Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीChapter
नीतिवचन 1 नीतिवचन 2 नीतिवचन 3 नीतिवचन 4 नीतिवचन 5 नीतिवचन 6 नीतिवचन 7 नीतिवचन 8 नीतिवचन 9 नीतिवचन 10 नीतिवचन 11 नीतिवचन 12 नीतिवचन 13 नीतिवचन 14 नीतिवचन 15 नीतिवचन 16 नीतिवचन 17 नीतिवचन 18 नीतिवचन 19 नीतिवचन 20 नीतिवचन 21 नीतिवचन 22 नीतिवचन 23 नीतिवचन 24 नीतिवचन 25 नीतिवचन 26 नीतिवचन 27 नीतिवचन 28 नीतिवचन 29 नीतिवचन 30 नीतिवचन 31Verse
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नीतिवचन 4:20 का अर्थ
यह आयत एक पिता-व्यक्ति के स्वर में ध्वनि देता है: पुत्र, मेरे शब्दों को ध्यान से सुनो। यहाँ स्पष्ट संदेश है कि ज्ञान और बुद्धि के पथ पर स्थिर रहने के लिए कान लगाने का कर्म सबसे पहले है; बुद्धिमत्ता के लिए कान खोलना और वचन के पीछे चलना आवश्यक है।
संदर्भ-परिसर
नीतिवचन कुल मिलाकर बौद्धिक और नैतिक मार्गदर्शन का संग्रह है, जो शिक्षा-प्राप्तियों और भयख़ुदान (ईश्वर के अनुसार) जीवन जीने की राह बताता है। अध्याय 4 में पिता अपने पुत्र को शिक्षा का महत्त्व समझाते हैं—न केवल बातें, बल्कि नियमित ध्यान और आचरण का अभ्यास भी आवश्यक है। यह छंद पुत्र को एक सतर्क और समर्पित सुनवाई का आह्वान है, ताकि ज्ञान उसकी जीवन-यात्रा में प्रत्यक्ष प्रभाव डाल सके।
interpretive observations
छोटे थीमैटिक बिंदु
संबंधित ग्रंथ-संदर्भ
1) प्रेम, विश्वास और आज्ञाओं पर आधारित जीवन की प्रसिद्ध शिक्षाएं—यह पाठ शांति और सुरक्षा में वृद्धि के लिए वचन के अनुरूप चलने का आह्वान करती हैं।
2) एक अन्य नीतिवचन नोट करता है कि बुद्धिमत्ता के पथ पर स्थिर रहने के लिए वचन के मार्गदर्शन को अपने दिल में स्थान दें।
3) अनुभवी मार्गदर्शक के अनुसार, सुनना और समझना—दोनों प्रारम्भिक आवश्यकताएँ हैं ताकि ज्ञान व्यवहार में आए।
ये सभी संदर्भ यह संकेत करते हैं कि वचन का पालन व्यक्तिगत जीवन में विशेष गति और दिशा देता है, जब हम उसे कानों से हृदय तक पहुंचाते हैं।
प्रेरक निष्कर्ष
पिता के शब्दों के साथ, यह मंत्र नैतिक और आध्यात्मिक सुरक्षा की दिशा देता है: पहले सुनना—फिर मानना—फिर जीना। अपने दिन-प्रतिदिन के निर्णयों में वचन के नियमों को केंद्र में रखने से बच्चों के जीवन में स्थिरता और समझ बढ़ती है।
धार्मिक-निष्कर्ष और क्रॉस-रेफरेंस
नीतिवचन 3:1-2: यदि हमारे हृदय को वचन के अनुरूप निर्देशित किया जाए, तो दीर्घायु और शांति मिलती है—यह स्पष्ट कारण-प्राप्त परिणाम है।
यशायाह 50:4: प्रभु की ओर से मिलने वाला ज्ञान और सुनने की क्षमता जीवन-पथ के लिए समर्थ बनाती है।
याकूब 1:22-25: केवल सुनना नहीं, वरन् उसका पालन करना भी आवश्यक है—यही बुद्धिमत्ता का प्रभावी परीक्षण है।