Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीVerse
न्यायियों 8:1 न्यायियों 8:2 न्यायियों 8:3 न्यायियों 8:4 न्यायियों 8:5 न्यायियों 8:6 न्यायियों 8:7 न्यायियों 8:8 न्यायियों 8:9 न्यायियों 8:10 न्यायियों 8:11 न्यायियों 8:12 न्यायियों 8:13 न्यायियों 8:14 न्यायियों 8:15 न्यायियों 8:16 न्यायियों 8:17 न्यायियों 8:18 न्यायियों 8:19 न्यायियों 8:20 न्यायियों 8:21 न्यायियों 8:22 न्यायियों 8:23 न्यायियों 8:24 न्यायियों 8:25 न्यायियों 8:26 न्यायियों 8:27 न्यायियों 8:28 न्यायियों 8:29 न्यायियों 8:30 न्यायियों 8:31 न्यायियों 8:32 न्यायियों 8:33 न्यायियों 8:34 न्यायियों 8:35



न्यायियों 8:28 पर टिप्पणी— संदर्भ और केंद्रीय विचार
इस पद में मिद्यानियों के विरुद्ध दक्षिणी इजराइल के शांति-स्थापना की बात है। गिदोन के नेतृत्व के द्वारा इज़राइल के सेनिक विफलताओं के बीच, दाविद की तरह नहीं, बल्कि परमेश्वर की सहायता से उनका शत्रु पराजित हुआ। यह वाकया न्यायियों के किताब के समापन की दिशा में जाता है, जहाँ इज़राइल फिर से आसन्न खतरे से उबरकर स्थिरता की ओर अग्रसर होता है। इस पंक्ति में कहा गया है कि मिद्यान ने इज़राइल से दबाव घटा लिया और सिर न उठाया, तथा गिदोन के जीवन-काल में चालीस वर्ष देश चैन से रहा।
मुख्य अर्थ
यह वचन युद्ध के बाद की शांति और सुरक्षा का चित्र देता है। मिद्यान के दमन के कारण इज़राइल को समय-समय पर होने वाले आक्रमणों से राहत मिली, और उन हमलों के कारण जो उनके भरोसे को हिला देते थे, विराम आ गया। गिदोन के शासन के पूरे काल में यह स्थिरता बनी रही, जो एक तरह से इस्राएल के परमेश्वर के प्रति आस्थावान रहने का प्रमाण है।
दो-तीन प्रमुख विषय
अन्य प्रासंगिक अंश (क्रॉस-रेफरेंसेस)
- न्यायियों 7:22: जलती हुई मशाल के समान जो डर के बजाय धैर्य और साहस से सामना करती है, उसका स्मरण इस वाक्य से जुड़ता है कि परमेश्वर अपने लोगों के साथ है।
- व्यवस्थापक 12:7: पुराने धर्मसंहिता के इतिहास में किन्तु यही पुनर्वास और सुरक्षा का विश्वास है, जो समय-समय पर दिखता है।
- 2 इतिहास 14:11-12: एक और उदाहरण कि परमेश्वर की सहायता से छोटे क्षत्रों के लोग बड़े खतरे को कैसे हराते हैं।
इन संदर्भों से स्पष्ट होता है कि शांति और सुरक्षा प्रभु के संरक्षण पर निर्भर है, और मानवीय प्रयास तब सार्थक होते हैं जब परमेश्वर की योजना उनके साथ जुड़ी हो।
व्यावहारिक विचार
हम आज भी संकेत देख सकते हैं कि वास्तविक शांति तब तक स्थिर नहीं होती जब तक हम परमेश्वर के मार्गों पर अडिग रहते हैं। जीवन के छोटे-छोटे संघर्षों में भी परमेश्वर की सहायता की अभिलाषा बनाए रखें; तब ही स्थिरता और सुरक्षा आती है। आत्म-स्वच्छंदता के बजाय विश्वास और आज्ञा-पालन से ही समाज में शांति संभव है।
संक्षिप्त निष्कर्ष
न्यायियों 8:28 यह स्मरण कराता है कि जब इज़राइल ने परमेश्वर की सहायता को महसूस किया और उसकी आज्ञाओं पर चलना चुना, तब मिद्यान के दबाव घटे और देश चालीस वर्ष के लिए चैन से रहा। यह वचन विश्वास, सामंजस्य, और परमेश्वर-प्रेम की एक स्थिर तस्वीर प्रस्तुत करता है—जो वर्तमान पाठकों के लिए भी प्रेरणा देता है कि हमारे संघर्षों में भी परमेश्वर की सहायता प्रतीक्षित और आवश्यक है।
QUOTED INSIGHTS: Matthew Henry, Albert Barnes, Adam Clarke के स्रोतों से संक्षिप्त, उपयोगी संदर्भ-उद्धरण अगर उपलब्ध हों तब नीचे दिया जाएगा।