Old Testament
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1 कुरिन्थियों 15:1 1 कुरिन्थियों 15:2 1 कुरिन्थियों 15:3 1 कुरिन्थियों 15:4 1 कुरिन्थियों 15:5 1 कुरिन्थियों 15:6 1 कुरिन्थियों 15:7 1 कुरिन्थियों 15:8 1 कुरिन्थियों 15:9 1 कुरिन्थियों 15:10 1 कुरिन्थियों 15:11 1 कुरिन्थियों 15:12 1 कुरिन्थियों 15:13 1 कुरिन्थियों 15:14 1 कुरिन्थियों 15:15 1 कुरिन्थियों 15:16 1 कुरिन्थियों 15:17 1 कुरिन्थियों 15:18 1 कुरिन्थियों 15:19 1 कुरिन्थियों 15:20 1 कुरिन्थियों 15:21 1 कुरिन्थियों 15:22 1 कुरिन्थियों 15:23 1 कुरिन्थियों 15:24 1 कुरिन्थियों 15:25 1 कुरिन्थियों 15:26 1 कुरिन्थियों 15:27 1 कुरिन्थियों 15:28 1 कुरिन्थियों 15:29 1 कुरिन्थियों 15:30 1 कुरिन्थियों 15:31 1 कुरिन्थियों 15:32 1 कुरिन्थियों 15:33 1 कुरिन्थियों 15:34 1 कुरिन्थियों 15:35 1 कुरिन्थियों 15:36 1 कुरिन्थियों 15:37 1 कुरिन्थियों 15:38 1 कुरिन्थियों 15:39 1 कुरिन्थियों 15:40 1 कुरिन्थियों 15:41 1 कुरिन्थियों 15:42 1 कुरिन्थियों 15:43 1 कुरिन्थियों 15:44 1 कुरिन्थियों 15:45 1 कुरिन्थियों 15:46 1 कुरिन्थियों 15:47 1 कुरिन्थियों 15:48 1 कुरिन्थियों 15:49 1 कुरिन्थियों 15:50 1 कुरिन्थियों 15:51 1 कुरिन्थियों 15:52 1 कुरिन्थियों 15:53 1 कुरिन्थियों 15:54 1 कुरिन्थियों 15:55 1 कुरिन्थियों 15:56 1 कुरिन्थियों 15:57 1 कुरिन्थियों 15:58



1 कुरिन्थियों 15:51 (HINIRV) — भेद की बात: परिवर्तन का लक्ष्य
पद संदेश पौलुस के कान्तिपूर्ण पुनरुत्थान-वाक्यांश का एक अंश है, जो विश्वासियों को बताए कि मृत्यु के बाद का जीवन कैसे उजागर होगा। इस संदर्भ में पौलुस ने उन विश्वासियों को आश्वस्त किया, जो मसीह की कृपा पर टिके हों: हम शारीरिक निद्रा के बावजूद भी परिवर्तित होंगे, और यह परिवर्तन एक ऐसी जयलाभ घटना है जो हमारे लिए दृढ़ भरोसा पैदा करती है।
मुख्य अर्थ
“देखो, मैं तुम से भेद की बात कहता हूँ: कि हम सब तो नहीं सोएँगे, परन्तु सब बदल जाएँगे।” यह वाक्य यह स्पष्ट करता है कि परमेश्वर के तादात्म्य में हमारे जीवन का अंत नहीं है; कुछ का विशिष्ट निद्रा हो सकता है, परन्तु अंततः सभी का परिवर्तन अवश्यों से मुक्त होकर नया शरीर और नया महत्त्व पाएगा। यह परिवर्तन तत्काल, कृपापूर्वक और घोषणा-योग्य है, और यह यीशु मसीह के पुनरुत्थान की उद्घोषणा से जुड़ता है।
दो-तीन प्रमुख विषय
अन्य पाठों से सम्बन्ध
व्यावहारिक विचार
यह पद हमें निराशा में न रहते हुए जीवन के हर क्षण को प्रभु के उद्धार के दायरे में देखने को प्रेरित करता है। बीमारी या भय की स्थिति में भी हम जानते हैं कि इस परिवर्तन की उम्मीद स्थिर है, और यह संसार की अस्थायित्वपूर्ण चिंताओं से ऊपर उठने में मदद करती है। विश्वास करना कि ईश्वर प्रत्येक व्यक्ति के लिए एक नया, दिव्य शरीर और जीवन बनाते हैं, हमारे दैनिक जीवन को धैर्य, विनम्रता और आशा से संचालित करता है।
सार संक्षेप
1 कुरिन्थियों 15:51 में पौलुस बतलाते हैं कि कुछ लोग सोएँगे नहीं, कुछ परिवर्तन होते हुए जीवित रहेंगें। यह न केवल मृत्यु के बाद की स्थिति को बताता है, बल्कि हमारी सभी श्रद्धा के पूर्णत्व की योजना को भी उद्घाटित करता है—एक क्षणिक बदलाव से एक नया, अजर शरीर प्राप्त होगा, जो यीशु मसीह के पुनरुत्थान के अनुरूप है। इस आशा के साथ, हमारा जीवन तपस्या, विश्वास और प्रतीक्षा में समर्पित रहता है।
उद्धरण नोट: इस स्थान पर Matthew Henry, Albert Barnes और Adam Clarke के समान्य विचारों से समर्थित सुराग आवश्यक हो तो-
“भेद की बात” के विचार का सार: यह परिवर्तन की गति, नया जीवन और उद्धार की पूर्णता के लिए हमें प्रेरित करता है।
आधार तथ्य-चिन्ह