Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीVerse
मत्ती 7:1 मत्ती 7:2 मत्ती 7:3 मत्ती 7:4 मत्ती 7:5 मत्ती 7:6 मत्ती 7:7 मत्ती 7:8 मत्ती 7:9 मत्ती 7:10 मत्ती 7:11 मत्ती 7:12 मत्ती 7:13 मत्ती 7:14 मत्ती 7:15 मत्ती 7:16 मत्ती 7:17 मत्ती 7:18 मत्ती 7:19 मत्ती 7:20 मत्ती 7:21 मत्ती 7:22 मत्ती 7:23 मत्ती 7:24 मत्ती 7:25 मत्ती 7:26 मत्ती 7:27 मत्ती 7:28 मत्ती 7:29



मत्ती 7:13 का तात्पर्य — एक स्पष्ट मार्ग बनाम एक चौड़ा फाटक
इस पदक में यीशु हमें एक स्पष्ट प्रेरक चुनाव की स्मृति दिलाते हैं: दूसरे शब्दों में, जीवन के दो मार्ग—एक छोटा, कठिन, लेकिन जीवन के लिए छोटा रास्ता; और दूसरा बड़ा, सरल, पर विनाश की ओर ले जाने वाला रास्ता। यह मूल रूप से है कि किस दिशा में जीवन का अंतिम परिणाम निर्भर है: स्वर्ग की अनुग्रह और ईश्वर की इच्छा के अनुरूप चलना बनाम सहज, संसारिक सुख-सुविधाओं के पीछे भागना।
संदर्भ-प्रस्तावना
यह वाक्य पाप और पवित्रता के दो विपरीत मार्गों का दृश्य प्रस्तुत करता है। विनाश की ओर जाने वाला चौड़ा मार्ग लोगों को अधिकांशतः आकर्षित करता है क्योंकि उसमें शांति और सुविधाएँ अधिक होती हैं, परन्तु उसका अन्त्य पतन ही होता है। नयी विनियमन की दृष्टि से यह एक चेतावनी है कि आस्थावान व्यक्ति को सरल, but कठिन, मार्ग को चुनना चाहिए जिसमें अनुशासन, नैतिकता और परमेश्वर की इच्छा सम्मिलित हो।
interpretive observations (व्याख्यात्मक बिंदु)
थीमैटिक सूची
अनुशंसित क्रॉस-रेफरेंसे
यथार्थता के लिए कुछ प्राचीन टिप्पणीकारों के दृष्टिकोण संक्षेप में:
- Matthew Henry ने इस विवेकपूर्ण चेतावनी को आत्म-साक्षात्कार और निर्णय की निर्भरता से जोड़ा है, कि ईश्वर की राह कठिन हो सकती है पर उसका परिणाम शुद्ध जीवन है।
- Albert Barnes ने कहा कि यह वाक्य नैतिकता और आध्यात्मिकता के चयन को स्पष्ट करता है—जो रास्ते सांसारिक सुख में ले जाते हैं, वे अंततः आत्मिक विनाश लाते हैं।
- Adam Clarke ने मार्ग के स्पष्ट विभाजन को जीवन के वास्तविक मार्ग के रूप में बताया है, जहाँ चौड़ा मार्ग दूसरों के संगति में मोह बनता है और संकीर्ण मार्ग दैनिक आत्म-नियमन और ईश्वर-आज्ञा की परीक्षा है।
इनमें से किसी एक से सीधे उद्धरण यदि उपलब्ध हों तो नीचे दिए गए उद्धरण सीमित हैं: “चौड़ा है वह फाटक और सरल है वह मार्ग” जैसी पंक्तियाँ हल्के रूप से इतिहास की टिप्पणी में मिलती हैं, परन्तु संचालनात्मक उद्धरण यहाँ सीधे उद्धृत नहीं किए जा रहे हैं।
संयोजनात्मक निष्कर्ष
यह वाक्य एक साधारण सी ध्वनि नहीं देता—हम सभी के लिए एक ठोस परीक्षण है: क्या मैं ईश्वर की राह के लिए संकीर्ण द्वार को चुन रहा हूँ या मनुष्य के सुख-स्वांग के पीछे चौड़े फाटक की ओर बढ़ रहा हूँ? जीवन के यह दो मार्ग हमारी प्रवृत्ति को परखते हैं और बताते हैं कि ईश्वर की इच्छा में ही जीवन की गहंई है।
संक्षिप्त व्यावहारिक निष्कर्ष
क्रॉस-रेफरेंसेस (यथोचित संदर्भ): मत्ती 7:14; Psalm 119:105; रोम 12:2 — ये सभी संकेत देते हैं कि दिव्य रोशनी में चलना ही जीवन की दिशा है।