Old Testament
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नीतिवचन 1 नीतिवचन 2 नीतिवचन 3 नीतिवचन 4 नीतिवचन 5 नीतिवचन 6 नीतिवचन 7 नीतिवचन 8 नीतिवचन 9 नीतिवचन 10 नीतिवचन 11 नीतिवचन 12 नीतिवचन 13 नीतिवचन 14 नीतिवचन 15 नीतिवचन 16 नीतिवचन 17 नीतिवचन 18 नीतिवचन 19 नीतिवचन 20 नीतिवचन 21 नीतिवचन 22 नीतिवचन 23 नीतिवचन 24 नीतिवचन 25 नीतिवचन 26 नीतिवचन 27 नीतिवचन 28 नीतिवचन 29 नीतिवचन 30 नीतिवचन 31Verse
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नीतिवचन 6:27 का तात्पर्य
सीधा अर्थ यह है: क्या संभव है कि व्यक्ति अपनी छाती पर अग्नि रखे और उसके वस्त्र जल कर न चाहे? इस वाक्य से प्रेरित शिक्षा यह है कि खराब कर्मों के परिणाम अपनी जगह बनाते हैं; जब हम नुकसान पहुँचाने की योजना बनाते हैं, तो वह नुकसान अंततः हमारे ही ऊपर आकर टपकता है।
पृष्ठभूमि और संदर्भ
नीतिवचन के इस भाग में परमेश्वर के बुद्धिमान मार्गदर्शन की आवश्यकता पर बल है—कथित मित्रता, चोरी, प्रलोभन और दुष्ट योजनाओं के खतरों का चित्रण। अध्याय 6 में उकसाने वाले कर्म और उनके नतीजों के बारे में चेतावनी दी गई है। यहाँ आग के जलने की कल्पना क्रिया-प्रतिफल के विधान को दर्शाती है: जैसे आग अपने आप कपड़ों को जला दे, वैसे ही चोरी या गलत इरादे से किया गया नुकसान स्वयं नष्ट होता है।
व्याख्यात्मक अहम बातें
महत्वपूर्ण बिंदु (थीम्स)
अनुसार सम्बन्धी आयतें
1) गलत योजना बनाकर नुकसान पहुँचाने वाले की निश्चय ही उसे ही भुगतनी पड़ती है; यह नीति अन्य स्थानों पर भी दिखती है कि अपराधी को उसकी क्रिया के अनुसार दण्ड मिलता है।
2) आत्म-प्रेरित नुकसान से बचने के लिए विवेक और आचरण की सततता आवश्यक है; सतर्क रहने पर विरोधी के लाभ में भी गिरावट आती है।
3) सच्चे ज्ञान की निवese से नीतिपरायण निर्णय लेने पर आशीर्वाद मिलता है, और आत्मविश्वास प्रबल होता है।
कथन-समीक्षा: प्रसिद्ध टिप्पणीकारों के संकेत
हैंड्स के अनुसार यह शास्त्रासन स्पष्ट करता है कि दोहरापन और छल-छद्म का परिणाम नहीं छिप सकता; चोरी की योजना एक ऐसी आग है जो अंततः खुद को जला डालती है।
बर्न्स के अनुसार यह विचार कराता है कि यदि कोई बदनीयती से रंगे-रंगाए अवसर बनाता है, तो उसे अपने ही जाल में फँसना पड़ता है।
एडम क्लार्क ने इसे इस प्रकार उद्धृत किया: “जो आग दूसरों पर डालना चाहते हैं, वे स्वयं जलते हैं; यह नैतिक कानून का सामान्य सूत्र है।”
संक्षिप्त निष्कर्ष / व्यवहारिक लेकर जाने योग्य सुझाव
- जोखिम भरे नगरों से दूरी बनाएँ और स्पष्ट नैतिक मानदण्डों के साथ निर्णय लें।
- अपने विचारों और योजनाओं की पड़ताल करें; अगर इनमें छल-छद्म है, तो उन्हें छोड़ दें ताकि परिणाम आपके विरुद्ध न आ जाएँ।
- कठिन परिस्थितियों में सत्य और सम्मान से राह चुनें, ताकि आत्म-विश्वास और शांति बनी रहें।
क्रॉस-रेफरेंसेज (संक्षेप में समझाई गई)
1) नीतिवचन 3:5-6 — विश्वास पर निर्भर होकर परमेश्वर की राह पकड़ने से नीति-युक्त मार्ग मिलते हैं।
2) गलातियों 6:7 — कौन सा कारण जो हो, भक्त अपने कर्मों के अनुसार फल पाते हैं; न बनना चाहिए कि हम कुछ भी गलत करें और भुगतें।
3) यिर्मयाह 17:9 — मन भावनाओं से अधिक धोखे में न डूबे, क्योंकि हृदय कड़ा and दूरगामी नतीजे बताता है।