Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीVerse
1 कुरिन्थियों 15:1 1 कुरिन्थियों 15:2 1 कुरिन्थियों 15:3 1 कुरिन्थियों 15:4 1 कुरिन्थियों 15:5 1 कुरिन्थियों 15:6 1 कुरिन्थियों 15:7 1 कुरिन्थियों 15:8 1 कुरिन्थियों 15:9 1 कुरिन्थियों 15:10 1 कुरिन्थियों 15:11 1 कुरिन्थियों 15:12 1 कुरिन्थियों 15:13 1 कुरिन्थियों 15:14 1 कुरिन्थियों 15:15 1 कुरिन्थियों 15:16 1 कुरिन्थियों 15:17 1 कुरिन्थियों 15:18 1 कुरिन्थियों 15:19 1 कुरिन्थियों 15:20 1 कुरिन्थियों 15:21 1 कुरिन्थियों 15:22 1 कुरिन्थियों 15:23 1 कुरिन्थियों 15:24 1 कुरिन्थियों 15:25 1 कुरिन्थियों 15:26 1 कुरिन्थियों 15:27 1 कुरिन्थियों 15:28 1 कुरिन्थियों 15:29 1 कुरिन्थियों 15:30 1 कुरिन्थियों 15:31 1 कुरिन्थियों 15:32 1 कुरिन्थियों 15:33 1 कुरिन्थियों 15:34 1 कुरिन्थियों 15:35 1 कुरिन्थियों 15:36 1 कुरिन्थियों 15:37 1 कुरिन्थियों 15:38 1 कुरिन्थियों 15:39 1 कुरिन्थियों 15:40 1 कुरिन्थियों 15:41 1 कुरिन्थियों 15:42 1 कुरिन्थियों 15:43 1 कुरिन्थियों 15:44 1 कुरिन्थियों 15:45 1 कुरिन्थियों 15:46 1 कुरिन्थियों 15:47 1 कुरिन्थियों 15:48 1 कुरिन्थियों 15:49 1 कुरिन्थियों 15:50 1 कुरिन्थियों 15:51 1 कुरिन्थियों 15:52 1 कुरिन्थियों 15:53 1 कुरिन्थियों 15:54 1 कुरिन्थियों 15:55 1 कुरिन्थियों 15:56 1 कुरिन्थियों 15:57 1 कुरिन्थियों 15:58



1 कुरिन्थियों 15:27 — तत्कालीन संदर्भ और उद्देश्य
इस पद का संकल्पना केंद्र परमेश्वर के प्रभुत्व की पूर्णता है। जिस संदर्भ में प्रेरित पवित्रशास्त्री पवित्र आत्मा द्वारा लिखा गया है, वह ये बताता है कि सब कुछ परमेश्वर के अधीन कर दिया गया है—परन्तु यह निर्देश भी स्पष्ट करता है कि जो सब कुछ मसीह के अधीन कर दिया गया है, वही कुल मिलाकर परमेश्वर का राज्यमतत्व है। भजन 8:6 के संदर्भ के साथ यह विचार प्रकट होता है कि ईश्वर ने सृष्टि की कान्ति नियंत्रण के दायरे में रखा है; परन्तु यह भी है कि पाप के परिणामों के कारण संसार एक अस्थिरता का अनुभव कर रहा है, जिसे मसीह के द्वारा पुनः व्यवस्थित किया जाना है।
कथा-वस्तु से स्पष्ट जो समझ मिले
यह वाक्य स्पष्ट करता है कि परमेश्वर ने सारी चीजों को क्रमबद्ध और नियंत्रण में रखा है, ताकि सब कुछ मसीह के अधीन होकर पिता के उद्देश्य को पूरा करे। उसी क्रम में मसीह, जो सम्पूर्ण विश्व के उद्धारकर्ता हैं, इस योजना की केन्द्र बिंदु हैं। यह दृढ़ता हमें यह सिखाती है कि विश्वासियों के लिए सत्ता-बंधन और नियति का सार परमेश्वर के हाथों में है; हमारी जिम्मेदारी है कि हम मसीह के क्रिया-कलापों के भीतर अपनी भूमिका को मानें और उसके सामर्थ्य को स्वीकार करें।
महत्वपूर्ण शब्दों और चित्रों की व्याख्या
अन्य सम्बन्धित आयतें
इन आयतों के साथ समझ मजबूत होती है:
ये संदर्भ एक ही धागे को बताते हैं: ईश्वर की योजना में मसीह केंद्रीय है; हमारी आस्था उसी में स्थित है, और संसार की परिवर्तनशीलता के बीच भी आशा बनी रहती है।
आज का अनुप्रयोग
हम अखंडित स्थिति में अपने जीवन का संचालन करते हैं, साथ ही यह याद रखते हैं कि परमेश्वर ने सब कुछ मसीह के अधीन कर दिया है। इसका अर्थ है- हमारा मन, विचार, निर्णय और व्यवहार शांति से ईश्वर के शासन के अनुरूप ढालना। कठिन समय में भी आशा बनी रहे क्योंकि क्राइस्ट की स्थिति के अनुसार सब कुछ चल रहा है। ऐसे में हम निम्नलिखित अभ्यास अपनाएं:
हमारे पथ-चिह्न में एक संतुलन बना रहे: प्रभु के पूर्ण नियंत्रण को मानना, परन्तु अपने जीवन में ईश्वर की योजना के अनुरूप सक्रिय सहभागिता भी जारी रखना—यही वह जीवन है जो मसीह के अधीन हो कर भी स्वतंत्र, विश्वास-प्रधान और आशावान रहता है।
महत्वपूर्ण उद्धरण-नोट: इस पाठ के लिए ऐतिहासिक चर्च-तत्वों से प्रेरित विचार-रेखा का संक्षेप प्रस्तुत किया गया है, जिसमें मैथ्यू हेन्री, एल्बर्ट बार्न्स और एडम क्लार्क के सार्वजनिक-डायरेक्ट टिप्पणी-भाव पर आधारित संकेत मित-से-सीधे नहीं उद्धृत हैं, पर उनके विचारों से प्रेरणा ली गई है।