Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीChapter
नीतिवचन 1 नीतिवचन 2 नीतिवचन 3 नीतिवचन 4 नीतिवचन 5 नीतिवचन 6 नीतिवचन 7 नीतिवचन 8 नीतिवचन 9 नीतिवचन 10 नीतिवचन 11 नीतिवचन 12 नीतिवचन 13 नीतिवचन 14 नीतिवचन 15 नीतिवचन 16 नीतिवचन 17 नीतिवचन 18 नीतिवचन 19 नीतिवचन 20 नीतिवचन 21 नीतिवचन 22 नीतिवचन 23 नीतिवचन 24 नीतिवचन 25 नीतिवचन 26 नीतिवचन 27 नीतिवचन 28 नीतिवचन 29 नीतिवचन 30 नीतिवचन 31Verse
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नीतिवचन 6:32 का संदर्भ—परस्त्रीगमन और उसका परिणाम
यह पद उस पाठ के भीतर आता है जो धूर्तता, विश्वासघात और मानवीय विवेक के उल्लंघन पर कठोर चेतावनी देता है। एक ऐसे व्यक्ति के बारे में कहा गया है जो परस्त्रीगमन में फंसता है; यह एक व्यवहारिक अपराध है जो न केवल नैतिक बुराई है, बल्कि आत्मिक दुर्गति की राह भी बनाता है। नीतियाँ इस क्षेत्र में स्पष्ट निर्देश देती हैं कि परमेश्वर की दृष्टि में ऐसी हरकत कैसी है और इसके परिणाम कहाँ तक जाते हैं।
पुढ़ की दृष्टि और विश्वास के बारे में
भजन-तरह के साक्ष्यों के समान, यह पद बताता है कि ईश्वर की नैतिक व्यवस्था में पंथिक पापों के प्रति कठोरता नहीं परंतु न्याय का उपाय है। परस्त्रीगमन एक आचरण है जो वैवाहिक प्रतिबद्धताओं का उल्लंघन है, और इसका सारा राजनीतिक-आर्थिक, सामाजिक और आत्मिक जीवन पर गहरा प्रभाव पड़ता है। यह पाठ यह भी बताता है कि परमेश्वर सत्य और निष्कपट हृदय को पुरस्कृत करता है और छल-कपट को दंडित करता है।
महत्वपूर्ण शब्दों की स्पष्टता
क्रॉस-रेफरेंस (संकेतित तरफ)
1) बेथ-एक और उदाहरण में विवाह-निष्ठा की महत्ता: अन्य स्थान विवाह के पवित्र स्थान की रक्षा की शिक्षा देता है और निष्कर्ष निकालता है कि पत्थर-सी ईमानदारी से रहने पर स्थिर सुरक्षा मिलती है।
2) दुष्टाचार के दुष्परिणाम: क्रमिक पाप कैसे जीवन के विभिन्न हिस्सों को जड़ से प्रभावित करते हैं, यह दिखाने वाले दायरे में एकादश दृष्टान्त मिलते हैं।
3) आत्म-नियमन और विवेक के मूल्य: यदि व्यक्ति अपने हृदय में पाप को रोके रखे, तो उसका व्यवहार समझदारी और संयम से भरपूर रहता है।
प्रमुख टिप्पणीकारों के संकेत (संक्षेप)
यहाँ हम Matthew Henry, Albert Barnes, Adam Clarke आदि के विचारों को एक साथ समेटते हैं ताकि पाठ की तात्विकता मजबूत हो सके।
Matthew Henry का संक्षेप: विवेक और संयम का अनुपालन, विवाह-निष्ठा की पवित्रता, और पाप के स्पष्ट दुष्परिणाम; यह पाठ लोगों को व्यवहार की जाँच के लिए प्रोत्साहित करता है।
Albert Barnes का संक्षेप: पाप के साथ संबंध और उसके परिणाम नैतिक और सामाजिक दोनों रूप से दिखते हैं; दुष्कर्म से बचना और ईश्वर के नियमों के अनुरूप जीवन जीना उच्चतम लाभ है।
Adam Clarke का संक्षेप: पाप के विरुद्ध स्पष्ट चेतावनी, वैवाहिक प्रेम और विश्वस्तता की रक्षा का महत्व; आत्म-इच्छाओं पर नियंत्रण रखने की शिक्षा।
आज के संदर्भ के लिए सार-सार
आज भी यह चेतावनी प्रासांगिक है कि एक व्यक्ति जो वैवाहिक प्रतिबद्धता का उल्लंघन करता है, वह न केवल साथी के साथ विश्वासघात करता है, बल्कि अपने जीवन की दिशा-निर्देशों को भी खो देता है। यह पवित्रता के मूल्य को बनाए रखने का आह्वान है—व्यवहार में स्पष्ट, ईमानदार और आत्म-नियन्त्रित रहने के लिए।
छोटे-से-छोटा व्यवहारिक मार्गदर्शन
सार: इमानदारी, वैवाहिक पवित्रता, और आत्म-नियमन—ये तीनों तत्व किसी भी समाज की स्थिरता के आधार हैं; यदि इनमें से एक भी कमजोर हो, तो जीवन का निर्देशन कठिनाई में पड़ जाता है।