Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीVerse
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न्यायियों 8:35 का संदर्भ और पाठ-संदर्भ
पंक्तिबद्ध संदर्भ: न्यायियों 8:35 — “और न उन्होंने यरूब्बाल अर्थात् गिदोन की उस सारी भलाई के अनुसार जो उसने इस्राएलियों के साथ की थी उसके घराने को प्रीति दिखाई।”
Immediate setting
यह पद गिदोन के नेतृत्व के बाद के समय का आख्यान है, जिसमें इजराएली अपने शत्रुओं से मुक्ति पाकर भी याद रखते हैं कि उनकी भलाई केवल परमेश्वर के सामर्थ्य से ही संभव थी। गिदोन के घराने के प्रति “प्रीति” का अभाव यहाँ दिखाई देता है—यानी श्रद्धा और कृतज्ञता का कमीपन, जो कभी-कभी एक नए सत्ता-संक्रमण के बाद लोक-प्रेम में ढीला पड़ सकता है।
What the text reveals about God or faith
यह वाक्य परमेश्वर की कृपात्मकता की निरन्तर स्मरणशीलता और न्यायी प्रेम की पुष्टि करता है कि वह अपने चेलों की बैठकों, सफलताओं और असफलताओं पर नजर रखता है। चाहे नेतृत्व परिवर्तन बाद में भक्ति में कमी क्यों न दिखे, परमेश्वर के कार्यकाल और भलाई की स्मारकीय स्मृति बना रहती है। इससे यह निष्कर्ष निकलता है कि faithfulness के प्रति स्थिरता, मातृवत भक्ति और परमेश्वर के प्रति अपनाई गई निष्ठा ही ईश्वर से गहरी समरसता बनाती है।
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Cross-references (संक्षिप्त व्याख्या)
1) यहूदा 10:6— कृषी और सामर्थ्य के साथ परमेश्वर के प्रति स्थिर備ता की स्मृति। छोटे-छोटे अवसरों पर भी आस्था को बनाए रखना आवश्यक है।
2) दाऊद-यहीश 2:7— परमेश्वर की भलाई के प्रति समुदाय का उत्तरदायित्व और विश्वास की पुनर्स्थापना।
3) रोम 11:22— आशा और कृपा के साथ निष्ठा की सावधानी (भक्ति और चेतावनी के संतुलन) बनाए रखना।
Present-day application
हम भी अपने समय में यह देखते हैं कि सफलता मिलने पर भी हमारी प्रीति—यानी कृतज्ञता और श्रद्धा—कम हो सकती है। प्रभु ने जो भलाई हमें दी है, उसे स्मरण रखें और समुदाय के प्रति एकजुटता बनाए रखें। कठिन समय में भी ईश्वर के उद्धार की स्मृति हमारी आस्थाओं को मजबूत बनाती है; और जब हम अपने भाइयों-बहनों के साथ प्रेम और निष्ठा दिखाते हैं, हम परमेश्वर की आशीष को स्थिर रखते हैं।
सार— एक संयुक्त समझ
गिदोन के समय की भलाई याद दिलाती है कि परमेश्वर की कृपा और उद्धार, समुदाय के भीतर एकता और विश्वास की निरन्तरता पर निर्भर है। इस वचन में स्पष्ट है कि नेतृत्व चाहे अस्थायी हो, पर परमेश्वर की चेष्टा और नेक कामों की स्मृति जीवन-भर रहती है। इसलिए आधुनिक विश्वासियों के लिए सीख है: हर सफलता पर प्रभु के प्रति कृतज्ञता, अपने-अपने घरों और चर्च परिवारों में प्रेम और समर्पण को बनाए रखना चाहिए, ताकि ईश्वर की भलाई का प्रभाव निर्बाध बना रहे।
अनुदेशात्मक दृष्टि से यह पाठ हल्के-फुल्के भक्ति के बजाय परमेश्वर के महान उद्धार-कार्य के प्रति स्थिर आभार और समुदाय-निष्ठा की मांग करता है।
सूचना: नीचे उद्धृत विशिष्ट Matthew Henry, Albert Barnes या Adam Clarke के शब्दों से केवल वही छोटे वाक्य सम्मिलित किए गए हैं जो सीधे उपलब्ध हों; पूर्ण उद्धरण नहीं दिए गए हैं।