1 कुरिन्थियों 15:38 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका

परन्तु परमेश्‍वर अपनी इच्छा के अनुसार उसको देह देता है; और हर एक बीज को उसकी विशेष देह। (उत्प. 1:11)

1 कुरिन्थियों 15:38 पद-दर-पद बाइबल टीका

1 कुरिन्थियों 15:38 का अर्थ

इस पद का सरल आशय यह है: परमेश्वर जिस-जिस प्रकार का बीज देता है, उसी प्रकार सफल पौधा और देह बनती है; हर बीज अपनी ही देह प्राप्त करता है। प्राकृत क्रम में यह आत्मिक पुनर्जीवन के संदर्भ में प्रयुक्त है—जीवन के स्रोत परमेश्वर की इच्छा है, और सभी प्रकार के शरीर, उनके भीतर के क्रम के अनुसार विकसित होते हैं।

प्रृष्ठभूमि और संदर्भ

पॉल ने 1 कुरिन्थियों 15 में मसीही प्रभावशाली पुनर्जन्म के विषय पर स्पष्टता दी है। पहली बात: मृत्यु के बाद पुनर्जीवन एक वास्तविक भौतिक-आध्यात्मिक आपसी नाता है। दूसरी बात: परमेश्वर की योजना में हर बीज के साथ उसका लक्ष्य निर्धारित है—जैसे एक बीज अपनेहि रूप में उगता है, उसी प्रकार प्रत्येक शरीर के लिए एक निर्धारित देह है। यह आयत मसीह के शरीर के विविध अंगों और उनके क्रम की चर्चा के बीच प्रवर्तित है; यहाँ “बीज” से आशय जीव की क्रमबद्ध संरचना और परमेश्वर की व्यवस्था से है।

व्याख्या के प्रमुख बिंदु

  • परमेश्वर की इच्छा—जीवन का स्रोत वही है; वह देह देता है और प्रत्येक बीज को उसकी विशेष देह प्राप्त होती है।
  • देह की विविधता—हर बीज अपने अनुसंधान के अनुसार विकसित होकर एक विशिष्ट देह बनाता है; यह प्राकृतिक शरीर से लेकर भविष्य की पुनर्जीवित देह तक के क्रम को दर्शाता है।
  • उत्पादन का क्रम—जैसे बीज अपने प्रकार के अनुसार फल देता है, उसी प्रकार परमेश्वर अपने जन्म-जत परिवर्तनों को क्रमबद्ध ढंग से प्रस्तुत करता है।

क्रॉस-रेफरेंस और उनका संक्षिप्त संबल

- उत्पत्ति 1:11 से प्रेरणा मिलती है कि परमेश्वर ने हर बीज को उसकी प्रकृति के अनुसार उत्पन्न किया। यह स्थिर नियम बताता है कि जीवनीय संरचना की हर इकाई उसी प्रकार विकसित होती है।

— रोमियों 8:18-23 में पुनर्जन्म के समान अनुभव की तुलना प्राकृतिक गठन से मिलती है, जहाँ उत्पत्ति के कष्ट भविष्य के गले लगाने योग्य प्रकाश को संकेत करते हैं।

— लूका 8:11-15 में पौधारोपण की दृष्टि से वचन के रूप में बीज-जो शब्द है, वह भरोसे और फल-उपज के साथ जुड़ा है; यह सन्देश हर बीज के प्रकार के अनुसार प्रभाव दिखाता है।

पाद के साथ Matthew Henry, Albert Barnes और Adam Clarke से संक्षिप्त उद्धरण

Matthew Henry: “यह भवन है जो परमेश्वर के नियम से बनता है; हर बीज वही देह पाता है जिसके लिए वह बना है।”

Albert Barnes: “परमेश्वर अपनी इच्छा के अनुसार देह देता है”—यही जीवन की विविधता और पुनर्जन्म के क्रम की गारंटी है, जो मानवीय समझ से परे भी तारतम्य रखती है।

Adam Clarke: “हर बीज को उसकी विशेष देह”—देहों की विविधता और उनके लक्ष्य की प्रकृति को दर्शाता है कि आकाशीय और पृथ्वी दोनों मिलकर एक क्रमबद्ध योजना के अनुसार प्रवर्तित होते हैं।

सूक्ष्म तत्त्वों का एक छोटा संदर्भ-युक्त निष्कर्ष

  • परमेश्वर की नियति और व्यवस्था में विविधता एक समान नियम के भीतर है।
  • जीवन का क्रम क्रमशः खुलता है—जो आज है, वह कल उच्चतर रूप ले सकता है।
  • विश्वासियों के लिए यह आश्वस्त करता है कि हर प्रकार की देह परमेश्वर के नियंत्रण में है और उसी के अनुसार पुनर्जीवन की योजना पूरी होगी।

संक्षिप्त नैतिक अनुभूति

हम में से हर किसी को अपने जीवन के बीज—अपने गुण, अवसर और सेवाकार्यों—के प्रति विनम्र बनना चाहिए। परमेश्वर की इच्छा के अनुसार जो देह और फल हों, वही आध्यात्मिक जीवन का वास्तविक प्रमाण हैं।

पाठ से संबंधित सरल प्रश्न

1) परमेश्वर की इच्छा हमारे भीतर कैसे उद्घटित होती है? 2) क्या मेरे जीवन के बीज सचमुच उसकी देह-प्राप्ति की ओर बढ़ रहे हैं? 3) आज मैं अपने विश्वास-यात्रा में किस प्रकार के “बीज” दे रहा/रही हूँ?

*** इस टीका में सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध कुछ प्राचीन और क्लासिक स्रोतों की सामग्री शामिल है। कुछ सामग्री को कृत्रिम बुद्धिमत्ता उपकरणों की सहायता से संसाधित, संक्षिप्त या अनुवादित किया गया हो सकता है। हर व्याख्या को बाइबल के पूरे पाठ और उसके संदर्भ के साथ अवश्य जाँचें। यदि आपको कोई त्रुटि या ऐसा अनुवाद मिले जिसे सुधारने की आवश्यकता हो, तो कृपया हमसे संपर्क करें।

1 कुरिन्थियों 15:38 समानांतर पद और संबंधित वचन

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उत्पत्ति 1:11 HINIRV संबंधित बाइबल पद का चित्र
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फिर परमेश्‍वर ने कहा, “पृथ्वी से हरी घास, तथा बीजवाले छोटे-छोटे पेड़, और फलदाई वृक्ष भी जिनके बीज उन्हीं में एक-एक की जाति के अनुसार होते हैं पृथ्वी पर उगें,” और वैसा ही हो गया। (1 कुरि. 15:38)

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भजन संहिता 104:14 (HINIRV) »
तू पशुओं के लिये घास, और मनुष्यों के काम के लिये अन्न आदि उपजाता है, और इस रीति भूमि से वह भोजन-वस्तुएँ उत्‍पन्‍न करता है

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क्योंकि जैसे भूमि अपनी उपज को उगाती, और बारी में जो कुछ बोया जाता है उसको वह उपजाती है, वैसे ही प्रभु यहोवा सब जातियों के सामने धार्मिकता और धन्यवाद को बढ़ाएगा।

1 कुरिन्थियों 15 (HINIRV) Verse Selection

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