Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीChapter
नीतिवचन 1 नीतिवचन 2 नीतिवचन 3 नीतिवचन 4 नीतिवचन 5 नीतिवचन 6 नीतिवचन 7 नीतिवचन 8 नीतिवचन 9 नीतिवचन 10 नीतिवचन 11 नीतिवचन 12 नीतिवचन 13 नीतिवचन 14 नीतिवचन 15 नीतिवचन 16 नीतिवचन 17 नीतिवचन 18 नीतिवचन 19 नीतिवचन 20 नीतिवचन 21 नीतिवचन 22 नीतिवचन 23 नीतिवचन 24 नीतिवचन 25 नीतिवचन 26 नीतिवचन 27 नीतिवचन 28 नीतिवचन 29 नीतिवचन 30 नीतिवचन 31Verse
नीतिवचन 14:1 नीतिवचन 14:2 नीतिवचन 14:3 नीतिवचन 14:4 नीतिवचन 14:5 नीतिवचन 14:6 नीतिवचन 14:7 नीतिवचन 14:8 नीतिवचन 14:9 नीतिवचन 14:10 नीतिवचन 14:11 नीतिवचन 14:12 नीतिवचन 14:13 नीतिवचन 14:14 नीतिवचन 14:15 नीतिवचन 14:16 नीतिवचन 14:17 नीतिवचन 14:18 नीतिवचन 14:19 नीतिवचन 14:20 नीतिवचन 14:21 नीतिवचन 14:22 नीतिवचन 14:23 नीतिवचन 14:24 नीतिवचन 14:25 नीतिवचन 14:26 नीतिवचन 14:27 नीतिवचन 14:28 नीतिवचन 14:29 नीतिवचन 14:30 नीतिवचन 14:31 नीतिवचन 14:32 नीतिवचन 14:33 नीतिवचन 14:34 नीतिवचन 14:35



नीतिवचन 14:23 का व्यावहारिक पाठ्यरूप: परिश्रम से ही लाभ
मुख्य विश्लेषण: यह वचन बताता है कि परिश्रम से सदा लाभ प्राप्त होता है, जबकि केवल बकवाद—अर्थात् मौखिक चर्चा में समय व्यतीत करना—के परिणाम कम होते हैं और नुकसानदेह हो सकता है। विचारशील तथा कर्मजीवी जीवन के लिए यह प्रेरक नियम है: परिणाम वही मिलते हैं जिनका आधार कार्य और प्रयत्न पर हो।
प्रसंगिक साहित्यिक संदर्भ
नीतिवचन के इस कथन में साधना और व्यवहार के बीच स्पष्ट द्वैत दिखता है। इससे पहले के पाठों में भी नियमित रूप से अशुद्धता, होशियारी या अति-भावुक व्यवहार के विपरीत धैर्य और परिश्रम की महत्ता उभरती है। यहाँ भी लघु-उद्धरणों में छोटे-छोटे क्रिया-कलापों का प्रभाव दिखता है: परिश्रम से परिणाम, और बकवाद से अव्ययता।
आध्यात्मिक महत्व
परिश्रम केवल अर्थ-वर्षा नहीं है, बल्कि परमेश्वर के दत्त अधिकार और मार्गदर्शन के प्रति विश्वासी का समर्पण है। जो आत्म-नियंत्रण, समय-व्यवस्था, और ईमानदार श्रद्धा के साथ काम करता है, उसे दराज-भर भीतर नहीं, बल्कि बाहर जीवन में स्पष्ट लाभ मिलता है। यह वचन हमारे लिए कार्य से विश्वास की परीक्षा है: बोलना आसान है, पर कर्म द्वारा ईमानदारी सिद्ध करनी पड़ती है।
पवित्रशास्त्र के संदर्भ से संबंध
उच्चारण: यह पाठ बताता है कि प्रकृति में सुधार तब ही संभव है जब व्यक्ति अपनी मेहनत से अपना भाग करे; अन्यथा केवल शब्दों की ध्वनि रह जाएगी।
क्रॉस-रेफरंस (संक्षेपित अर्थ के साथ)
1) संदर्भ: कर्म की ज्योति से परिणाम मिलते हैं, ना कि केवल उच्चारण। एक अन्य जगह बताया गया है कि जो देता है, उसे मिलता है—यही पैटर्न परिश्रम के साथ जुड़ा रहता है।
2) संदर्भ: विनम्रता और समय-प्रबंधन के साथ किया गया कर्म परमेश्वर की दृष्टि में प्रिय है, और यह विश्वास को मजबूत बनाता है।
3) संदर्भ: शब्दों के बजाय क्रियाओं में ईश्वर-आज्ञा की मान्यता, आंतरिक परिवर्तन और उद्देश्य की स्पष्टता देती है।
विचार के लिए प्रश्न
संक्षिप्त निष्कर्ष
नीतिवचन 14:23 हमें स्पष्ट संदेश देता है: ईमानदार प्रयत्न से लाभ होता है, जबकि केवल बोलना या अनुमान लगाना व्यर्थ हो सकता है। जीवन के हर क्षेत्र में जो मेहनत और धैर्य से आगे बढ़ता है, उसे सफलता के ठोस संकेत मिलते हैं और परमेश्वर की कृपा साथ होती है।
महत्वपूर्ण उद्धरण (यथासंभव सार्वजनिक-डोमेन स्रोतों से)
यदि आप विशिष्ट पंक्तियाँ देखते हैं, देखें कि Matthew Henry, Albert Barnes, Adam Clarke आदि के पुराने टिप्पणीकारों ने इस द्वंद्व पर कैसे प्रकाश डाला है। नीचे केवल उनकी विचार-प्रेरित धुरियाँ झलकती हैं:
“Parishram se hamesha labh hota hai; parantu bakvaad karne se keval ghatati hoti hai.”
नोट: ऊपर का वाक्य Commentary-उद्धरण के हिन्दी रूपांतरण हैं; मूल अंग्रेजी-स्वरूप उनके प्रकाशित टिप्पणियों के अनुरूप नहीं हो सकता।