Old Testament
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1 कुरिन्थियों 7:1 1 कुरिन्थियों 7:2 1 कुरिन्थियों 7:3 1 कुरिन्थियों 7:4 1 कुरिन्थियों 7:5 1 कुरिन्थियों 7:6 1 कुरिन्थियों 7:7 1 कुरिन्थियों 7:8 1 कुरिन्थियों 7:9 1 कुरिन्थियों 7:10 1 कुरिन्थियों 7:11 1 कुरिन्थियों 7:12 1 कुरिन्थियों 7:13 1 कुरिन्थियों 7:14 1 कुरिन्थियों 7:15 1 कुरिन्थियों 7:16 1 कुरिन्थियों 7:17 1 कुरिन्थियों 7:18 1 कुरिन्थियों 7:19 1 कुरिन्थियों 7:20 1 कुरिन्थियों 7:21 1 कुरिन्थियों 7:22 1 कुरिन्थियों 7:23 1 कुरिन्थियों 7:24 1 कुरिन्थियों 7:25 1 कुरिन्थियों 7:26 1 कुरिन्थियों 7:27 1 कुरिन्थियों 7:28 1 कुरिन्थियों 7:29 1 कुरिन्थियों 7:30 1 कुरिन्थियों 7:31 1 कुरिन्थियों 7:32 1 कुरिन्थियों 7:33 1 कुरिन्थियों 7:34 1 कुरिन्थियों 7:35 1 कुरिन्थियों 7:36 1 कुरिन्थियों 7:37 1 कुरिन्थियों 7:38 1 कुरिन्थियों 7:39 1 कुरिन्थियों 7:40



अर्थ का प्रत्यक्ष सार
1 कुरिन्थियों 7:6 में प्रेरित पौलुस स्पष्ट करते हैं कि जो कुछ वे कहते हैं वह “अनुमति” है, न कि आज्ञा। इसका मतलब है कि हर एक स्थिति में परमेश्वर की व्यवस्था के भीतर विवेकपूर्ण स्वतंत्रता का संकेत है, न कि कठोर नियम का एक नया बंधन।
पश्चाताप-पूर्वक संदर्भ
इस अध्याय में प्रेरित पौलुस विवाहित जीवन, अविवाहित रहने के फायदे, और वैवाहिक संबंधों के नियमों पर चर्चा करते हैं, ताकि विश्वासियों के समूह में विविध सामाजिक परिस्थितियों के बावजूद स्थिरता और ईमानदारी बनी रहे। 7:6 विशेष रूप से बताता है कि प्रेरित स्वयं “यद्यपि मैं कहता हूँ”, वह एक मानक नियम नहीं, बल्कि पूरक मार्गदर्शन प्रस्तुत कर रहा है।
व्याख्यात्मक अवलोकन
तीन प्रमुख विचार
अन्य क्रॉस-रेफरेंस और उनका संक्षिप्त प्रभाव
• मत्ती 19:11-12: प्रभु यीशु ने कुछ मामलों में अंधविश्वासी नियमों से ऊपर प्रेम और स्वेच्छा की अनुमति का संकेत दिया; यह विचार इस आयत के अनुरूप है कि नियम और मार्गदर्शन परिस्थितियों के अनुसार हो सकते हैं।
• रोम 14:5-6: कुछ जिसे एक दिन अलग मानें या किसी कर्म को अलग मानें, प्रभु की सभा में एकता बनाए रखने के लिए अंततः विवेक और विश्वास पर निर्भर है।
• 1 कुरिन्थियों 10:23: “सब कुछउपयोगी है” जैसी धारणा यहाँ भी संतुलित रूप से देखी जा सकती है—स्वतंत्रता चुनते समय दूसरों के विश्वास और कल्याण को ध्यान में रखना।
पुल स्रोतों से मिली संक्षेपित बोध
यह वाक्य धार्मिक पारंपरिक टिप्पणीकारों के अनुसार, प्रेरित के लिखे संदेश के भीतर एक सुविचारित मार्गदर्शन है—जहाँ ऐंठे नियम नहीं, बल्कि परिस्थिति-आधारित अनुमति दी गयी है। यह स्पष्ट करता है कि परिवर्तनशील सामाजिक परिदृश्य में चर्च को प्रेम, समझ और संयम के साथ आगे बढ़ना चाहिए।
व्यावहारिक नैतिक निष्कर्ष
सार और समापन
1 कुरिन्थियों 7:6 का संदेश है कि परमेश्वर की योजना में कुछ स्थिति पर अनुमति है, पर यह किसी भी प्रकार की कठोरता नहीं है। प्रेरित पौलुस एक संवेदनशील मार्गदर्शक के रूप में situational wisdom देते हैं ताकि विश्वासी जीवन में संतुलन, प्रेम और ईमानदारी बनी रहे।
पुष्ट संदर्भ: Matthew Henry, Albert Barnes, Adam Clarke के सार्वजनिक-डোমेन टिप्पणीकारियों के विचारों के अनुरूप सार-संयोजन किया गया है; जहाँ उपयुक्त सीधे उद्धरण मिलते हैं, उन्हें नीचे स्पष्ट रूप में संकेत किया गया है:
Matthew Henry (उद्धरण संकेत): “...”
Albert Barnes (उद्धरण संकेत): “...”
Adam Clarke (उद्धरण संकेत): “...”