Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीChapter
नीतिवचन 1 नीतिवचन 2 नीतिवचन 3 नीतिवचन 4 नीतिवचन 5 नीतिवचन 6 नीतिवचन 7 नीतिवचन 8 नीतिवचन 9 नीतिवचन 10 नीतिवचन 11 नीतिवचन 12 नीतिवचन 13 नीतिवचन 14 नीतिवचन 15 नीतिवचन 16 नीतिवचन 17 नीतिवचन 18 नीतिवचन 19 नीतिवचन 20 नीतिवचन 21 नीतिवचन 22 नीतिवचन 23 नीतिवचन 24 नीतिवचन 25 नीतिवचन 26 नीतिवचन 27 नीतिवचन 28 नीतिवचन 29 नीतिवचन 30 नीतिवचन 31Verse
नीतिवचन 12:1 नीतिवचन 12:2 नीतिवचन 12:3 नीतिवचन 12:4 नीतिवचन 12:5 नीतिवचन 12:6 नीतिवचन 12:7 नीतिवचन 12:8 नीतिवचन 12:9 नीतिवचन 12:10 नीतिवचन 12:11 नीतिवचन 12:12 नीतिवचन 12:13 नीतिवचन 12:14 नीतिवचन 12:15 नीतिवचन 12:16 नीतिवचन 12:17 नीतिवचन 12:18 नीतिवचन 12:19 नीतिवचन 12:20 नीतिवचन 12:21 नीतिवचन 12:22 नीतिवचन 12:23 नीतिवचन 12:24 नीतिवचन 12:25 नीतिवचन 12:26 नीतिवचन 12:27 नीतिवचन 12:28



नीतिवचन 12:26 का अर्थ
धर्मी अपने पड़ोसी की अगुआई करता है, परन्तु दुष्ट लोग अपनी ही चाल के कारण भटक जाते हैं।
पृष्ठभूमि एक नजर
नीतिवचन की पुस्तक दाक्षिण्य जीवन के व्यवहार-मार्ग दिखाती है। यहाँ “धर्मी” वह है जो सत्य, न्याय और प्रेम के साथ व्यवहार करता है; “पड़ोसी” से आशय वह निकट रहा व्यक्ति है जिससे हमारा दैनिक जीवन जुड़ा होता है। दुष्ट लोग अपने ही कर्मों के कारण रास्ता भटकते हैं, न कि बाहरी दबावों से। यह कथन समुदाय में नैतिक मार्गदर्शक के रूप में एक ठोस, व्यवहारिक दृष्टिकोण देता है।
व्याख्यात्मक टिप्पणियाँ
- धर्मी व्यक्ति अपने नैतिक और सामाजिक दृष्टिकोण से समुदाय को दिशा देता है; उसका व्यवहार सुफल देता है और दूसरों को सही मार्ग पर चलने के लिए प्रेरित करता है।
- दुष्ट लोग अपने निगाहों में चालाकी दिखाते हैं, परन्तु उनके निर्णय और अहंकार अंततः उन्हें भटकाने लगते हैं; उनका आत्म-चेतन और निर्णय-शक्ति कमज़ोर पड़ती है।
सीधी टिप्पणियाँ (सूक्ष्म निष्कर्ष)
संबद्ध पदों की संक्षिप्त चर्चा
1) नमूना हद तक—नीतिवचन 11:14: साथियों के बिना सुरक्षा घटती है; धर्मी मार्गदर्शन से समुदाय सुरक्षित रहता है।
2) नमूना हद तक—नीतिवचन 16:25: मनुष्य के मार्ग उसके निवृत्तों से भिन्न नहीं होते; सत्य और धरना मार्ग का पुल बनाते हैं।
3) नमूना हद तक—नीतिवचन 13:20: अच्छी संगति में रहने से बुद्धिमत्ता बढ़ती है; बुरे साथ से भ्रम होता है।
आवश्यक विषयगत सार
युक्तियाँ और निष्कर्ष
इस वचन का मुख्य संदेश यह है कि एक धर्मी व्यक्ति अपने व्यवहार से पड़ोसियों को सही मार्ग दिखाता है, जबकि दुष्ट लोग अपनी योजनाओं के कारण ही मार्ग से भटक जाते हैं। यह न केवल व्यक्तिगत पवित्रता की呼 है, बल्कि सामाजिक शांति और स्थिरता की माँग है। इसलिए दैनिक जीवन में सत्य, निष्कपटता और प्रेम का पालन करें, ताकि हमारा समुदाय एक सकारात्मक दिशा में चलता रहे।
कई पठन-पथ के छोटे उद्धरण
यह भाग रिकॉर्ड करता है कि वास्तविक नेतृत्व और मार्गदर्शन कैसे बिना शोर शराबे के काम करते हैं, और कैसे विपरीत रास्ते अंततः खिसक जाते हैं।
उद्धृत टिप्पणीकारों से निहित विचार (संक्षेपित):
मैथ्यू हेनरी, ऐल्बर्ट बार्न्स और एडम क्लार्क के सार्वजनिक-डायरेक्ट टिप्पणीकारों के विचार इस सार में समाहित हैं: धर्मी का प्रभाव पड़ोस के लिए प्रेरणा बनता है, और दुष्ट अपने ही फैसलों से विफल होते हैं। किसी एकदम कठोर उद्धरण यहां संक्षेप में नहीं दिया गया है, किंतु इन विद्वानों के नैतिक-चरित्र पर बल देने वाले अवलोकनों का सार यही है—नैतिक नेतृत्व से समाज सुरक्षित रहता है।
टेकअवे
अपने आचरण से दूसरों के लिए एक सही मार्ग बनिए; अन्यायपूर्ण चालों के बजाय सत्य और प्रेम को अपनाकर अपने पड़ोस और समुदाय को दिशा दें।