भजन संहिता 9:18 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका

क्योंकि दरिद्र लोग अनन्तकाल तक बिसरे हुए न रहेंगे, और न तो नम्र लोगों की आशा सर्वदा के लिये नाश होगी।

भजन संहिता 9:18 पद-दर-पद बाइबल टीका

भजन संहिता 9:18 का मुख्य अर्थ

यह पद कहता है कि गरीब और नजीर-नन्हे लोग अंततः अस्मिता से बहरे नहीं रहेंगे; न ही विनम्रों की आशा सदा के लिये नष्ट होगी। परमेश्वर न्याय के समय पर गरीबों की सहायता करेगा और उनके दुखों का अंत करेगा।

पृष्ठभूमि और संदर्भ

भजन 9 एक मलिका-भजन है जिसमें कवि ईश्वरीय न्याय की प्रतिष्ठा करता है। यह दिखाता है कि संसार के अत्याचार और अत्याचारी सत्ता के विरुद्ध भी परमेश्वर का कैदी-न्याय अटल है। भजनकार संकट के बीच विश्वास के धiare को बनाए रखता है: दीन-हीनों के लिये प्रभु चिरकाल तक आश्रय हैं और उनके दुखों का अवसान होगा।

विश्लेषण के मुख्य विचार

  • दयनीय दशाओं में भी ईश्वर का ध्यान: दरिद्र और नम्र लोग भूलने से नहीं, बल्कि उनकी पुकार सुनने से रहते हैं।
  • न्याय की पुनर्स्थापना: समय पर ईश्वर न्याय कर के अन्याय को दूर करेंगे; दीन-दुःखियों की आशा सदा बनी रहती है।
  • अंत की सुरक्षा: नम्रता और निराश्रयता भी परमेश्वर की स्मृति से बाहर नहीं रहती—उनकी आशा स्थिर रहती है।

छोटे से विषयगत निष्कर्ष

  1. ईश्वर दीन-हीनों के समर्थन में है; उनका अनादर नहीं रहता।
  2. आशा की धारणाएँ समय के साथ बदलती नहीं—नम्र लोग भरोसे के साथ जीते हैं।
  3. न्याय के दिन तक प्रार्थना और धैर्य बनाए रखना श्रेष्ठ है।

अन्य प्राचीन टिप्पणीकारों के विचार (संक्षेप)

Matthew Henry, Albert Barnes, और Adam Clarke के समान्निष्ठ विचारों के आलोक में यह भक्ति-संदेश उभरता है: वे मानते हैं कि गरीबों की सहायता और नम्रता ईश्वर के प्रिय justo के संकेत हैं, और वे समय के साथ पूरी तरह से पुण्य-युग में प्राप्त होंगे। यदि कभी तुलनात्मक उद्धरण आवश्यक हो, तो उन्होंने इस प्रकार संकेत किया है कि दीनों के लिए ईश्वर की दया और उद्धार स्थिर है, और न्याय के दिन यह सब प्रकाशित होगा (कहना नहीं पड़े कि क्या शब्द हैं, केवल उनका सार)।

संदर्भ-आधारित cross-references

1) पुरान उद्धार का आश्वासन: दूसरे अध्यायों में न्याय-प्रतीक्षा और चिरकाल की सुरक्षा के बारे में संकेत मिलते हैं।

2) न्याय-प्रतीक्षा के सिद्धांत: स्त्रियों-पुरुषों के विपरीत chauvinism के विरुद्ध, दीन-हीनों के लिए दया और न्याय का स्थाई स्रोत ईश्वर है।

3) नम्रता और आशा: नम्रता की स्थिति में भी आत्म-विश्वास बना रहता है, क्योंकि परमेश्वर उन पर नजर रखता है।

व्यावहारिक निष्कर्ष

हम किन्हीं परिस्थितियों में भी तैयार रहें: जब भी दैहिक कमी, सामाजिक दबाव या अन्याय सामने आये, तब भी प्रभु की रक्षा और न्याय पर भरोसा बनाये रखें। दीन-दरिद्रों के साथ सहानुभूति रखें और नम्रता से मौन न रहें; क्योंकि प्रभु उनकी आवाज सुनते हैं और समय आने पर उनकी सहायता अवश्य करेंगे।

हानि-हानि नहीं, बल्कि शांति और भरोसा एक साथ पल्लवित होते हैं जब हम परमेश्वर के न्याय पर टिके रहते हैं।

*** इस टीका में सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध कुछ प्राचीन और क्लासिक स्रोतों की सामग्री शामिल है। कुछ सामग्री को कृत्रिम बुद्धिमत्ता उपकरणों की सहायता से संसाधित, संक्षिप्त या अनुवादित किया गया हो सकता है। हर व्याख्या को बाइबल के पूरे पाठ और उसके संदर्भ के साथ अवश्य जाँचें। यदि आपको कोई त्रुटि या ऐसा अनुवाद मिले जिसे सुधारने की आवश्यकता हो, तो कृपया हमसे संपर्क करें।

भजन संहिता 9:18 समानांतर पद और संबंधित वचन

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दीन लोगों के लुट जाने, और दरिद्रों के कराहने के कारण, यहोवा कहता है, “अब मैं उठूँगा, जिस पर वे फुँकारते हैं उसे मैं चैन विश्राम दूँगा।”

नीतिवचन 23:18 HINIRV संबंधित बाइबल पद का चित्र
नीतिवचन 23:18 (HINIRV) »
क्योंकि अन्त में फल होगा, और तेरी आशा न टूटेगी।

नीतिवचन 24:14 HINIRV संबंधित बाइबल पद का चित्र
नीतिवचन 24:14 (HINIRV) »
इसी रीति बुद्धि भी तुझे वैसी ही मीठी लगेगी; यदि तू उसे पा जाए तो अन्त में उसका फल भी मिलेगा, और तेरी आशा न टूटेगी।

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