Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीChapter
नीतिवचन 1 नीतिवचन 2 नीतिवचन 3 नीतिवचन 4 नीतिवचन 5 नीतिवचन 6 नीतिवचन 7 नीतिवचन 8 नीतिवचन 9 नीतिवचन 10 नीतिवचन 11 नीतिवचन 12 नीतिवचन 13 नीतिवचन 14 नीतिवचन 15 नीतिवचन 16 नीतिवचन 17 नीतिवचन 18 नीतिवचन 19 नीतिवचन 20 नीतिवचन 21 नीतिवचन 22 नीतिवचन 23 नीतिवचन 24 नीतिवचन 25 नीतिवचन 26 नीतिवचन 27 नीतिवचन 28 नीतिवचन 29 नीतिवचन 30 नीतिवचन 31Verse
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नीतिवचन 6:20 — immediate setting
यह छंद पितृ-शिक्षा के संदर्भ में है। नीतिवचन 6 में जागरूकता, चालाकी, और व्यवहारिक ज्ञान के पाठ हैं जिन्हें पिता द्वारा पुत्र को दिए गए निर्देश से जोड़ा गया है। यहाँ पुत्र को उसकी माता-पिता की आज्ञा-आदेश के स्थायित्व की याद दिलाई जाती है, क्योंकि परिवार-जीवन में नैतिक मार्गदर्शन का महत्व निरंतर बना रहता है।
यह वचनों में परमेश्वर के साथ विश्वास और आचरण का संबंध
सूत्र बताता है कि जीवन में परमेश्वर की शिक्षा और परिवार की शिक्षण परंपरा एक साथ चलती है। पिता की आज्ञा और माता की शिक्षा—ये दोनों उत्तरदायित्व और जीवन-निर्देशन के स्तम्भ हैं जो व्यक्ति को गलत मार्ग से रोकते हैं और सत्य की राह दिखाते हैं। यह स्पष्ट करता है कि आंतरिक विश्वास और बाह्य आचरण एक दूसरे को समर्थ बनाते हैं; पालन से मनुष्य ईमानदारी, विवेक और आत्म-नियमन प्राप्त करते हैं।
अर्थपूर्ण शब्द और चित्र
संबद्ध उल्लेखित विचारधाराएँ (cross-references)
कुछ अन्य पवित्रग्रंथों से यह वाक्य जुड़ाव दिखाता है:
व्याख्यात्मक स्पर्श: उपरोक्त संदर्भ बताए हैं कि माता-पिता की शिक्षा न केवल आज के नैतिक निर्णयों के लिए है, बल्कि भविष्य की प्रतिबद्धताओं को भी आकार देती है।
पश्चाताप-उपयुक्त आज की व्यावहारिकता
- बच्चों और युवाओं के लिए: अपने माता-पिता के मार्गदर्शन को अनदेखा करने के बजाय उसे समझने की कोशिश करें; समय के साथ सम्यक विवेचन से आंतरिक विश्वास मजबूत होता है।
- पालक-जन के लिए: अपने बच्चों को केवल आज्ञाओं के बजाय कारण बताकर समझाएं ताकि वे आचरण के पीछे के तर्क को समझ सकें और आत्म-संयम विकसित करें।
- समुदाय के लिए: पारिवारिक शिक्षा और धर्म-समुदाय का संयुक्त समर्थन नैतिक आचरण की निरंतरता बनाए रखता है।
एक संयुक्त संरचना के रूप में संक्षित सार
निजी आचरण और सामुदायिक जीवन के तालमेल के लिए माता-पिता की शिक्षा और पिता की आज्ञा एक-दूसरे का पूरक हैं। परमेश्वर के मार्गदर्शन के अनुरूप ये दोनों स्रोत मिलकर व्यक्ति को विवेकपूर्ण और सत्य-परायण बनाते हैं।
महत्त्वपूर्ण उद्धरण (सार):
Matthew Henry, Albert Barnes, Adam Clarke के सार्वजनिक-domain टिप्पणीकारों के अनुसार यह वचन परिवार के नैतिक प्रशिक्षण की महत्ता को रेखांकित करता है; पिता की आज्ञा और माता की शिक्षा दोनो मिलकर व्यक्ति की राह के रक्षक हैं।
उद्धृत विचार (संक्षेप): “जीवन का पाठ घर से शुरू होता है; यदि घर में नैतिक कानून का सम्मान है, तो बाहर भी व्यक्ति मजबूत रहता है।”