रोमियों 7:15 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका

और जो मैं करता हूँ उसको नहीं जानता, क्योंकि जो मैं चाहता हूँ वह नहीं किया करता, परन्तु जिससे मुझे घृणा आती है, वही करता हूँ।

पिछला पद
« रोमियों 7:14
अगला पद
रोमियों 7:16 »

रोमियों 7:15 पद-दर-पद बाइबल टीका

रोमियों 7:15 का निहितार्थ: inward संघर्ष और आत्म-स्वीकृति

मुख्य व्याख्यात्मक बिंदु: पवित्रता के अंदर जन्म लेने वाले प्रत्यक्ष संघर्ष का स्पष्ट चित्र रोमियों 7 में दर्शाया गया है। पापी प्रकृति के साथ हमारा आंतरिक टकराव इस भली-भली इच्छा-शुद्धता के लिए संघर्ष दिखाता है, जिसमें पवित्र आत्मा द्वारा उद्धार की आवश्यकता और अबोद्ध मार्ग का जागरण है। इस आयत में प्रेरित पॉल बतलाते हैं कि जो मैं करना चाहता हूँ वह मैं करता नहीं, बल्कि जो मुझे घृणा है वही मैं करता हूँ—यह एक व्यक्ति-स्वरूप शास्त्रीय संघर्ष है, जिसे केवल बपतिस्मा के बाद चलने वाले जीवन में चिरस्थाई विजय संभव बनाते हैं।

पाठ-संबद्ध साहित्यिक संदर्भ

रोमियों 7 में पॉल ने एक पारदर्शी आंतरिक नाटक दिखाया है: कानून के भीतर होने पर भी, उसकी आत्मिक नई रोशनी और पुरानी प्रकृति के बीच संघर्ष बना रहता है। यह दृश्य स्पष्ट करता है कि परमेश्वर के ग्रंथ और पापी प्रवृत्ति की डगर एक साथ नहीं चल सकती। 7 अध्याय के अंत में उद्धार की आशा और 8 अध्याय की आत्मा से जीवन की अधिक स्पष्टता मिलती है।

धर्मशास्त्रीय महत्त्व

यह आयत यह बताती है कि ईश्वर के कानून के तात्पर्य से परे, मानव की नई जन्म-स्थिति के बिना पाप से पूर्ण छुटकारा नहीं मिलता। पॉल कृतज्ञता, लाचारी और इच्छा के बीच के अंतर को रेखांकित करते हैं—यही संतप्त निवारण परमेश्वर की कृपा से संभव होता है।

खर्चे सम्बन्धी शोध-सम्बद्ध

यहाँ कुछ प्रमुख विचारधाराएँ संक्षेप में:

  • आत्म-साक्षात्कार: मानव की अंतःकरण स्थिति पाप के तंतु से त्रस्त है, परन्तु नई जीवन की आशा निष्काम है।
  • कानून-आस्था धारा: कानून हमारे भीतर पाप की प्रकृति को प्रकट करता है; उद्धार के लिए नया जीवन आवश्यक है।

क्रॉस-रेफरेंसेस और अर्थ-जोड़

- गलातियों 5:17 — आत्मा और शरीर के बीच संघर्ष का सामान्य प्रतिबिंब; त्योहार के अंत में जीवन का विनम्र अनुभव।

- यीशु के वरदान का स्वाद: रोमियों 8 के आरम्भिक स्थिति में श्वास-फेफड़े जैसी आत्मा-जीवन की चपलता जो 7 के संघर्ष को खोज से दूर कर देता है।

-箴क 20:9 के संदर्भ में भी, व्यक्ति-स्वीकृति और पाप के बंधन से मुक्ति की जरुरत पर बल दिया गया है।

विचार-विमर्श के प्रश्न

- क्यों हमें पाप के विरुद्ध लड़ना पड़ता है, भले ही हम नया जन्म पा चुके हों?
- क्या मैं अपने भीतर के युद्ध को ईश्वर की कृपा के साथ समझता/समझती हूँ?
- उद्धारकर्ता कौन हैं जो इस संघर्ष में स्थायी विजय दिलाते हैं?

समापन सार

रोमियों 7:15 हमें दिखाता है कि ईमानदार विश्वासी के भीतर एक हकीकत है: आत्म-स्वीकृति और नैतिक परिप्रेक्ष्य में निरंतर संघर्ष; परन्तु इसी संघर्ष के भीतर परमेश्वर की दया और उद्धार की योजना सामने आती है। पूर्ण स्वतंत्रता केवल प्रभु यीशु मसीह के जीवित जीवन से मिलती है, जो हमारे भीतर नया जीवन डालते हैं और पवित्र आत्मा के द्वारा चालित करते हैं।

महत्वपूर्ण उद्धरण (आधार-वार्ताओं से)

Adam Clarke के समान विचारधारा के प्रकाश में कथा-भाव का सार अभी भी वैसा है: प्राकृतिपरक बाधाओं के बीच मानवीय अस्मिता, और परमेश्वर की कृपा-उद्धार की उम्मीद स्थिर रहती है।

Matthew Henry और Albert Barnes के सार भी इस आयत के भीतर यह दर्शाते हैं कि पाप के साथ संघर्ष व्यक्ति-जीवन का अंग है, पर उद्धार के लिए नया जन्म और परमेश्वर के स्तर की सहायता अवश्य है.

*** इस टीका में सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध कुछ प्राचीन और क्लासिक स्रोतों की सामग्री शामिल है। कुछ सामग्री को कृत्रिम बुद्धिमत्ता उपकरणों की सहायता से संसाधित, संक्षिप्त या अनुवादित किया गया हो सकता है। हर व्याख्या को बाइबल के पूरे पाठ और उसके संदर्भ के साथ अवश्य जाँचें। यदि आपको कोई त्रुटि या ऐसा अनुवाद मिले जिसे सुधारने की आवश्यकता हो, तो कृपया हमसे संपर्क करें।

रोमियों 7:15 समानांतर पद और संबंधित वचन

उन बाइबल पदों को देखें जो विषय, शिक्षा या संदर्भ के आधार पर इस अंश से जुड़े हैं। समानांतर पदों की तुलना करने से इस वचन के संदर्भ और संदेश को अधिक गहराई से समझने में सहायता मिलती है। किसी चित्र को चुनें और संबंधित पद, उसकी व्याख्या तथा पद-दर-पद बाइबल टीका देखें।

गलातियों 5:17 HINIRV संबंधित बाइबल पद का चित्र
गलातियों 5:17 (HINIRV) »
क्योंकि शरीर आत्मा के विरोध में* और आत्मा शरीर के विरोध में लालसा करता है, और ये एक दूसरे के विरोधी हैं; इसलिए कि जो तुम करना चाहते हो वह न करने पाओ।

सभोपदेशक 7:20 HINIRV संबंधित बाइबल पद का चित्र
सभोपदेशक 7:20 (HINIRV) »
निःसन्देह पृथ्वी पर कोई ऐसा धर्मी मनुष्य नहीं जो भलाई ही करे और जिससे पाप न हुआ हो। (रोमि 3:10)

नहूम 1:7 HINIRV संबंधित बाइबल पद का चित्र
नहूम 1:7 (HINIRV) »
यहोवा भला है; संकट के दिन में वह दृढ़ गढ़ ठहरता है, और अपने शरणागतों की सुधि रखता है।

HINIRV बाइबल की पुस्तक चुनें