Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीVerse
1 कुरिन्थियों 7:1 1 कुरिन्थियों 7:2 1 कुरिन्थियों 7:3 1 कुरिन्थियों 7:4 1 कुरिन्थियों 7:5 1 कुरिन्थियों 7:6 1 कुरिन्थियों 7:7 1 कुरिन्थियों 7:8 1 कुरिन्थियों 7:9 1 कुरिन्थियों 7:10 1 कुरिन्थियों 7:11 1 कुरिन्थियों 7:12 1 कुरिन्थियों 7:13 1 कुरिन्थियों 7:14 1 कुरिन्थियों 7:15 1 कुरिन्थियों 7:16 1 कुरिन्थियों 7:17 1 कुरिन्थियों 7:18 1 कुरिन्थियों 7:19 1 कुरिन्थियों 7:20 1 कुरिन्थियों 7:21 1 कुरिन्थियों 7:22 1 कुरिन्थियों 7:23 1 कुरिन्थियों 7:24 1 कुरिन्थियों 7:25 1 कुरिन्थियों 7:26 1 कुरिन्थियों 7:27 1 कुरिन्थियों 7:28 1 कुरिन्थियों 7:29 1 कुरिन्थियों 7:30 1 कुरिन्थियों 7:31 1 कुरिन्थियों 7:32 1 कुरिन्थियों 7:33 1 कुरिन्थियों 7:34 1 कुरिन्थियों 7:35 1 कुरिन्थियों 7:36 1 कुरिन्थियों 7:37 1 कुरिन्थियों 7:38 1 कुरिन्थियों 7:39 1 कुरिन्थियों 7:40



1 कुरिन्थियों 7:26 का संदर्भ और अर्थ
पद 7:26 में पौलुस क्लेश के समय की स्थितियों को देखते हुए एक व्यवहारिक विवेक प्रदान करते हैं। वे कहते हैं कि उन्हीं परिस्थितियों में रहना उचित है, जो अभी चल रही कठिनाईयों और बाधाओं के कारण बनते हैं। यह सूक्ति स्पष्ट करती है कि जीवन के अस्थिर समय में भी ईश्वर की योजना और विश्वास के अचल धागे पर निर्भर होकर व्यवहार तय करना चाहिए।
मुख्य विचार
इस आयत का केंद्रबिंदु यह है कि जब संसार में कठिन परिस्थितियाँ चल रही हों, तब भी ईमानदार ग्रामीणता की तरह, खुले तौर पर “जैसा है, वैसा ही रहे” या जीवन की वर्तमान स्थितियों के साथ सामंजस्य बनाकर चलना उचित रहता है। यह शब्द-शैली धार्मिक उत्साह के बजाय व्यवहारिक विवेक की ओर इशारा करती है: परिस्थितियाँ जब तक बदली नहीं जातीं, तब तक मनुष्य को धैर्य और ठहराव बनाए रखना चाहिए।
दो-तीन प्रमुख विषय
संबद्ध पाठ (क्रॉस-रेफरेंसेस)
इस विषय से जुड़ी अन्य आयतें हैं:
इन संदर्भों से संकेत मिलता है कि कठिन समय में धैर्य, प्रभु की योजना पर भरोसा, और व्यवहारिक विवेक साथ चलते हैं ताकि विश्वास मजबूत रहे और ईश्वर के उद्देश्य स्पष्ट दिखें।
व्यावहारिक विचार
आज के संदर्भ में यह verse प्रेरित करता है कि आप अपनी स्थिति को पूर्ववत नहीं बदल सकते तो कैसे बेहतर निर्णय ले सकते हैं—खर्च-घटाओ, रिश्तों में संयम, और उम्मीद की बुनियाद को बनाये रखना। किसी भी परिवर्तन का प्रयास करते समय विश्वसनीय मार्गदर्शक के तौर पर परमेश्वर के सिद्धांतों को आधार बनाएं।
संक्षिप्त समापन
इस आयत के अनुसार क्लेश के समय हम अपनी स्थितियों के अनुसार विवेकपूर्ण, धैर्यपूर्ण और विश्वासपूर्ण रहते हैं। यह एक मार्गदर्शक तथ्य है कि परमेश्वर ऐसी परिस्थितियों में भी हमारे कदमों को दिशा देते हैं, जब हम आज के समय की कठिनाईयों के बीच “यही ठीक है” के अनुरूप निर्णय लेते हैं।
उद्धृत टिप्पणीकारों के संकेत
यहाँ सम्बद्ध विचारों के लिए मौलिक वृतांत से प्रेरित कहानी-राइ निर्देश नीचे दिए गए हैं, जिनमें Matthew Henry, Albert Barnes और Adam Clarke के सार्वजनिक डोमेन टिप्पणियों का संक्षिप्त समन्वय किया गया है:
Matthew Henry के अनुसार, कठिन समय में स्थिरता बनाये रखना परमेश्वर के लोक के लिए लाभदायक रहता है और प्रेरित किया गया है कि विश्वास की दृष्टि से हम परिस्थितियों के मुताबिक चलें।
Albert Barnes बताते हैं कि यहाँ का “अच्छा है” विवेकपूर्ण निर्णयों के साथ तालमेल बिठाने से जुड़ा है—कि क्लेश के समय में भी आत्म-नियंत्रण और निर्भरता बनी रहे।
Adam Clarke का विश्लेषण इस बात पर केंद्रित है कि समय की परीक्षा में विश्वसनीयता और ईश्वरीय अनुशासन बनाए रखना चिरस्थायी परिणामों के लिए आवश्यक है।
नोट: यदि आप चाहें तो ऊपर उद्धृत विचारों के लिए शब्द-शैली के छोटे-छोटे सीधे उद्धरण सीधे दर्शाए जा सकते हैं, परन्तु पूर्ण पाठ नहीं।