Old Testament
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1 कुरिन्थियों 15:1 1 कुरिन्थियों 15:2 1 कुरिन्थियों 15:3 1 कुरिन्थियों 15:4 1 कुरिन्थियों 15:5 1 कुरिन्थियों 15:6 1 कुरिन्थियों 15:7 1 कुरिन्थियों 15:8 1 कुरिन्थियों 15:9 1 कुरिन्थियों 15:10 1 कुरिन्थियों 15:11 1 कुरिन्थियों 15:12 1 कुरिन्थियों 15:13 1 कुरिन्थियों 15:14 1 कुरिन्थियों 15:15 1 कुरिन्थियों 15:16 1 कुरिन्थियों 15:17 1 कुरिन्थियों 15:18 1 कुरिन्थियों 15:19 1 कुरिन्थियों 15:20 1 कुरिन्थियों 15:21 1 कुरिन्थियों 15:22 1 कुरिन्थियों 15:23 1 कुरिन्थियों 15:24 1 कुरिन्थियों 15:25 1 कुरिन्थियों 15:26 1 कुरिन्थियों 15:27 1 कुरिन्थियों 15:28 1 कुरिन्थियों 15:29 1 कुरिन्थियों 15:30 1 कुरिन्थियों 15:31 1 कुरिन्थियों 15:32 1 कुरिन्थियों 15:33 1 कुरिन्थियों 15:34 1 कुरिन्थियों 15:35 1 कुरिन्थियों 15:36 1 कुरिन्थियों 15:37 1 कुरिन्थियों 15:38 1 कुरिन्थियों 15:39 1 कुरिन्थियों 15:40 1 कुरिन्थियों 15:41 1 कुरिन्थियों 15:42 1 कुरिन्थियों 15:43 1 कुरिन्थियों 15:44 1 कुरिन्थियों 15:45 1 कुरिन्थियों 15:46 1 कुरिन्थियों 15:47 1 कुरिन्थियों 15:48 1 कुरिन्थियों 15:49 1 कुरिन्थियों 15:50 1 कुरिन्थियों 15:51 1 कुरिन्थियों 15:52 1 कुरिन्थियों 15:53 1 कुरिन्थियों 15:54 1 कुरिन्थियों 15:55 1 कुरिन्थियों 15:56 1 कुरिन्थियों 15:57 1 कुरिन्थियों 15:58

reader-friendly overview
1 कुरिन्थियों 15:39 बताता है कि पृथ्वी पर हर प्रकार का जीव अलग-अलग प्रकृति और संरचना का है। पौधे, पशु, पक्षी और मछली—हर एक का शरीर अपनी वही क्षमता और उद्देश्य दिखाता है। पौष्टिक रूप से यह वचन हमारे विश्वास को यह सिखाता है कि परमेश्वर ने जीवों को विविधता के साथ बनाकर विविध कार्यों के लिए तैयार किया है, ताकि प्रभु के निर्माण की विशालता प्रकट हो।
verse के संदर्भ में पाठ-समझ
इस पंक्ति में पवित्र लेखन बताता है कि “सब शरीर एक समान नहीं”—यानी हर शरीर एक ही प्रकार का नहीं, बल्कि अलग-अलग प्रकारों के शरीर हैं। मनुष्य का शरीर, पशुओं का, पक्षियों का और मछलियों का—ये सभी अलग-अलग संरचना और क्षमताओं के साथ हैं। इसका उद्देश्य यह है कि निकट भविष्य में पुनरुत्थान के शरीर की विविधता और प्रभु की योजना का एक सूचित संकेत मिले।
मुख्य आध्यात्मिक पाठ
यह शिक्ष देती है कि ईश्वर ने संसार को विविधता देकर उसकी सामंजस्यपूर्ण व्यवस्था स्थापित की है। विश्वासियों के लिए भी यह समान विचार देता है—हर एक विभाग, प्रत्येक कद, प्रत्येक उपस्थिति—मंदिर के अंगों की तरह एक दूसरे के साथ कार्य करते हैं। जीवन-संरचना में विविधता से हम यह सीखते हैं कि परमेश्वर का उद्देश्य सभी को एक साथ, एक धुन पर चलता देखना है।
अनुरूप तुलनात्मक विचार
- रोमियों 12:4-5 में कहा गया है कि शरीर एक है, पर उसमें अनेक सदस्य हों—हर सदस्य अपने-अपने कार्यों के साथ।
- यहereum 1:20-21 बताती है कि उसी प्रकार ईश्वर ने सब वस्तुओं को एक धारी में बाँध रखा है ताकि विश्वासियों की विविधता में एकता बने।
- याकूब 1:18 में प्रविष्टि है कि परमेश्वर ने हमें सत्य के द्वारा जन्म दिया, ताकि हम उसके जीवित अंग बनें—जो हमारे भीतर विविध जीवन-उत्पत्ति दिखाते हैं।
कई समानार्थी पाठ की छोटी समीपता
1) मुख्य संदेश: हर शरीर की विशिष्ट संरचना—मनुष्य, पशु, पक्षी, मछली—ईश्वर की विविध क्रियाओं का भाग हैं।
2) पुनरुत्थान की आशा: सारी सृष्टि के विविध रूप मिलकर एक दिव्य योजना का भाग बनाते हैं।
व्यावहारिक अनुप्रयोग
क्रॉस-रेफरेंसेस और उनके संक्षिप्त स्पष्टीकरण
- रोम 12:4-5: शरीर एक है, पर अनेक सदस्य; हर सदस्य अपने कार्य से समुदाय को जोड़ता है।
- 1 कॉरिंथ 12:12-14: शरीर कई अंगों से बना है, पर सभी एक ही आत्मा के द्वारा जुड़ा है।
- याकूब 1:18: परमेश्वर ने सत्य के द्वारा हमें जन्म दिया, ताकि हम उसके हिस्से बनें, जीवन की विविधता में एकता दिखे।
संक्षेप सार
1 कुरिन्थियों 15:39 हमें यह दिखाता है कि ईश्वर ने सृष्टि को विविध शरीरों में बाँटा ताकि प्रत्येक अंग अपना अद्वितीय कार्य कर सके। यह उपदेश हमें एकता-में-विविधता की बुनियादी समझ देता है: परमेश्वर की योजना में हर प्राणी और हर प्रकार की रचना एक महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाती है, और उसी क्रम में हमारा जीवन भी एकता के साथ विविध क्षमताओं को साझा करे।
उद्धृत टीका-रेखा: “सब शरीर एक समान नहीं, परन्तु मनुष्यों का शरीर और है, पशुओं का शरीर और है; पक्षियों का शरीर और है; मछलियों का शरीर और है।” (1 कुरिन्थियों 15:39)