Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीChapter
नीतिवचन 1 नीतिवचन 2 नीतिवचन 3 नीतिवचन 4 नीतिवचन 5 नीतिवचन 6 नीतिवचन 7 नीतिवचन 8 नीतिवचन 9 नीतिवचन 10 नीतिवचन 11 नीतिवचन 12 नीतिवचन 13 नीतिवचन 14 नीतिवचन 15 नीतिवचन 16 नीतिवचन 17 नीतिवचन 18 नीतिवचन 19 नीतिवचन 20 नीतिवचन 21 नीतिवचन 22 नीतिवचन 23 नीतिवचन 24 नीतिवचन 25 नीतिवचन 26 नीतिवचन 27 नीतिवचन 28 नीतिवचन 29 नीतिवचन 30 नीतिवचन 31Verse
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नीतिवचन 6:26 का संक्षिप्त संदर्भ और अर्थ
यह पद नीतिवचन के एक अंश में निश्चयतः सावधानी बरतने की चेतावनी देता है। यहाँ बताया गया है कि जीवन-वर्षा की दिशा में विवेकहीन निर्णय कैसे सीधे-सीधे भोग-वस्तु और मोह के कारण नुकसान पहुँचाते हैं। पहले भाग में वेश्या के संदर्भ से आर्थिक-नैतिक प्रभाव दर्शाए गए हैं; दूसरे भाग में तुरंत प्रतिफल—रोटी के लिए भिक्षा—की दशा और अंततः व्यभिचार की लीलात्मकता। समग्र सन्देश यही है कि सांसारिक लालच और शारीरिक लालच व्यक्ति को पतन और अभाव की ओर ले जाते हैं, जबकि ईश्वरीय योजना में ईमानदारी और संयम ही सुरक्षित मार्ग हैं।
मुख्य अर्थ
संदेश स्पष्ट है: वेश्यागमन जैसे पापी मार्ग समय पर सस्ते लाभ देता दिख सकता है, पर वह आत्मा के लिए भला नहीं कर सकता। मूर्त लाभ के पीछे नैतिक हानि और आत्मिक क्षति है। रोटी के टुकड़ों की भिक्षा इस बात को दिखाती है कि नश्वर आवश्यकताओं की तृप्ति पाने के लिए शारीरिक लालच विशेषकर वित्तीय-योजनाओं के साथ विकल्प बनाते हैं, तो न केवल मौजूदा स्थिति बल्कि भविष्य की सुरक्षा भी संकट में पड़ जाती है।
दो-तीन प्रमुख विषय
संबद्ध पाठ
चलचित्रित पाठ के साथ निम्न आयाम भी विचारणीय हैं:
इन संदर्भों में नैतिकता, आत्म-नियंत्रण और ईश्वर के साथ सम्बद्धता का महत्व साफ़ दिखता है।
व्यावहारिक विचार
- अपने निर्णयों में तत्काल लाभ बनाम दीर्घ-कालिक सम्मान के बारे में स्पष्ट सोच रखें।
- आर्थिक दबाव के समय भी वैध और नैतिक मार्ग ही चुने जाएं; सुरक्षा-योजना बनाकर नीतिपरायण खर्च करें।
- साथी और समुदाय से सहायता मांगना उचित है; अकेले न चलें, क्योंकि गलत मार्ग तुरंत दिख सकता है पर दुख दीर्घकाल तक रहते हैं।
कथन-आधार और समापन
इस पद में व्यभिचार की तीव्र आकर्षण वाले पथ की धमकी स्पष्ट है: उम्रभर की रोटी-भर की सुविधा के लिए भी नैतिक-आचार का त्याग न कर डालना चाहिए। नीतिवचन के संदर्भ में यह एक चेतावनी है कि व्यक्ति को शारीरिक लालच के भेदभावपूर्ण प्रभावों से सावधान रहना चाहिए और ईश्वर के मार्ग पर स्थिर रहना चाहिए।
संक्षिप्त निष्कर्ष
वेश्यागमन जैसे पापकर्म से मिलने वाला अस्थाई लाभ अंततः आत्मा की सुरक्षा और जीवन की अनमोलता पर भारी प्रश्नचिन्ह लगाता है। आत्म-नियंत्रण, ईश्वर-विश्वास, और नैतिक व्यवहार ही स्थायी जीवन की कुंजी हैं।
क्रॉस-रेफरेंसेस: नीतिवचन 5:3–4; नीतिवचन 7:21–27; याकूब 1:14–15 — सभी यह बताते हैं कि शारीरिक लालच कैसे लालच के साथ-साथ बुरी परिणतियाँ लाते हैं, पर ईश्वर के मार्ग पर चलना सुरक्षा और पवित्रता देता है।
नोट: इस पंक्ति में Matthew Henry, Albert Barnes और Adam Clarke के स्पष्ट उद्धरण आवश्यक होने पर नीचे उद्धृत किए जा सकते हैं।