Old Testament
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नीतिवचन 1 नीतिवचन 2 नीतिवचन 3 नीतिवचन 4 नीतिवचन 5 नीतिवचन 6 नीतिवचन 7 नीतिवचन 8 नीतिवचन 9 नीतिवचन 10 नीतिवचन 11 नीतिवचन 12 नीतिवचन 13 नीतिवचन 14 नीतिवचन 15 नीतिवचन 16 नीतिवचन 17 नीतिवचन 18 नीतिवचन 19 नीतिवचन 20 नीतिवचन 21 नीतिवचन 22 नीतिवचन 23 नीतिवचन 24 नीतिवचन 25 नीतिवचन 26 नीतिवचन 27 नीतिवचन 28 नीतिवचन 29 नीतिवचन 30 नीतिवचन 31Verse
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नीतिवचन 14:35 — तत्कालीन संदर्भ और पैगंबर-शासन की नैतिकता
यह चिन्हित करता है कि राजा की प्रसन्नता उसी पर निर्भर है जो बुद्धिमानी और पवित्रता के साथ काम करता है, बनिस्बत उसके जो लज्जा के कारण कार्य करता है। नीतिवचन रानी-नये शासन के भीतर नैतिक आचरण और विवेकपूर्ण निर्णयों को महत्व देता है। यहाँ दीन-हीन और सुसज्जित कर्मों के बीच स्पष्ट भिन्नता दिखती है: बुद्धि से किया गया काम शासन के लिए लाभदायक है; लज्जा से किया गया काम शासन को क्रोधी बना देता है।
ईश्वर के प्रति विश्वास और व्यवहार का संकेत
लिखावट बताती है कि परमेश्वर अपने दामुल के भीतर विश्वासयोग्यता और दयाभाव को महत्त्व देता है। यदि एक अधिकारी बुद्धिमानी से कार्य करता है, तो यह न केवल उनके व्यक्तिगत सफलतात्मक सफलता को दर्शाता है, बल्कि राज्य के लिए भी कल्याण की ओर संकेत करता है। ईश्वर के दिल में ऐसे कर्म की सराहना है जो सत्य, धैर्य और विवेक से प्रेरित हो।
महत्वपूर्ण शब्दों और छायाओं की स्पष्ट व्याख्या
Related चित्रण
नीतिवचन में बुद्धिमानी और अयोग्यता के अन्य उदाहरण हमें यह सिखाते हैं कि सत्य-कार्य न केवल व्यक्ति पर, बल्कि समाज पर भी प्रभाव डालते हैं (उदा. 12:24; 16:12; 19:1)।
क्यों यह आज भी प्रभावशाली है
आज के प्रशासनिक और कार्यस्थलों में भी यह principi प्रतिध्वनित होता है: जो नेतृत्व बुद्धिमान निर्णय लेते हैं, उनके अधीनस्थ और समुदाय संतोष और स्थायित्व पाते हैं; जो निष्क्रिय or घटित निर्णय लेते हैं, वे असमंजस और रोष का कारण बनते हैं। ईश्वर-आत्मा से प्रेरित विवेकशील आचरण हर स्तर पर स्थायी ईमानदारी, सम्मान और कल्याण को बढ़ावा देता है।
महत्वपूर्ण पारस्परिक संदर्भ
कथा-संदर्भ: एक अधिकारी के लिए कर्म का सत्यापन—धार्मिक आचरण के साथ मानव संसाधन के निर्णयों का संयोजन; श्रम और चरित्र की महत्ता (उदा. मीका 6:8; प्रायः 3:5-6; हब 11:6).
सम्बन्धी विचार: ईश्वर की कृपा से संचालित विवेक शासन के भीतर न्याय और चरित्र को मजबूत बनाता है; दयालुता और नीतिगत विवेक एक साथ चलने चाहिए ताकि राजा और जनता दोनों लाभान्वित हों।
आज के पाठ के लिए संक्षिप्त अनुप्रयोग
उद्धरण/चिन्हित विचार: मध्यमार्गी टिप्पणीकारों के अनुसार बुद्धिमत्ता का कार्य राजा के मन को प्रसन्न करता है; अभिमुखी या लज्जात्मक कर्म से राजा रोष का अनुभव करता है।
Cross-references
1) नीति-सूचना में विवेक का महत्त्व: अन्य नीतिवचन उद्धरण जो बुद्धि को आचार-व्यवहार से जोड़ते हैं।
2) न्याय और चरित्र: सत्ता-प्रबंधन में सत्य और नैतिकता की भूमिका पर विचार।