Old Testament
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पाठ का परिचय — नीतिवचन 6:17
यह श्लोक परमप्रभु की घृणा करने योग्य गुणों में से तीसरे को सूचीबद्ध करता है: "गहमण्ड से चढ़ी हुई आँखें, झूठ बोलनेवाली जीभ, और निर्दोष का लहू बहानेवाले हाथ" (HINIRV के अनुसार)। यह चेतावनी व्यक्तिगत चरित्र और सामाजिक परिणाम दोनों पर केन्द्रित है—आत्मश्लाघा, छल और हिंसा ईश्वर के सामने अस्वीकार्य हैं।
शास्त्रकीय संदर्भ और अध्याय में स्थान
नीतिवचन 6 में चेतावनियों और दुराचरणों की सूची दी गई है—आलस्य, छल, झूठ, और अन्य बुराइयाँ। शास्त्र यह बताने का प्रयत्न करता है कि किस प्रकार छोटे-छोटे व्यक्तिगुण बड़े सामाजिक और आध्यात्मिक पतन को जन्म देते हैं। आयत 17 उन विशेष अपराधों को नाम देती है जो परमेश्वर के न्याय के विरोधी हैं।
मुख्य आध्यात्मिक शिक्षा
इस आयत से मिलने वाला प्रमुख संदेश यह है कि ईश्वर के सामने केवल बाह्य कर्म ही नहीं, बल्कि हृदय के गठन और बोलचाल की सत्यता भी महत्वपूर्ण है।
अन्य बाइबिल स्थानों से तुलना
1) मत्ती 23 में यीशु फ़रिसियों की घमण्डी और निहित दुष्टता की निंदा करते हैं; वहाँ भी बाह्य धर्मिता और हृदय की विडम्बना पर व्यापक आलोचना है। 2) भजन 101:5-7 में दावीद भी घमण्ड और मिथ्या बोलने वालों से अलग रहने का संकल्प लेते हैं—यह विश्वसनीय जीवन की आवश्यकता को प्रतिपादित करता है। 3) यशायाह 1 में प्रभु यह्राह करता है कि पूजा के साथ यदि अन्याय और निर्दोषों के प्रति हिंसा बनी रहे तो वह अस्वीकार्य है—यह रस्मी धर्म और नैतिकता की वास्तविकता के बीच सामंजस्य की बात करती है।
व्यवहारिक उपयोग
आयत को अपने जीवन में लागू करने के कुछ साधारण कदम:
मातृ-ग्रंथों का संक्षिप्त संकेत
मैथ्यू हेनरी और अल्बर्ट बार्न्स जैसे पुरानी टीकाकारों ने भी नीतिवचन की इस प्रकार की सूचियों को हृदय और आचारण की सजा के रूप में देखा है। उदाहरणतः Matthew Henry का एक प्रसिद्ध वाक्यांश प्रायः उद्धृत होता है—"He enumerates the characteristics of a wicked man"—यह सूचीबद्ध बुराइयों को चरित्र की पहचान बताने वाला कहता है (कम-से-कम वाक्य उद्धरण स्वरूप उपयोग: उपर्युक्त अंग्रेजी वाक्य)। अल्बर्ट बार्न्स ने टिप्पणी में इस प्रकार के गुणों को समुदाय के पतन के कारणों के रूप में समझाया। Adam Clarke ने भी धार्मिक और नैतिक जीवन के यथार्थ पर जोर दिया।
संक्षेप
नीतिवचन 6:17 हमें याद दिलाता है कि ईश्वर केवल कर्मों को ही नहीं, वरन् दृष्टि, बोली और अन्याय के खिलाफ उद्यम को भी देखता है। घमण्ड, झूठ और निर्दोषों के प्रति हिंसा—ये तीनों किसी भी समाज और व्यक्तिगत विश्वास के लिए घातक हैं। आज की परीक्षा यह है कि हम अपनी आँखें, भाषा और हाथ को ईश्वर की दृष्टि के अनुसार किस तरह बदलते हैं।