भजन संहिता 108:4 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका

क्योंकि तेरी करुणा आकाश से भी ऊँची है, और तेरी सच्चाई आकाशमण्डल तक है।

भजन संहिता 108:4 पद-दर-पद बाइबल टीका

भजन संहिता 108:4 पर टिप्पणी

पद का संदर्भ: भजन 108:4 — क्योंकि तेरी करुणा आकाश से भी ऊँची है, और तेरी सच्चाई आकाशमण्डल तक है। यह गीतistes एक साथ परमेश्वर की गहरी करुणा और सत्य के व्यापक दायरे को प्रस्तुत करता है, ताकि भक्त अपने दृढ़ विश्वास को आसमान तक फैला दे और उसका आशीर्वाद स्वीकार करे। इसे सुनहरे अनुभव के रूप में पढ़ना चाहिए कि ईश्वर की करुणा और विश्वासयोग्यता दोनों क्रियाशील हैं, न केवल अतीत में, बल्कि हर परिस्थिति में वर्तमान हैं।

मुख्य तात्पर्य

यह पद परमेश्वर की करुणा और सत्य की अतुलनीय ऊँचाई को बताते हुए यह बताता है कि उसका दयालु कमल और उसकी सत्यता आकाश-से-आकाश तक फैले हुए हैं। भक्त को यह याद दिलाता है कि चाहे परिस्थितियाँ कैसी भी हों, ईश्वर का प्रेम सीमा-रहित है और उसकी सच्चाई अडिग है।

दो-तीन प्रमुख विषय

  • परमेश्वर की करुणा आकाश से ऊँची बताई जाती है ताकि यह स्पष्ट हो कि उसका प्रेम सब कुछ गले लगाता है और उद्धार की दिशा देता है।
  • ईश्वर की सत्यता आकाशमण्डल तक है; उसका शब्द और वचन अचल और विश्वसनीय है।
  • भक्तों के लिए यह दोनों गुण है कि वे कठिऩ समय में भी परमेश्वर पर निर्भर रहें, क्योंकि उसकी करुणा और सत्यता चलते रहते हैं।

संबंधित पंक्तियाँ (Cross-references)

• भजन संहिता 57:10 — परमेश्वर की करुणा इतनी विस्तृत है कि उसे हर कोना ढक लेती है; यह प्रेरित करती है कि हम अपनी चिंता उसकी करूणा में डाल दें।
• निर्गमन 34:6-7 — प्रभु दयालु और प्रेमी, स्लह, क्षमा करने वाला; उसकी आस्था और चेष्टा का संगम यहाँ स्पष्ट है।
• यिर्मयाह 31:3 — परम प्रेम की घोषणा: “मैं तुझसे प्रेम करता हूँ”; करुणा और सत्य का संगम पवित्रता से परिपूर्ण है।

इन संदर्भों से समाह्वय बनता है कि करुणा और सत्य एक दूसरे के पूरक हैं और भक्त के जीवन में परमेश्वर के क्रोध-रहित प्रेम को अनुभव कराने हेतु एक साथ कार्य करते हैं।

व्यावहारिक चिंतन

व्यावहारिकता की दृष्टि से यह verse हमें यह सिखाता है कि हम जीवन में कभी भी परिस्थिति से घृणा नहीं करें, बल्कि अपने दिल में परमेश्वर की करुणा की विशालता और उसकी सत्य की अचलता को स्मरण रखें। कठिन समय में प्रार्थना करें, और अधिक भरोसा रखें कि ईश्वर जो कहता है, वह सत्य है और जो करता है, वह करुणामयी है।

संक्षिप्त निष्कर्ष

यह पद परमेश्वर की दो अनमोल गुण—करुणा और सत्य—की ऊँचाइयों को उद्घाटित करता है, ताकि भक्त को यह विश्वास हो कि प्रभु का प्रेम और उसका वचन संसार की सीमाओं से परे हैं। इस चित्त-स्थिति के साथ हम 삶 में आशा और प्रार्थना को बनाए रखें।

टिप्पणी नोट: निम्नलिखित लेखक-उद्धरण का संक्षेप प्रयोग आवश्यक हो तो केवल पूर्व-निर्दिष्ट पंक्तियों के अंश हैं और पूर्ण टेक्स्ट नहीं दिए जाते।

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