जकर्याह 6:13 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका

वही यहोवा के मन्दिर को बनाएगा, और महिमा पाएगा, और अपने सिंहासन पर विराजमान होकर प्रभुता करेगा*। और उसके सिंहासन के पास एक याजक भी रहेगा, और दोनों के बीच मेल की सम्मति होगी।' (यशा. 11:10)

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जकर्याह 6:13 पद-दर-पद बाइबल टीका

संदेश का संक्षेप अर्थ

यह वचन यह बताता है कि भविष्य में वही शख्स—जिसे मसीह या रज्ज़ू-नाश के आशय से समझा जाता है—यहोवा के मंदिर का निर्माण करेगा, उसकी महिमा होगी, वह सिंहासन पर बैठकर प्रभुत्व करेगा और उसके साथ एक याजक भी होगा; याजक और शासक के बीच सामञ्जस्य बनेगा। यह वचन न्याय, पूजा और राज्य के सामंजस्य का चित्र प्रस्तुत करता है।

प्रसंगिक पृष्ठभूमि

जकर्याह की पुस्तक लौटे हुए यहूदियों के समय के भविष्यदर्शी वचनों का संग्रह है। अध्याय 6 में द्रुत-गति वाले चित्र और मसीही आशाएँ मिलती हैं। यहाँ उद्धृत श्लोक (यशायाह 11:10 के संदर्भ सहित) उस आने वाली शख्सियत की ओर संकेत करता है जो परमेश्वर की ओर से सत्य, न्याय और पूजा को स्थापित करेगा। यह वादा विशेषकर नगर और मंदिर के नवीनीकरण तथा शासन और धर्म के बीच सामंजस्य की आशा से जुड़ा है।

व्याख्यात्मक विचार

1) "वही यहोवा के मन्दिर को बनाएगा" — यह बताता है कि मसीह ही सच्चा निर्माता और संस्थापक है; वह आध्यात्मिक और ऐतिहासिक पुनर्निर्माण दोनों का कारण बनेगा।

2) "और महिमा पाएगा" — महिमा का अर्थ दिव्य प्रतिष्ठा और प्रशंसा है; मसीह का राज्य परमेश्वरीय महिमा के साथ होगा।

3) "अपने सिंहासन पर विराजमान होकर प्रभुता करेगा" — यह राजनीतिक और धार्मिक प्रभुत्व दोनों की ओर इशारा करता है; न्याय, शांति और सत्ता का स्थायी शासन।

4) "और उसके सिंहासन के पास एक याजक भी रहेगा" — याजक का होना धार्मिक दर्शन की पुष्टि है: पूजा और कानून की सेवा जारी रहेगी; याजक का स्थान दर्शाता है कि धर्म और राज्य अलग नहीं बल्कि सहायक होंगे।

5) "दोनों के बीच मेल की सम्मति होगी" — यह वाक्यांश निर्णायक है; यह बताता है कि भविष्य में धर्म और शासन विरोधी नहीं होंगे, बल्कि एक दूसरे के साथ सहयोग कर लोगों के भले के लिए काम करेंगे।

थीमैटिक सूची

  • निर्माण और पुनर्निर्माण — मंदिर का भौतिक और आत्मिक नवजीवन
  • दिव्य महिमा — मसीह की प्रतिष्ठा और प्रभुता
  • राज्य और पूजा का संयोजन — धार्मिक और राजनैतिक दायित्वों का समन्वय

संबंधित पद और संक्षिप्त व्याख्या

यशायाह 11:10 — यहाँ वही शख्स जिस पर जनसमूह आशा लगाएगा, एक धरा और वंश से सम्बन्धित संकेत के साथ प्रस्तुत होता है; दोनों स्थानों में मसीही शासन और उपलब्धि का वचन मिलता है।

मत्ती 5:17 — यीशु का विधान और मंदिर-पूजा के प्रति दृष्टिकोण; यह दर्शाता है कि पूरा किया जाना और नए नियमों के साथ सम्बन्ध को समझना आवश्यक है।

भजन संहिता 110:4 — राज और याजकत्व के बीच सम्बन्ध का एक अन्य संकेत जहाँ मसीह "याजक-राजा" के रूप में संदर्भित होता है, जो यहाँ के मेल के विचार से अनुकूल है।

सारांश और व्यावहारिक निष्कर्ष

जकर्याह 6:13 का मूल संदेश आशा और सामञ्जस्य का है: परमेश्वर का चुना हुआ शासक न सिर्फ राज करेगा बल्कि धर्म और पूजा में भी केन्द्र होगा, और दोनों के बीच समन्वय से न्याय और शांति कायम होगी। हमारे लिए प्रासंगिक रूप से यह सिखाता है कि सच्चा नेतृत्व धर्मपरकता और सार्वजनिक भले दोनों को महत्व देता है। आज के संदर्भ में, यह वचन नेताओं और समुदायों को यह चुनौती देता है कि वे आध्यात्मिक सत्य और सामाजिक जिम्मेदारी के बीच सामंजस्य स्थापित करें।

प्राचीन टीकों से संक्षिप्त उद्धरण

मैथ्यू हेनरी के शब्दों में — "He shall build the temple and shall sit and reign upon his throne" का संक्षेप भाव यह बताता है कि मसीह का कार्य निर्माण और शासन दोनों है।

अल्बर्ट बार्न्स ने लिखा है कि याजक और राजा का साथ परमेश्वरीय व्यवस्था की शांति और न्याय का संकेत है।

*** इस टीका में सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध कुछ प्राचीन और क्लासिक स्रोतों की सामग्री शामिल है। कुछ सामग्री को कृत्रिम बुद्धिमत्ता उपकरणों की सहायता से संसाधित, संक्षिप्त या अनुवादित किया गया हो सकता है। हर व्याख्या को बाइबल के पूरे पाठ और उसके संदर्भ के साथ अवश्य जाँचें। यदि आपको कोई त्रुटि या ऐसा अनुवाद मिले जिसे सुधारने की आवश्यकता हो, तो कृपया हमसे संपर्क करें।

जकर्याह 6:13 समानांतर पद और संबंधित वचन

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