Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीVerse
रोमियों 7:1 रोमियों 7:2 रोमियों 7:3 रोमियों 7:4 रोमियों 7:5 रोमियों 7:6 रोमियों 7:7 रोमियों 7:8 रोमियों 7:9 रोमियों 7:10 रोमियों 7:11 रोमियों 7:12 रोमियों 7:13 रोमियों 7:14 रोमियों 7:15 रोमियों 7:16 रोमियों 7:17 रोमियों 7:18 रोमियों 7:19 रोमियों 7:20 रोमियों 7:21 रोमियों 7:22 रोमियों 7:23 रोमियों 7:24 रोमियों 7:25



रोमियों 7:4 का संदर्भ और संदर्भ संसार
पद का मूल अर्थ यह है कि ईसाई बनने के बाद मसीह की देह के द्वारा हमने व्यवस्था के लिए मरे हुए बनकर हालात बदले हैं। पुराने नियम के अधीन रहने की पूरी व्यवस्था अब हमारे लिए नहीं है, क्योंकि मसीह ने उस बुराई-शासन को समाप्त कर दिया है, ताकि हम परमेश्वर के लिए नई जिंदगी की फलप्रदता ला सकें। इस पवित्र परिवर्तन का उद्देश्य यह है कि हम पवित्र आत्मा की दिशा में चले और प्रभु के लिये फलों की वृद्धि करें।
मुख्य भावार्थ
यह पद बताता है कि जिस प्रकार विवाह-बंधन के रहते दो पक्ष एक दूसरे से जुड़ते हैं, वैसे ही क्राइस्ट की देह के द्वारा हम व्यवस्था के दाय से मुक्त होकर परमेश्वर के विषय बन जाते हैं। मसीह के साथ "गूंथे हुए" इस संबंध से हमारे पुराने नियम के अंदर रहने की जगह खत्म हो जाती है, ताकि हम नई शक्ति और नए उद्देश्य के साथ जीएं और परमेश्वर के लिए फल दें।
तीन प्रमुख विषय
संबद्ध बिचार
पहले, मसीह की मृत्यु और पुनरुत्थान के संदर्भ में, व्यापक दृष्टिकोण यह समझाता है कि कैसे भक्त पुराने इच्छाओं के शासन से मुक्त होते हैं और नई सुगमता के साथ परमेश्वर के साथ रहते हैं (देखिए रोमियों 6 के अंत और गालातियों 2:20 जैसे विचार). इंडेक्स नोट: यह verses एक साथ मिलकर जीवन की नई दिशा का मार्ग दिखाते हैं।
किए जाने वाले उपयोगी cross-references
- रोमियों 6:4: बपतिस्मा के साथ संबद्धता—हम मसीह के साथ मरे और जी उठे, ताकि नई जिंदगी जिएं।
- गलातियों 2:20: क्राइस्ट के साथ संयुक्त जीवन की वास्तविकता—अब मैं नहीं, पर मसीह मुझमें जीवित है।
- कोलोसियों 3:1-3: ऊपर के चीज़ों पर केंद्रित जीवन; आप स्वयं जीते नहीं, बल्कि मसीह जीते हैं।
व्यावहारिक चिंतन
व्यावहारिक तौर पर यह verse सिखाता है कि व्यवहार, दृष्टिकोण और उद्देश्य कैसे बदलना है। जीवन के रोजमर्रा के निर्णय—जो पहले आत्म-स्वार्थ या व्यवस्था के नियमों से प्रेरित होते थे—अब परमेश्वर की प्राप्ति के लिए होते हैं। आत्मा की सहायता से, हम प्रेम, क्षमा और नम्रता जैसे फलों को विकसित कर सकते हैं, ताकि परमेश्वर की महिमा बढ़े।
संक्षिप्त निष्कर्ष
रोमियों 7:4 से यह स्पष्ट होता है कि मसीह के साथ हमारा संबंध हमारी पूर्व व्यवस्था से मुक्त कर देता है और हमें परमेश्वर के लिए फल-पूर्ण जीवन जीने की ओर ले जाता है। यह नया जीवन, आत्मा की सहायता से, हमें ईश्वर-केन्द्रित बनाता है और हमारे हर दिन के कदमों को सत्य और प्रेम के मार्ग पर मार्गदर्शित करता है।
महत्वपूर्ण उद्धरण (हिस्टोरिकल पार्श्वभूमि): इस अनुभाग में Matthew Henry, Albert Barnes और Adam Clarke के संबद्ध विचारों से संकलित धाराएँ एकीकृत की गई हैं।