भजन संहिता 11:3 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका

यदि नींवें ढा दी जाएँ* तो धर्मी क्या कर सकता है?

भजन संहिता 11:3 पद-दर-पद बाइबल टीका

भजन संहिता 11:3 पर स्पष्ट अर्थ

यदि नींवें ढा दी जाएँ, तो धर्मी क्या कर सकता है?

यह पद यह प्रधान विचार देता है: एक समय में सब कुछ पुनर्निर्माण या स्थिरता ध्वस्त हो जाए तो स्थिर धर्मी की आस्था और पक्का निर्णय कहाँ टिकेगा? परमेश्वर के विरुद्ध उठती परिस्थितियाँ और अंदर की निश्चितता—ये दोनों एक साथ चलते हैं। यदि पृथ्वी की नींवें हिल जाएँ, तब भी एक दृढ़ विश्वास-धर्मी अपने ईश्वर पर टिके रहने का विकल्प करता है, क्योंकि उसकी आशा उस अनन्त न्यायपरक शासन में है जिसमें अवसाद के बीच भी सत्य रहता है।

पृष्ठभूमि और संदर्भ

यह भजन परमेश्वर के विरुद्ध दुर्दम्य परिस्थितियों में भी भरोसे को बनाए रखने की विनम्र कला सिखाता है। लेखक ने शास्त्रीय रूप से कहा है कि जब त्रासदी या अस्थिरता आए, तब क्या किया जाए। भजन 11 से 13 तक के भाग में पहले की दुविधाओं के बीच परमेश्वर के हित और न्याय की दृष्टि से सुरक्षा की बात की गई है। यह गाथा विश्वासियों के लिए एक निश्चित संदेश है—धर्म की नींव ईश्वर के तथ्य पर है, न कि बाहरी परिस्थितियों पर।

व्याख्या के बिंदु

  • नींव उखड़ जाने पर भी रिश्ता से आस्था नहीं टूटनी चाहिए; ईश्वर ही स्थिर है।
  • परिस्थितियाँ बदलने से हमारे नैतिक निर्णय नहीं बदलते; धर्मी वही है जो संकट में भी धर्मी रहता है।
  • आह्वान यह है कि मानव की कोशिशें और योजना-रचना, अगर वे नींवें डूब जाएँ, तो परमेश्वर की सत्ता की तुलना में तुच्छ दिखती हैं.

संबंधित अंश और संक्षिप्त व्याख्या

1) भजन 46:1-3 — परमेश्वर हमारे लिए refuge है; भूकंप, बाढ़—कौन निर्माण, कौन गिराता है यह परमेश्वर जानता है; इसलिए साहस बनाए रखें।

2) यशायाह 54:11-12 — विपत्तियों के बीच भी किले की नींव-चिह्न, विश्वासियों का आस्थात्मक निर्माण है; ईश्वर उन्हें नया स्थापत्य देता है।

3) 2 कुरिंथियों 4:8-9 — हर दिशा से दबाव है, परन्तु हार नहीं मानते; दृढ़ रहकर ईश्वर की शक्ति पर निर्भर रहते हैं।

कथन और छोटे निष्कर्ष

  1. परिस्थितियाँ अस्थायी हैं, पर ईश्वर की सत्ता अचल है।
  2. धर्मी की सुरक्षा उसकी आस्था में निहित है, न कि बाहरी स्थिरता में।
  3. विश्वास में गिरते या उठते समय, परमेश्वर के चरित्र पर टिके रहने से जय हो सकती है।

पक्ष-चिन्ह और क्रॉस-रेफरेंसेज के साथ संक्षेप

प्रकाशन यह बताता है कि आस्थावान व्यक्ति विपरीत परिस्थितियों में भी अपने ईश्वर के साथ संबद्ध रहता है; यह भजन अन्य पेटिका-गायन की तरह, स्तंभ-निर्माण की आवश्यकता पर बल देता है।

व्यावहारिक निष्कर्ष

जब जीवन की नींव डगमगाने लगे, तो नीचे ही नहीं, ऊपर भी देखिए—ईश्वर पर विश्वास बनाए रखें। मन की स्थिरता के लिए प्रार्थना, पवित्र शास्त्र का स्मरण और समुदाय के समर्थन से आस्था को सुरक्षित रखें।

उद्धरण-संदर्भ (संकेत): Matthew Henry, Albert Barnes, Adam Clarke के मौलिक उद्धरणों का संक्षेप प्रयोग यहां निर्भर हुआ है; आवश्यक स्थानों में उनके स्पष्ट शब्द साझा किए गए हैं।

*** इस टीका में सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध कुछ प्राचीन और क्लासिक स्रोतों की सामग्री शामिल है। कुछ सामग्री को कृत्रिम बुद्धिमत्ता उपकरणों की सहायता से संसाधित, संक्षिप्त या अनुवादित किया गया हो सकता है। हर व्याख्या को बाइबल के पूरे पाठ और उसके संदर्भ के साथ अवश्य जाँचें। यदि आपको कोई त्रुटि या ऐसा अनुवाद मिले जिसे सुधारने की आवश्यकता हो, तो कृपया हमसे संपर्क करें।

भजन संहिता 11:3 समानांतर पद और संबंधित वचन

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वे न तो कुछ समझते और न कुछ जानते हैं, परन्तु अंधेरे में चलते-फिरते रहते हैं*; पृथ्वी की पूरी नींव हिल जाती है।

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तेरे वंश के लोग बहुत काल के उजड़े हुए स्थानों को फिर बसाएँगे; तू पीढ़ी-पीढ़ी की पड़ी हुई नींव पर घर उठाएगा; तेरा नाम टूटे हुए बाड़े का सुधारक और पथों का ठीक करनेवाला पड़ेगा। विश्रामदिन का पालन करना

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तो भी परमेश्‍वर की पक्की नींव बनी रहती है, और उस पर यह छाप लगी है: “प्रभु अपनों को पहचानता है,” और “जो कोई प्रभु का नाम लेता है, वह अधर्म से बचा रहे।” (नहू. 1:7)

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