतिक दबाव और संसाधनों की कमी मिलकर निर्णयों को प्रभावित करते हैं।