Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीChapter
नीतिवचन 1 नीतिवचन 2 नीतिवचन 3 नीतिवचन 4 नीतिवचन 5 नीतिवचन 6 नीतिवचन 7 नीतिवचन 8 नीतिवचन 9 नीतिवचन 10 नीतिवचन 11 नीतिवचन 12 नीतिवचन 13 नीतिवचन 14 नीतिवचन 15 नीतिवचन 16 नीतिवचन 17 नीतिवचन 18 नीतिवचन 19 नीतिवचन 20 नीतिवचन 21 नीतिवचन 22 नीतिवचन 23 नीतिवचन 24 नीतिवचन 25 नीतिवचन 26 नीतिवचन 27 नीतिवचन 28 नीतिवचन 29 नीतिवचन 30 नीतिवचन 31Verse
नीतिवचन 4:1 नीतिवचन 4:2 नीतिवचन 4:3 नीतिवचन 4:4 नीतिवचन 4:5 नीतिवचन 4:6 नीतिवचन 4:7 नीतिवचन 4:8 नीतिवचन 4:9 नीतिवचन 4:10 नीतिवचन 4:11 नीतिवचन 4:12 नीतिवचन 4:13 नीतिवचन 4:14 नीतिवचन 4:15 नीतिवचन 4:16 नीतिवचन 4:17 नीतिवचन 4:18 नीतिवचन 4:19 नीतिवचन 4:20 नीतिवचन 4:21 नीतिवचन 4:22 नीतिवचन 4:23 नीतिवचन 4:24 नीतिवचन 4:25 नीतिवचन 4:26 नीतिवचन 4:27



नीतिवचन 4:14 का स्पष्ट अर्थ
संक्षिप्त सार: दुष्टों की डगर और बुरे लोगों के मार्ग पर चलना न अपनाएं; परमेश्वर के मार्ग के विपरीत रास्ते से दूर रहें ताकि बुद्धि और विवेक सुरक्षित रहें।
पुष्टContextual संदर्भ
नीतिवचन 4 पूरी किताब Proverbs का हिस्सा है, जो युवा पाठकों को जीवन के व्यवहार-निर्देश देता है। chapter 4 में पिता अपने पुत्र को सावधान करता है कि कैसे ज्ञान की शास्त्रणा को अपनाकर नीतियों की दिशा तय की जाए।Verse 14 इस अध्याय के केंद्रीय संदेश की ओर संकेत करता है कि रास्ते कैसे निर्धारित हों—न केवल धार्मिक देहलीज पर, बल्कि दैनिक निर्णयों में भी।
व्याख्यात्मक अवलोकन
महत्वपूर्ण विचारधारा
जोध-धारणा: शिक्षा, चरित्र निर्माण और भूमिका-निर्भर निर्णयों में विवेक की रक्षा करते हुए दुष्टों के रास्ते से दूर रहना चाहिए। यह केवल नैतिक fós नहीं है, बल्कि जीवन के सफलताओं के लिए सुरक्षा है।
संदर्भित पंक्तियाँ (Cross-references)
1) नीतिवचन 13:20 — जो बुद्धिमानों के साथ चलता है, वह बुद्धिमान बनता है; पर अज्ञानी उनके साथ मिलकर हानि उठाते हैं। यह दिखाता है कि मार्ग चयन से ही भविष्य बनता है।
2) पाप के कारण व्यक्ति पथ-भटकता है; पर सत्य के साथ चलना जीवन को सुरक्षित बनाता है (नीतिवचन 14:12; 16:25 के समकक्ष विचारधारा का संकेत)।
3) यशायाह 1:16-17 के अनुरूप, सीखना और अभ्यास के साथ कर्मों में परिवर्तन लाना आवश्यक है—साफ-सुथरी आचरण ही जीवन के मार्ग को साफ करता है।
स्वीकृत संकल्प/प्रशंसा
यह वाक्य एक विनम्र निर्देश है कि भ्रमित करने वाले और नुकसान देने वाले मार्गों से दूरी बनाए रखना ईश्वर की राह पर स्थिर रहने का अंग है।
संक्षिप्त व्यवहारिक निष्कर्ष
जब भी निर्णय करना पड़े, पहले यह देखते रहें कि क्या यह मार्ग सत्य, न्याय और बुद्धिमत्ता को बढ़ाता है। पथ-चयन में संगति, समूह और सलाहकारों की विश्वसनीयता की जाँच करें। अनावश्यक जोखिम उठाने से बचें, ताकि आपका मार्ग प्रभु की दिशा में बना रहे।
नोट: इस पंक्ति के लिए Matthew Henry, Albert Barnes और Adam Clarke के कार्यों से कुछ सामान्य विचारात्मक प्रेरणा मिलती है, परंतु पाठ के मूल अर्थ को नये सिरे से प्रस्तुत किया गया है ताकि हिन्दी पाठकों के लिए स्पष्ट और उपयोगी हो।