Old Testament
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1 कुरिन्थियों 15:1 1 कुरिन्थियों 15:2 1 कुरिन्थियों 15:3 1 कुरिन्थियों 15:4 1 कुरिन्थियों 15:5 1 कुरिन्थियों 15:6 1 कुरिन्थियों 15:7 1 कुरिन्थियों 15:8 1 कुरिन्थियों 15:9 1 कुरिन्थियों 15:10 1 कुरिन्थियों 15:11 1 कुरिन्थियों 15:12 1 कुरिन्थियों 15:13 1 कुरिन्थियों 15:14 1 कुरिन्थियों 15:15 1 कुरिन्थियों 15:16 1 कुरिन्थियों 15:17 1 कुरिन्थियों 15:18 1 कुरिन्थियों 15:19 1 कुरिन्थियों 15:20 1 कुरिन्थियों 15:21 1 कुरिन्थियों 15:22 1 कुरिन्थियों 15:23 1 कुरिन्थियों 15:24 1 कुरिन्थियों 15:25 1 कुरिन्थियों 15:26 1 कुरिन्थियों 15:27 1 कुरिन्थियों 15:28 1 कुरिन्थियों 15:29 1 कुरिन्थियों 15:30 1 कुरिन्थियों 15:31 1 कुरिन्थियों 15:32 1 कुरिन्थियों 15:33 1 कुरिन्थियों 15:34 1 कुरिन्थियों 15:35 1 कुरिन्थियों 15:36 1 कुरिन्थियों 15:37 1 कुरिन्थियों 15:38 1 कुरिन्थियों 15:39 1 कुरिन्थियों 15:40 1 कुरिन्थियों 15:41 1 कुरिन्थियों 15:42 1 कुरिन्थियों 15:43 1 कुरिन्थियों 15:44 1 कुरिन्थियों 15:45 1 कुरिन्थियों 15:46 1 कुरिन्थियों 15:47 1 कुरिन्थियों 15:48 1 कुरिन्थियों 15:49 1 कुरिन्थियों 15:50 1 कुरिन्थियों 15:51 1 कुरिन्थियों 15:52 1 कुरिन्थियों 15:53 1 कुरिन्थियों 15:54 1 कुरिन्थियों 15:55 1 कुरिन्थियों 15:56 1 कुरिन्थियों 15:57 1 कुरिन्थियों 15:58



1 कुरिन्थियों 15:36 — तत्कालीन संदर्भ से उद्घाटन
पवित्र लेख बताता है कि जो बीज बोया जाता है वह पहले निर्जीव होता है; उसे उगाने के लिए मृत्यु जैसी अवस्था चाहिए। apostle पॉल यहाँ मृत-जीवन के चक्र को दिखाते हैं: जो बीज रमणीय रूप से बोया गया है, वह मिट्टी में डालने पर पौधा बनता है। यह संदर्भ मृत्यु के बाद जीवन की आशा को स्थापित करता है, ताकि विश्वासी यह समझ सके कि ईश्वर का उद्धारकार्य देह के पुनरुत्थान के बिना पूर्ण नहीं हो सकता।
ईश्वरीय सत्य के बारे में पाठ की पुष्टि
इस वचन में जेसी केकदा दृश्यता है: जो बोया जाता है वह मरा हुआ नहीं होता; वह बीज है जो पहले नश्वर है, फिर अदृश्य जीवन के रूप में उठता है। यह दृश्य सदैव पुनरुत्थान के आश्वासन से जुड़ा है: देह-जीवन की स्थिति में वृद्धि तभी सम्भव है जब वह पहले मृत्यु के अंधकार से गुजरती है। यह ईमानदारी से बताता है कि ईश्वर का योजना कैसे निर्बुद्धि के नियंत्रण से बाहर है और वह देह को पुनःजीवन देता है।
महत्वपूर्ण शब्दों और चित्रों की व्याख्या
अन्य उपयुक्त गवाहीपूर्ण आयतें
Cross-reference 1: रोमियों 8:11 — आत्मा के जीवित करे जाने की शक्ति के संदर्भ में पुनरुत्थान का अनुमान।
Cross-reference 2: वह विषय जो 1 कुरिन्थियों 15 के संपूर्ण अध्याय में पुनरुत्थान की आवाजाही को स्पष्ट करता है—यानी मरे हुए से जीवन और जीवित देह का पुनःउत्थान।
Cross-reference 3: जन्म 3:19-20 — शरीर के नाश और शरद ऋतु जैसी मृत्यु के बाद जीवन की संभावना के संकेत।
पाठ से प्रेरित आज का अनुप्रयोग
हमारे जीवन में जो कुछ हमने ईश्वर के लिए त्याग दिया है, वह क्षण भर की कमी नहीं है; यह भविष्य के जीवन के खेत में एक बीज है। कठिनाइयों, परीक्षाओं या खुशियों के समय भी हमें विश्वास रखना चाहिए कि ईश्वर की योजना से हर बोया गया बीज एक दिन पुनःजीवन प्रदान करेगा। यह विचार उन लोगों के लिए विशेष रूप से सत्य है जो ईसाई जीवन के फूलने के समय अर्द्धविश्वास से गुजरते हैं—यह विचार उन्हें धैर्य और उत्साह देता है कि भगवान अपने समय-निर्णय में उपज देगा।
प्रसंग-सार और समेकन
1 कुरिन्थियों 15:36 के माध्यम से पॉल हमें यह स्पष्ट करते हैं कि प्रभु की योजना देह के मरने के बाद भी शक्ति का स्रोत है—पुनरुत्थान की आशा। यह संदेश न केवल शब्दों के भीतर है, बल्कि व्यवहारिक जीवन में भी है: हर त्याग, हर आस्था का बीज एक दिन जीवन के रूप में उगेगा।
योगदानातीत उद्धरण (केवल संकलन के लिए):
Matthew Henry, Albert Barnes, और Adam Clarke के सार्वजनिक-डोमेन टिप्पणी-संग्रहों से इस पाठ के लिए उनके संक्षिप्त विचारों के शब्द-रेखाएं उद्धृत नहीं की गईं, किन्तु उनका समन्वित मानक अंतर्दृष्टि—बीज के मरकर पुनरुत्थान की कथा, और विश्वास के बीज के फलने-फूलने की व्याख्या—हमारे सार में अभिन्न रूप से समाहित है।