1 कुरिन्थियों 15:21 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका

क्योंकि जब मनुष्य के द्वारा मृत्यु आई*; तो मनुष्य ही के द्वारा मरे हुओं का पुनरुत्थान भी आया।

1 कुरिन्थियों 15:21 पद-दर-पद बाइबल टीका

अर्थ का संक्षिप्त निष्कर्ष

यह वचन कहता है: जैसे मृत्यु मनुष्य के द्वारा आई, वैसे मरे हुओं का पुनरुत्थान भी मनुष्य के द्वारा है। अर्थात् मृत्यु के स्रोत और पुनरुत्थान के जिम्मेदार क्रम ईश्वर के दिव्य व्यवस्था के भीतर हैं; मसीह द्वारा दी गई कृपा से ही जीवन का पुनरुत्थान संभव होता है।

पृष्ठभूमि और स्थानीय संदर्भ

1 कुरिन्थियों 15 समूचे अध्याय में पवित्रता के सुसमाचार, मसीह की मृत्यु, उसके कब्र से जी उठना और हमारे शरीर की पुनःस्थापना का ईमानदार संदेश है। यहाँ पौलुस बताते हैं कि जैसे एक मानव के कारण मृत्यु आई, वैसे ही एक और मनुष्य के द्वारा — यीशु मसीह — मृत्यु पर विजय और जीवितों का पुनरुत्थ्थान संभव होता है। यह क्रमावली ईश्वर की योजना के अनुसार है; मानव का फेल्योर-युगांतकारी प्रभाव मृत्यु को ले आता है, पर क्रूस के बाद मसीह के प्रभाव से जीवन की नई वास्तविकता आयी है।

व्याख्यात्मक संकेत

  • प्रथम व्यक्ति (आदम) के कर्म से मृत्यु आयी — यह मानवजाति की ग़लती और पाप का प्रतिफल है; लेकिन उसका उलटा भी संभव है, अर्थात् मसीह के द्वारा जीवन आएगा।
  • पुनरुत्थान के स्रोत का निर्धारण: ईश्वर के द्वारा, और मनुष्य के द्वारा नहीं; यीशु मसीह एक नया प्रतिनिधित्व बनकर आए हैं, जो कि विश्व के लिए जीवन की राह खोलते हैं।
  • यह शास्त्र-वाक्य यह भी संकेत देता है कि शरीर और जीवन की सड़ांध शारीरिक मृत्यु से है, परन्तु पुनरुत्थान का शरीर आशा और नयाordan बनकर आता है — एक दिव्य परिवर्तन के माध्यम से।

महत्त्वपूर्ण विचार

  1. मानवीय संस्था के बाद भी ईश्वरीय योजना का प्रचार; जीवन का मार्ग मसीह में है।
  2. पाप के कारण मृत्यु आई, पुनरुत्थान के लिए ईश्वर की कृपा आवश्यक है।
  3. विश्वास में स्थिर रहते हुए हम जानें कि मरकर भी जीवन है और नया शरीर हमारे लिए सुरक्षित है।

संबंधित बाइबिल अंश

1) रोम 5:12 के संदर्भ: पाप और मृत्यु के प्रसार का वर्णन है—मनुष्य के द्वारा पाप पहुँचा और मृत्यु आयी। यह वास्तविकपने में इस वचन के साथ संगति रखता है कि मृत्यु मानव के द्वारा है, परन्तु पुनरुत्थान के लिए ईश्वर की कृपा भी उसी क्रम में है।

2) 1 कुरिन्थियों 15 के अन्य हिस्से: मसीह के जी उठने की पुष्टि और सभी का क्रमबद्ध परिवर्तन—यह हम सभी के लिए आशा बनती है कि हमारे शरीर एक दिव्य परिवर्तन से सुधरे जाएंगे।

3) इब्रानी 9:27-28 का विचार: मृत्यु एक बार है और उसके बाद न्याय; पुनरुत्थान का जीवन उसी न्यायपूर्ण योजना का भाग है।

कथा-प्रेरक संकेत

यह वचन हमें स्मरण दिलाता है कि जीवन और मृत्यु ईश्वर के वश में हैं। मानव इतिहास एक कहानी नहीं है केवल दुखों का; यह एक ऐसी योजना का हिस्सा है जिसमें मृत्यु की जगह जीवन लेता है। विश्वास में स्थिर रहने पर हम आगे की आशा देखते हैं—एक नया शरीर, एक नया संसार, और परमेश्वर के साथ अनंत जीवन।

संक्षिप्त उपयोगी निष्कर्ष

  • मृत्यु के कारण जो मानव-प्रभाव है, वह सिर्फ एक पहलू है; परमेश्वर की महिमा इसके परे है।
  • येशु के माध्यम से प्रकाशित होने वाला जीवन, मृत्यु के बाद भी संभव है।

टेकअवे

हमारे पास यह आशा है कि जैसे एक मनुष्य के द्वारा मृत्यु आई, उसी के द्वारा पुनरुत्थान भी संभव है — क्योंकि यह ईश्वर की योजना के अनुरूप है। इसलिए विश्वास में खड़े हो कर हमें जीवित आशा और पवित्र परिवर्तन की प्रतीक्षा करनी चाहिए।

टिप्पणी नोट: इस पाठ पर Matthew Henry, Albert Barnes और Adam Clarke के संक्षिप्त उद्धरण सीधे नहीं दिए गए हैं; उनके धारावाहिक विचारों से प्रेरित सामान्य टिप्पणियाँ समाविष्ट हैं, ताकि मूल संदर्भ के साथ एक संतुलित, सार्वजनिक-डोमेन शैली का हिन्दी-व्याख्यात्मक सार प्रस्तुत हो सके।

*** इस टीका में सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध कुछ प्राचीन और क्लासिक स्रोतों की सामग्री शामिल है। कुछ सामग्री को कृत्रिम बुद्धिमत्ता उपकरणों की सहायता से संसाधित, संक्षिप्त या अनुवादित किया गया हो सकता है। हर व्याख्या को बाइबल के पूरे पाठ और उसके संदर्भ के साथ अवश्य जाँचें। यदि आपको कोई त्रुटि या ऐसा अनुवाद मिले जिसे सुधारने की आवश्यकता हो, तो कृपया हमसे संपर्क करें।

1 कुरिन्थियों 15:21 समानांतर पद और संबंधित वचन

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यीशु ने उससे कहा, “पुनरुत्थान और जीवन मैं ही हूँ*, जो कोई मुझ पर विश्वास करता है वह यदि मर भी जाए, तो भी जीएगा।

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और जैसे आदम में सब मरते हैं, वैसा ही मसीह में सब जिलाए जाएँगे।

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इसलिए जैसा एक मनुष्य के द्वारा पाप जगत में आया, और पाप के द्वारा मृत्यु आई, और इस रीति से मृत्यु सब मनुष्यों में फैल गई, क्योंकि सब ने पाप किया। (1 कुरि. 15:21-22)

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