Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीVerse
1 कुरिन्थियों 7:1 1 कुरिन्थियों 7:2 1 कुरिन्थियों 7:3 1 कुरिन्थियों 7:4 1 कुरिन्थियों 7:5 1 कुरिन्थियों 7:6 1 कुरिन्थियों 7:7 1 कुरिन्थियों 7:8 1 कुरिन्थियों 7:9 1 कुरिन्थियों 7:10 1 कुरिन्थियों 7:11 1 कुरिन्थियों 7:12 1 कुरिन्थियों 7:13 1 कुरिन्थियों 7:14 1 कुरिन्थियों 7:15 1 कुरिन्थियों 7:16 1 कुरिन्थियों 7:17 1 कुरिन्थियों 7:18 1 कुरिन्थियों 7:19 1 कुरिन्थियों 7:20 1 कुरिन्थियों 7:21 1 कुरिन्थियों 7:22 1 कुरिन्थियों 7:23 1 कुरिन्थियों 7:24 1 कुरिन्थियों 7:25 1 कुरिन्थियों 7:26 1 कुरिन्थियों 7:27 1 कुरिन्थियों 7:28 1 कुरिन्थियों 7:29 1 कुरिन्थियों 7:30 1 कुरिन्थियों 7:31 1 कुरिन्थियों 7:32 1 कुरिन्थियों 7:33 1 कुरिन्थियों 7:34 1 कुरिन्थियों 7:35 1 कुरिन्थियों 7:36 1 कुरिन्थियों 7:37 1 कुरिन्थियों 7:38 1 कुरिन्थियों 7:39 1 कुरिन्थियों 7:40



1 कुरिन्थियों 7:22—Verse की सरल व्याख्या
पद का मूल विचार यह है कि हमारे संचालन-स्थिति चाहे दास की हो या स्वतंत्रता की, यीशु मसीह के अनुयायी बनने से पहले और बाद में सचमुच हमारे उद्धारकर्ता के साथ एक रिश्ता बन जाता है। जिस स्थिति में हमें बुलाया गया है, वहीं से हमारी पहचान बन जाती है: दास होने पर भी प्रभु में बुलाने से हम प्रभु के स्वतंत्र हुए दास बन जाते हैं, और स्वतंत्र अवस्था में बुलाने पर भी हम मसीह के दास हो जाते हैं। इस दुविधा से ऊपर उठ कर बाइबल यह सिखाती है कि अधिकारों या सामाजिक स्थिति के फेर से नहीं, पर ईश्वर के बुलावे से हमारा सार क्या है।
मुख्य अर्थ
यहां नीतिगत पाठ यह बताता है कि ईमानदार जीवन की दिशा व्यक्तिगत स्थिति से परे है। हमारे उद्धारकर्ता के साथ बंधन—चाहे सामाजिक स्तर ऊँचा हो या नीचे—हमें नया उद्देश्य देता है: मसीह के काम और प्रेम के लिए जीवित रहना। इसलिए वास्तविक स्वतंत्रता वही है जिसे हम प्रभु के अनुरूप जीते हैं, और वास्तविक दासत्व वही है जो हमारे सेवकत्व को ईश्वर के सत्य के अनुसार प्रस्तुत करता है।
दो-तीन प्रमुख विषय
पयुक्त क्रॉस-रेफरेंसेज
यौहान 8:36 से संबंधित विचार: आत्म-स्वतंत्रता सत्य में है, पर वास्तविक उद्धार सत्य-आत्मा के द्वारा है। यह verse दिखाता है कि कौन से बंधन वास्तव में मुक्त करते हैं।
1 कुरिन्थियों 9:19: पवित्रता के लिए अपनी स्वतंत्रता का सही उपयोग—स्वतंत्रता को अन्यों के कल्याण के लिए समर्पित करना।
2 कुरिन्थियों 3:17: प्रभु की आत्मा से जहाँ वास्तविक स्वतंत्रता होती है, वहाँ हर प्रकार का बन्धन समाप्त हो जाता है।
व्यावहारिक विचार
व्यावहारिक दृष्टिकोण से, यह verse हमें यह सिखाता है कि हमारी स्थिति कितनी भी मायने रखती हो, सबसे बड़ी पहचान मसीह के साथ है। यदि हम दास की दशा में बुलाए गए हैं, तो हमें सेवा, नम्रता और प्रेम में आगे बढ़ना चाहिए; यदि स्वतंत्रता में बुलाए गए हैं, तो हमें भी मोह-घमंड से ऊपर उठकर सेवा-भाव अपनाना है। ईश्वर के प्रति हमारी वफ़ादारी और दूसरों के लिए हमारा समर्पण ही असली स्वतंत्रता की निशानी है।
संक्षिप्त निष्कर्ष
यह पद यह पुष्टि करता है कि हमारे प्रति ईश्वर का बुलावा हमारे सामाजिक-कैद से परे है। दासता या स्वतंत्रता—दोनों स्थितियाँ एक ही लक्ष्य के लिए हैं: मसीह के अनुशासन और प्रेम को जीवन का केंद्र बनाना। असली स्वतंत्रता वही है जो प्रभु के सेवकत्व में प्यार और निष्ठा के साथ जीने से मिलती है।