Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीVerse
मत्ती 7:1 मत्ती 7:2 मत्ती 7:3 मत्ती 7:4 मत्ती 7:5 मत्ती 7:6 मत्ती 7:7 मत्ती 7:8 मत्ती 7:9 मत्ती 7:10 मत्ती 7:11 मत्ती 7:12 मत्ती 7:13 मत्ती 7:14 मत्ती 7:15 मत्ती 7:16 मत्ती 7:17 मत्ती 7:18 मत्ती 7:19 मत्ती 7:20 मत्ती 7:21 मत्ती 7:22 मत्ती 7:23 मत्ती 7:24 मत्ती 7:25 मत्ती 7:26 मत्ती 7:27 मत्ती 7:28 मत्ती 7:29
मत्ती 7:4 पर टिप्पणी — अपनी आँख के लटकے के कारण दूसरे की आँख देखना
पाठ का संक्षिप्त अवलोकन: मत्ती 7 अध्याय में यीशु ने न्याय करने के लिए चेतावनी दी है कि हम पहले अपने भीतर की धारणाओं और दोषों को दूर करें, ताकि हम दूसरों की कमियों को सही ढंग से पहचान और सुधार सकें। मत्ती 7:4 स्पष्ट करता है कि जब हमारे पास kendi आँखी में लट्ठा होता है, तब हम कैसे दूसरों की आँख से तिनका निकालने की बात कर सकते हैं। यह आयातित पाठ मानवीय स्वार्थ, विवेक और प्रेम की सही कसौटी को उजागर करता है।
पद का आध्यात्मिक पाठ
यह वाणी बताती है कि दूसरों की भूलों को देखने से पहले हमें अपने भीतर की त्रुटियों को देखना चाहिए। जब हमारी दृष्टि दोषों से धुँधली होती है, तो हमारा न्याय करने का लाभ शुद्ध नहीं रहता। यीशु का उद्देश्य है कि संत-संशय में भी प्रेम और विनम्रता बनी रहे—हम दूसरों को सुधारने के लिए मानसिक तौर पर तैयार हों, पर यह सुधार तब ही विश्वसनीय होता है जब हमारे स्वयं के दोषों पर पकड़ हो और हम दयालुता से बाद में मार्गदर्शन दें।
इस अध्याय में मुख्य शिक्षण
अन्य बाइबिल पाठों के तर्कशील संबद्ध
यह पद अन्य जगहों के साथ परस्पर जुड़ता है: - मत 7:1–5 — न तो आप पर तानेबाजी होने दें और न ही पहले अपनी कमियों को ग्रहण करें; आत्मनिरीक्षण के बिना दूसरों को न देखें। - लूका 6:41–42 — क्यों तू अपने भाई की आँख देखकर अपने अपने आप को कैसे नहीं देख पाता? तिनकों के बजाय अपने वस्त्र की साफ-सफाई पर ध्यान दें। - याकूब 4:11–12 — निंदक या परिवर्तक नहीं; एक ही विधि और एक ही न्याय के स्रोत पर निर्भर रहें।
व्यावहारिक अनुप्रयोग
जब भी आप किसी की गलती पर विचार करें, पहले अपने आप से पूछिए: - क्या मैं स्वयं इसे पूरी ईमानदारी से देख रहा हूँ? - क्या मेरे भीतर का प्रेम और विनम्रता इस निर्देश को संभालने के लिए पर्याप्त है? - क्या मैं सुधार के अवसर के साथ दया, प्रेरणा और सहायता भी दे रहा हूँ?
संक्षेप (总结)
इस वाक्य का संदेश स्पष्ट है: सही ढंग से सुधार तब संभव है जब हमारे पास अपनी कमियों के प्रति ईमानदारी, नम्रता और प्रेम हो। दूसरों की आँख से तिनका निकालना तब तक उचित नहीं जब हम अपने लट्ठे को नहीं देखते। यह संयम केवल वास्तविक परिवर्तन लाता है, न कि अधिक क्षुद्रता और दोषारोपण।
पढ़ने योग्य संदर्भ
यहां कुछ cross-reference विचार कर सकते हैं: - मत्ती 7:1–5 — न्याय न कर पाने का नैतिक विवेक; आंतरिक स्वतंत्रता बनाये रखने की आवश्यकता। - लूका 6:41–42 — अपनी आँखों के कारण दूसरों को देखने की भूमिका पर विवेक। - याकूब 4:11–12 — एक ही कानून, एक ही न्याय के स्रोत की याद दिलाने वाला निष्कर्ष।
योगदान उद्धरण: नीचे वर्णित तीनों प्राचीन टिप्पणीकारों के संक्षिप्त पंक्तियाँ केवल संदर्भ हेतु उद्धृत हैं और पूर्ण पाठ नहीं हैं: - Matthew Henry से: "One who condemns others while himself neglected must be humbled." (शीघ्र संक्षेप) - Albert Barnes से: "The proverb invites self-examination before judging another." - Adam Clarke से: "Before correcting others, one should correct himself."