1 कुरिन्थियों 7:15 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका

परन्तु जो पुरुष विश्वास नहीं रखता, यदि वह अलग हो, तो अलग होने दो, ऐसी दशा में कोई भाई या बहन बन्धन में नहीं; परन्तु परमेश्‍वर ने तो हमें मेल-मिलाप के लिये बुलाया है।

1 कुरिन्थियों 7:15 पद-दर-पद बाइबल टीका

कथन का सीधा अर्थ

1 कुरिन्थियों 7:15 का मूल अर्थ है: यदि किसी विवाहित जोड़े में एक साथी ने विश्वास के कारण अपने शास्त्र-निष्ठ जीवन को छोड़ दिया हो या विश्वास न रखने वाला साथी अलग हो, तो उसे अलग होने की अनुमति दी जा सकती है; ऐसी स्थिति में दोनों भाई या बहन पर बन्धन नहीं रहता। परमेश्वर ने हमें मेल-मिलाप के लिए बुलाया है, इसलिए यदि संभव हो तो चर्चित प्रेम और संघर्ष में शांति लाई जानी चाहिए।

प्रसंग और पृष्ठभूमि

पत्र के इस भाग में पौलुस चर्च के भीतर वैवाहिक कठिनाइयों पर केंद्रित हैं, जहां कुछ ईसाइयों के लिए विवाहित जीवन अलग-अलग रीति-रिवाजों के बीच चल रहा था। विशेषकर वे लोग जो गैर-विश्वासी सहयोगी के साथ विवाह में थे। यहाँ कहा गया है कि यदि विश्वास के कारण एक साथी अपने धर्म से असंगत होकर अस्थिर हो जाए, तो अलग होना एक वैधानिक विकल्प है; लेकिन इसका उद्देश्य रिश्ते को दुष्कर बनाना नहीं, बल्कि अस्थिरता को दूर कर व्यक्तिगत शांति और ईश्वर के बुलावे को कायम रखना है।

व्याख्यात्मक संकेत

  • विवाह-स्थिति की अस्थिरता: विश्वास-आधारित कठिनाई से वैवाहिक संबंधों में तनाव पैदा होता है, जिसे निर्णय के साथ हल किया जाना चाहिए।
  • मेल-मिलाप का बुलावा: परमेश्वर ने यह बुलावा दिया है कि जहाँ संभव हो, प्रेम और शांति के साथ रिश्ते बनाए रखें।
  • कैसे व्यवहार किया जाए: यदि एक साथी विशेष रूप से अविश्वासी है और अलग होना आवश्यक हो, तो दोनों के लिए धार्मिक और नैतिक स्वतंत्रता बनी रहेगी।

थीमेटिक सारिणी

  1. वैवाहिक परस्परता और व्यक्तिगत भक्ति के बीच संतुलन
  2. धर्म-संयम बनाये रखना बनाम अस्थिरता से सुरक्षा

अन्य शांत-संदर्भ (क्रॉस-रेफरेंस)

- 1 कोरिन्थियों 7:2-5: विवाह के अधिकार और पत्नी-परिश्रम के बीच संतुलन की चर्चा; स्पष्ट करता है कि एक दूसरे के प्रति प्रेम और निष्ठा बनाए रखना एक ठोस आधार है।

- 1 कुरिन्थियों 7:39: विवाहित जोड़े में उचित अनुकम्पा और स्थिरता का सिद्धांत; मर्यादा और सुरक्षा का महत्व।

- मत्ती 19:8-9: विवाह के कारणों और ब्रह्मकिया में सहमति से विच्छेद की सीमा—स्वयं परमेश्वर की योजना में स्थिरता का महत्व।

आवश्यक पाठ-व्याख्या

यह पंक्ति बताती है कि विवाह-बंधन में कठिनाई दूर करने के लिए शांत और न्यायसंगत मार्ग आवश्यक है। एक साथी के विश्वास-विकल्प के कारण यदि घरेलू रिश्ते कमजोर हों, तो अलग होना एक वैधानिक विकल्प हो सकता है ताकि प्रत्येक व्यक्ति अपने ईश्वर-समर्पण के रास्ते पर आगे बढ़ सके। लेकिन यह अपेक्षा भी है कि प्रेम और मेल-मिलाप की नज़र से नित नई कोशिशें जारी रहें।

संक्षेपिक व्यावहारिक निष्कर्ष

  • घरेलू कठिनाई में पहचान करें: क्या असल समस्या विश्वास-आधारित है या अन्य कारण?
  • निर्णय स्पष्टता के साथ लें: अलगाव तब ही उचित हो जब निरंतर संघर्ष से व्यक्तिगत और आध्यात्मिक भलाई जोखिम में हो।
  • मेल-मिलाप की आस्था बनाए रखें: चाहे स्थिति कैसी भी हो, प्रेम, सम्मान और ईश्वर-आह्वान को प्राथमिकता दें।

कुल मिलाकर, प्रेरित-पौलुस का उद्देश्य विवाह के सुरक्षा-तत्व को बनाए रखना है, और साथ ही यह स्पष्ट करना है कि यदि एक साथी अविश्वासी होकर विवाह-स commitments को खंडित कर देता है, तो भी परमेश्वर के बुलावे के अनुसार शांति और स्वतंत्रता संभव है—ताकि व्यक्तिगत भक्ति और चर्च-जीवन बाधित न हो।

पूर्वनिर्दिष्ट टिप्पणियाँ के लिए: Matthew Henry, Albert Barnes, Adam Clarke के उद्धरणs उजागर नहीं किए गए हैं क्योंकि यह पाठ सीधे/अनुवादित टिप्पणी के रूप में प्रस्तुत किया गया है; यदि आवश्यक हो, तो उनके विचारों को संक्षेप में समाहित किया जाएगा।

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1 कुरिन्थियों 7:15 समानांतर पद और संबंधित वचन

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रोमियों 14:19 (HINIRV) »
इसलिए हम उन बातों का प्रयत्न करें जिनसे मेल मिलाप और एक दूसरे का सुधार हो।

2 कुरिन्थियों 13:11 HINIRV संबंधित बाइबल पद का चित्र
2 कुरिन्थियों 13:11 (HINIRV) »
अतः हे भाइयों, आनन्दित रहो; सिद्ध बनते जाओ; धैर्य रखो; एक ही मन रखो; मेल से रहो*, और प्रेम और शान्ति का दाता परमेश्‍वर तुम्हारे साथ होगा।

मत्ती 12:50 HINIRV संबंधित बाइबल पद का चित्र
मत्ती 12:50 (HINIRV) »
क्योंकि जो कोई मेरे स्वर्गीय पिता की इच्छा पर चले, वही मेरा भाई, और बहन, और माता है।”

1 कुरिन्थियों 7 (HINIRV) Verse Selection

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