नीतिवचन 4:3 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका

देखो, मैं भी अपने पिता का पुत्र था, और माता का एकलौता दुलारा था,

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नीतिवचन 4:3 पद-दर-पद बाइबल टीका

नीतिवचन 4:3 पर टिप्पणी (HINIRV)

व्याख्या संदर्भ: इस वचन में लेखक अपने बचपन के दिनों की याद दिलाकर पाठक को आर्शीवादपूर्ण जीवन-मार्ग के मूल की ओर ले जाता है। प्रसिद्ध पवित्र ग्रंथों के अनुसार प्रेरित पिता के निर्देश और माता द्वारा प्रेमपोषित सुरक्षा के बीच संतुलन बना रहता है। इस भिन्न-भिन्न पारिवारिक दायित्वों की तस्वीर को प्रदर्शित करके, लेखक हमें यह सिखाते हैं कि जवानी के समय में निर्णयात्मक दृष्टि कितनी महत्वपूर्ण है।

मुख्य विचारधारा

यह वचन अपने पिता की स्मृति को याद करता है—“मैं भी अपने पिता का पुत्र था, और माता का एकलौता दुलारा था”—जो जीवन के आरम्भिक वर्षों में सीखने की प्रक्रिया को प्रकट करता है। यहाँ माता-पिता की भूमिका, परिवार की सुरक्षा, और विरासत की चेतना एक साथ उभरती है। यह संदेश स्पष्ट करता है कि बचपन से मिली सीख ही आगे के चरित्र-निर्माण की नींव बनती है।

तीन प्रमुख विषय

  • पिता की शिक्षा और माता की संरक्षण—इन दोनों से नैतिक मूल्य—वचन और आत्म-नियमन का आधार बनता है।
  • युवावस्था में स्पष्ट मार्गदर्शन और नैतिक दिशा की आवश्यकता, ताकि गलत रास्तों से बचा जा सके।
  • परिवार के प्यार के साथ अनुशासन, जो जीवन के अन्य 관계ओं के लिए भी प्रेरणा देता है।

関連 पद (Cross-references)

1) लाभ-संबंधी मार्गदर्शन के महत्व के बारे में ברית-उद्धरण: माता-पिता की शिक्षा के प्रति सम्मान—(संकेत दे सकता है) कि बच्चों को सही पथ पर टिके रहने के लिए अनुशासन जरूरी है।

2) दयालु मार्गदर्शन के साथ बुद्धिमत्ता: बच्चों के लिए विवेकपूर्ण निर्णय लेने का समय—स्पष्ट नैतिक मार्गदर्शन से जुड़ा है।

3) परिवार-आधार की सुरक्षा: परिवार के प्रेम और संरक्षा से जीवन के अंधकार को रोका जा सकता है।

व्यावहारिक विचार

अपने आचरण में, बच्चों के रूप में मिली शिक्षा को पहचानें और उसे आज के समय में कैसे लागू करें, इस पर विचार करें। माता-पिता के निर्देश और पारिवारिक प्रेम को अपने निर्णयों के स्रोत के रूप में मानें। युवा पाठकों के लिए यह संदेश है कि सही मार्ग चुनना सीखना, और सीखते समय माता-पिता की सलाह को अनदेखा नहीं करना चाहिए।

संक्षिप्त निष्कर्ष

नीतिवचन 4:3 हमें स्मरण कराता है कि जीवन-यात्रा में प्रारम्भिक शिक्षा और पारिवारिक सुरक्षा कैसी दिशा तय करती है। यह वचन बताता है कि दृढ़ता और संतुलन के साथ माता-पिता की सीख लेना ही सही मार्ग की शुरुआत है, ताकि चरित्र निर्माण और अनुभव का फल जीवन-भर मिलता रहे।

लेखन-उद्धरण और संदर्भ

यदि आवश्यक हो, तो समानांतर टिप्पणीकारों के भाव-सार्ष्मिक अवलोकन इस प्रकार हैं: मैथ्यू हेनरी, एल्बर्ट बार्न्स और एडम क्लार्क के सार्वजनिक-डोमेन विचारों को इस पाठ के साथ समाहित किया गया है—परंतु किसी भी पूर्ण वाक्य का उद्धरण केवल हल्के संकेत के रूप में है और मूल पाठ से हटा नहीं किया गया है.

*** इस टीका में सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध कुछ प्राचीन और क्लासिक स्रोतों की सामग्री शामिल है। कुछ सामग्री को कृत्रिम बुद्धिमत्ता उपकरणों की सहायता से संसाधित, संक्षिप्त या अनुवादित किया गया हो सकता है। हर व्याख्या को बाइबल के पूरे पाठ और उसके संदर्भ के साथ अवश्य जाँचें। यदि आपको कोई त्रुटि या ऐसा अनुवाद मिले जिसे सुधारने की आवश्यकता हो, तो कृपया हमसे संपर्क करें।

नीतिवचन 4:3 समानांतर पद और संबंधित वचन

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और दाऊद ने कहा, “मेरा पुत्र सुलैमान सुकुमार और लड़का है, और जो भवन यहोवा के लिये बनाना है, उसे अत्यन्त तेजोमय और सब देशों में प्रसिद्ध और शोभायमान होना चाहिये; इसलिए मैं उसके लिये तैयारी करूँगा।” अतः: दाऊद ने मरने से पहले बहुत तैयारी की।

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फिर राजा दाऊद ने सारी सभा से कहा, “मेरा पुत्र सुलैमान सुकुमार लड़का है, और केवल उसी को परमेश्‍वर ने चुना है; काम तो भारी है, क्योंकि यह भवन मनुष्य के लिये नहीं, यहोवा परमेश्‍वर के लिये बनेगा।

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आपस में एक सा मन रखो; अभिमानी न हो; परन्तु दीनों के साथ संगति रखो; अपनी दृष्टि में बुद्धिमान न हो। (नीति. 3:7, यशा. 5:21)

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