Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीVerse
रोमियों 7:1 रोमियों 7:2 रोमियों 7:3 रोमियों 7:4 रोमियों 7:5 रोमियों 7:6 रोमियों 7:7 रोमियों 7:8 रोमियों 7:9 रोमियों 7:10 रोमियों 7:11 रोमियों 7:12 रोमियों 7:13 रोमियों 7:14 रोमियों 7:15 रोमियों 7:16 रोमियों 7:17 रोमियों 7:18 रोमियों 7:19 रोमियों 7:20 रोमियों 7:21 रोमियों 7:22 रोमियों 7:23 रोमियों 7:24 रोमियों 7:25



रोमियों 7:13—अनुच्छेद का परिचय और संदर्भ
रोमियों 7 अध्याय में पाप और पवित्र व्यवस्था के बीच मनुष्य की आंतरिक लड़ाई पर पवित्र लेखकों का मिश्चित चित्र मिलता है। पॉल बताते हैं कि कैसे ऐतिहासिक कानून और आज्ञाओं के कारण व्यक्ति स्वयं को पाप से मुक्त नहीं समझता, बल्कि पाप की ग़लती से यह उजागर होता है कि पाप के साथ कानून का काम कैसे होता है। वच्न 13 कहता है: “तो क्या वह जो अच्छी थी, मेरे लिये मृत्यु ठहरी? कदापि नहीं! परन्तु पाप उस अच्छी वस्तु के द्वारा मेरे लिये मृत्यु का उत्पन्न करनेवाला हुआ कि उसका पाप होना प्रगट हो, और आज्ञा के द्वारा पाप बहुत ही पापमय ठहरे।” इस वाक्य में पाप की प्रकृति और कानून की भूमिका स्पष्ट होती है: कानून अच्छी चीज है, पर पाप उसे उजागर कर देता है और मृत्यु की दशा पैदा करता है ताकि पाप की महत्ता और कानून की पवित्रता पुरजोर उभर कर सामने आए।
मुख्य अर्थ और केंद्रीय विचार
इस verse में पॉल स्पष्ट करते हैं कि गलती यह नहीं कि कानून बुरा है, बल्कि कानून के द्वारा पाप के असली रंग की पहचान होती है। कानून के कारण ही पाप “बहुत ही पापमय” दिख पड़ता है। यह दार्शनिक-धार्मिक तर्क उस दुविधा को सुलझाता है कि क्या कानून से मृत्यु मिलती है या पाप, जब कानून स्वयं जीवन देता है। यहाँ घटना का सार यह है कि पाप अपनी असुरक्षा और पाखंड को प्रकट करता है ताकि ईश्वर की पवित्रता और कानून की सद्गुण स्पष्ट हों।
2–3 प्रमुख विषय
अन्य उद्धरण और सम्बद्ध पाठ
यथार्थ में, इस विचार को अन्य पुरानी टीकाओं से भी जोड़ा जा सकता है जहाँ: (a) जेम्स 1:14–15 से यह सिद्ध होता है कि इच्छा से उत्पन्न पाप ही मृत्यु को जन्म देता है, (b) गलातियों 3:24–25 कानून को टीचर, मसीह तक पहुंचाने वाला मार्ग बताता है, (c) रोमियों 6:11–14 में पाप के अंगूठे से मुक्त होकर नई जीवनशैली अपनाने की शिक्षा मिलती है। इन संयोजन से स्पष्ट होता है कि कानून और पाप की विन्यास नेत्र-स्थिति में भी परमेश्वर की योजना कैसे काम करती है।
पढ़ने के लिए व्यावहारिक विचार
- अपने भीतर के नियमों और इच्छाओं की पहचान करें: जहाँ चोरी, लालच या ईर्ष्या जैसी प्रवृत्तियाँ उभरें, वहाँ यह मान लें कि कानून सही मार्ग दिखाने वाला है, पर उसे निभाने की हमारी कमी पाप को दिखाती है।
- परमेश्वर की कृपा पर निर्भर रहें: पाप के आत्म-निर्णय के बजाय, ईश्वर की कृपा से ही नये जीवन की प्राप्ति संभव है।
संरचना सार
रोमियों 7:13 विचारनय की कुंजी है कि कानून अच्छी चीज है, पर पाप उसे प्रयोग कर मृत्यु को जन्म देता है ताकि परमेश्वर की पवित्रता और कानून की नैतिकता स्पष्ट हो सके। इसका उद्देश्य यह है कि मनुष्य अपने मौलिक अधूरापन को समझे और मसीह में नई जिंदगी की ओर चले।
छोटा cross-reference लाइन-अप
1) रोमियों 6:11–14: मरण के बाद जीवित जीवन की अनुभूति और पाप से मु़क्ति का व्यावहारिक मार्ग।
2) गलातियों 3:24–25: कानून को टिकाऊ शिक्षक के रूप में देना—मसीह तक पहुँचने का मार्ग।
3) रोमियों 8:3–4: जो देह के अनुसार नहीं, बल्कि आत्मा के अनुसार चलते हैं, उन्हें जीवन मिलता है—कानून का सही परिणाम।
वरिष्ठ टीका से सार: एब्नेटिक विचारों के अनुसार, मैथ्यू हेनरी, आल्बर्ट बर्न्स और एडम् क्लार्क के उद्धरण अगर आवश्यक हों, तो उन्हें संक्षेप में इस्तेमाल किया जा सकता है।
उद्धृत छोटे अंश (यदि उपयोग हो):
“The law is holy, and the commandment holy, and just, and good.” (उद्धृत विचार-वाक्य संदर्भ के रूप में उपयोग हो सकता है; वास्तविक पाठ से छोटा अंश)
समाप्तियाँ: पवित्रता की राह में कानून एक मार्गदर्शक है, परन्तु हमारे भीतर के पापी प्रवृत्तियों को पहचानने का उपकरण भी है। परमेश्वर की कृपा से ही हम नवजीवन में प्रवेश करते हैं।