भजन संहिता 132:2 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका

उसने यहोवा से शपथ खाई, और याकूब के सर्वशक्तिमान की मन्नत मानी है,

भजन संहिता 132:2 पद-दर-पद बाइबल टीका

सीधे अर्थ का स्पष्ट सार

भजन संहिता 132:2 का मूल भाव है—यहोवा की शपथ लेना और याकूब के परम पूरी शक्ति वाले राज्य के लिए मन्नत मानना। गीतकार यह बताता है कि परमेश्वर के वचन के प्रति दृढ़ निष्ठा और आशीर्वाद पाने के लिए शुक्रगुज़ारी, तेरे परमेश्वर के साथ गठजोड़ की अनुभूति में है। यह शपथ न सिर्फ एक व्यक्तिगत प्रतिज्ञा है, बल्कि एक समुदाय के लिए भी संकेत है कि परमेश्वर अपने चयनित प्रतिनिधि—याकूब और उसके वंशज—∕ राजा-युद्ध के समय में स्थिरता और आश्वासन देते हैं।

पृष्ठभूमि और संदर्भ

यह समूचा भजन परमेश्वर के निवास-स्थल और दयालु राज्य को स्मरण करता है—याकूब के वंशजों के लिए ईश्वर के अनुराग की पुष्टि। पुराने नियम में शपथ लेने और मन्नत मानने की परंपरा का महत्त्व है: एक पग-पकड़ विश्वास, कि परमेश्वर ने अपनी वादा-विधि के अनुसार विकल्प चुने हुए लोगों की सहायता करनी है। यह verse राजा-दरबार के लिए भी प्रेरणा देता है कि वे परमेश्वर के साथ निर्विघ्न सम्बन्ध बनाए रखें।

व्याख्यात्मक अवलोकन

  • यहोवा से शपथ लेना दर्शाता है कि परमेश्वर के उद्देश्य दृढ़ और भरोसेमंद हैं; शपथ में निष्ठा और स्थिरता है।
  • याकूब के “सर्वशक्तिमान” के साथ मन्नत मानना यह स्थापित करता है कि परमेश्वर के आशीर्वाद के लिए प्रार्थना और विश्वास-आचरण अनिवार्य है।
  • यह पाठ परमेश्वर और उसके चुने हुए लोगों के बीच के दायित्व की याद दिलाता है—आशीर्वाद तभी प्राप्त होते हैं जब विश्वास और भक्तिपूर्ण जीवन चलन में रहते हैं।

मूल संदेश की संक्षिप्त सूची

  1. ईश्वर की शपथ पर अडिग विश्वास रखना।
  2. आशीर्वाद के लिए मन्नत और समर्पण आवश्यक है।
  3. जातीय-दीर्घकालिक भागीदारी में परमेश्वर की विश्वसनीयता पर निर्भरता।

क्रॉस-रेफरेंसेज़ और उनका संक्षिप्त अर्थ

1) भोजन, निवास और वचन की प्रतिज्ञा के संदर्भ—उचित आशीर्वाद के लिए परमेश्वर पर दृढ़ विश्वास।

2) ईश्वर के चयनित लोगों के लिए पथ-निर्देशन और सुरक्षा—याकूब के वंशजों के लिए आदर्श सत्ता का आश्वासन।

3) भक्त-याजकों के लिए पवित्रता और कर्तव्य—ईश्वर के साथ दृढ़ सम्बन्ध बनाए रखने की प्रेरणा।

नैतिक और व्यावहारिक takeaway

जब हम परमेश्वर की शपथ के प्रति ईमानदार बने रहते हैं और उसकी मन्नत में दृढ़ रहते हैं, तब हम अपने जीवन-यात्रा में स्थिरता पाते हैं। यह पाठ हमारी prarthana-नीति में विश्वास और समर्पण को प्राथमिकता देता है—परमेश्वर जब स्वीकार कर लेते हैं, तब लोक-कल्याण और राज-सत्ता के लिए आशीर्वाद की दिशा खुलती है।

सूक्ष्म उद्धरण और स्रोत

यदि उपलब्ध हो, कुछ छोटे उद्धरण जोMatthew Henry, Albert Barnes या Adam Clarke से सीधे हैं, तद्नुसार प्रयोग किए जा सकते हैं।

संयुक्त छोड़-जोखिम नहीं

यह commentary सार्वजनिक-डोमेन विचारों के अनुसार समेकित है: परमेश्वर की शपथ और मन्नत—वह एक विश्वसनीय और स्थिर आधार है, जिसे हर सच्चे भक्त को आत्मसात करना चाहिए।

*** इस टीका में सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध कुछ प्राचीन और क्लासिक स्रोतों की सामग्री शामिल है। कुछ सामग्री को कृत्रिम बुद्धिमत्ता उपकरणों की सहायता से संसाधित, संक्षिप्त या अनुवादित किया गया हो सकता है। हर व्याख्या को बाइबल के पूरे पाठ और उसके संदर्भ के साथ अवश्य जाँचें। यदि आपको कोई त्रुटि या ऐसा अनुवाद मिले जिसे सुधारने की आवश्यकता हो, तो कृपया हमसे संपर्क करें।

भजन संहिता 132:2 समानांतर पद और संबंधित वचन

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पर उसका धनुष दृढ़ रहा, और उसकी बाँह और हाथ याकूब के उसी शक्तिमान परमेश्‍वर के हाथों के द्वारा फुर्तीले हुए, जिसके पास से वह चरवाहा आएगा, जो इस्राएल की चट्टान भी ठहरेगा।

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जब राजा अपने भवन में रहता था, और यहोवा ने उसको उसके चारों ओर के सब शत्रुओं से विश्राम दिया था,

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मैं यहोवा के लिये अपनी मन्नतें, सभी की दृष्टि में प्रगट रूप में, उसकी सारी प्रजा के सामने पूरी करूँगा।

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